दुनिया के तमाम देशों में कोरोना संक्रमण के मामले एक बार फिर से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। विशेषकर यूरोप में कोरोना एक बार फिर से लोगों के लिए गंभीर समस्याओं का कारण बनता हुआ दिख रहा है। इस बीच वैज्ञानिकों ने कोरोना के एक और नए वैरिएंट के बारे में लोगों को आगाह किया है। रिपोर्टस के मुताबिक कोरोना का यह नया वैरिएंट बी.1.1.1.529 काफी संक्रामक हो सकता है। अब तक तीन देशों में इस वैरिएंटस के 10 मामलों की पुष्टि की जा चुकी है, वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी प्रकृति गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है। अध्ययन से पता चलता है कि कोरोना के इस वैरिएंट में एक-दो नहीं 32 म्यूटेशन देखे गए हैं, जो इसे काफी संक्रामक बनाते हैं।
नया खतरा: कोरोना के इस 'सुपर संक्रामक' वैरिएंट ने बढ़ाई चिंता, 32 म्यूटेशन बनाते हैं इसे डेल्टा से भी खतरनाक
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वैरिएंट में देखे गए हैं 32 म्यूटेशन
Just spotted: very small cluster of variant associated with Southern Africa with very long branch length and really awful Spike mutation profile including RBD - K417N, N440K, G446S, S477N, T478K, E484A, Q493K, G496S, Q498R, N501Y, Y505Hhttps://t.co/kgA9c1hKDa
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोरोना के इस नए वैरिएंट की पहचान सबसे पहले बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका में की गई थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक कोरोना के इस नए वैरिएंट में देखे गए करीब 32 म्यूटेशन इसे बेहद संक्रामक बनाते हैं। म्यूटेशन की संख्या जितनी अधिक होगी, वायरस के प्रतिरक्षा से बचने की संभावना भी उतनी ही अधिक होती है। इंपीरियल कॉलेज लंदन के वायरोलॉजिस्ट डॉ टॉम पीकॉक ने जीनोम साझा करते हुए लिखा "वायरस में अविश्वसनीय रूप से उच्च मात्रा में स्पाइक म्यूटेशन देखे गए हैं जो बताते हैं कि यह वास्तविक चिंता का विषय हो सकता है।
एंटीबॉडीज को आसानी से दे सकता है चकमा
रिपोर्टस के मुताबिक कोरोना के इस नए वैरिएंट में देखे गए K417N और E484A म्यूटेशन, दक्षिण अफ्रीकी में ही सामने आए 'बीटा' वैरिएंट के समान है। यह म्यूटेशन वैक्सीन से बनी एंटीबॉडीज को आसानी से चकमा देने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा बी.1.1.1.529 में डेल्टा वैरिएंट की ही तरह N440K म्यूटेशन और न्यूयॉर्क वैरिएंट की तरह S477N म्यूटेशन देखा गया है जो इसे एंटीबॉडी से बचने में माहिर बनाता है। कोरोना के इस वैरिएंट में P681H और N679K म्यूटेशनों का भी पता चला है, जो पहली बार देखे गए हैं और इसे अधिक जैब प्रतिरोधी बना सकते हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
कोरोना के इस नए वैरिएंट ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। यूसीएल जेनेटिक्स इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो फ्रांकोइस बलौक्स कहते है कि वैरिएंट में इतनी बड़ी संख्या में म्यूटेशन स्पष्ट रूप से "सिंगल बर्स्ट" में जमा हुआ है, इससे पता चलता है कि यह कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों में पुराने संक्रमण के दौरान विकसित हो सकता है। यह कितना संक्रामक है, फिलहाल इस बारे में स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है, हालांकि यह निश्चित है कि अब तक के तमाम वैरिएंट्स की तुलना में यह काफी खतरनाक हो सकता है। इसकी बारीकी से निगरानी और विश्लेषण किया जाना चाहिए।
डेल्टा से भी हो सकता है खतरनाक
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना के इस नए वैरिएंट को "वैरिएंट अंडर मॉनीटरिंग" के रूप में सूचीबद्ध किया है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में जेनेटिक्स के प्रोफेसर फ्रेंकोइस बलौक्स कहते हैं, अब तक इस वैरिएंट को लेकर जितना भी डेटा प्राप्त हुआ है इसके आधार पर कहा जा सकता है कि यह अब तक के सबसे खतरनाक डेल्टा की तुलना में एंटीबॉडी को चकमा देने में अधिक सक्षम हो सकता है। मतलब जिन लोगों का टीकाकरण हो चुका है यह उन लोगों के लिए भी बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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