प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय-समय पर सेहत में सुधार को लेकर लोगों को जागरूक करते रहे हैं। बढ़ते मोटापे की समस्या से निपटने के लिए खाने के तेल में कटौती की बात हो या फिट इंडिया मूवमेंट, स्वास्थ्य सुधार उनके विकसित भारत मिशन का महत्वपूर्ण पहलू है।
Antibiotic Resistance: एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को लेकर पीएम मोदी ने चेताया, जानिए इसपर क्या कहते हैं डॉक्टर्स?
- 'मन की बात' के इस साल के आखिरी अंक में पीएम मोदी ने एंटीबायोटिक्स के गलत इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना डॉक्टरी सलाह के इनका इस्तेमाल, जीवन बचाने वाली इन दवाओं को बेअसर और खतरनाक बना रहा है।
डॉक्टर्स की टीम ने इस पहल की सराहना की
#WATCH | Delhi: On PM Modi citing ICMR report on antibiotic resistance, Director, ILBS, Shiv Kumar Sarin says," Today, the PM made a strong plea to citizens of India to use antibiotics more judiciously and at the advice of the medical specialists. I thank him for awakening the… pic.twitter.com/ih6OVCrCCA
पीएम मोदी द्वारा एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पर आईसीएमआर की रिपोर्ट का जिक्र करने की डॉक्टर्स की टीम ने सराहना की है।
इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलिअरी साइंसेज (आईएलबीएस) के डायरेक्टर शिव कुमार सरीन ने कहा, प्रधानमंत्री ने देश के नागरिकों से अपील की है कि वे एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल सोच-समझकर और मेडिकल स्पेशलिस्ट की सलाह पर ही करें। मैं लोगों, डॉक्टरों और फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री की सोच को जगाने के लिए उनका धन्यवाद करता हूं।
— ANI (@ANI) December 29, 2025
भारत दुनियाभर में एंटीबायोटिक्स का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है और अस्पतालों में लगभग 4 में से 3 संक्रमण के मामले एंटीबायोटिक्स के प्रति रेजिस्टेंट हो सकते हैं। यानी कि ऐसे मामलों पर दवाओं का असर नहीं होता है। मैं पीएम की अपील का समर्थन करता हूं, एंटीबायोटिक्स कोई रूटीन दवा नहीं हैं। इसका इस्तेमाल हमेशा विशेषज्ञों की सलाह पर ही करना चाहिए।
क्या कहते हैं एम्स दिल्ली के डायरेक्टर?
पीएम मोदी की अपील की सराहना करते हुए एम्स दिल्ली के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास ने कहा, एंटीबायोटिक दवाएं बिना सोचे-समझे नहीं ली जानी चाहिए। एम्स की बात करें तो हमने इसमें लीडरशिप रोल लिया है और हमारे पास डिपार्टमेंट-वाइज प्रोटोकॉल, एसओपीएस और हॉस्पिटल इन्फेक्शन कंट्रोल सिस्टम हैं। एंटीबायोटिक्स सिर्फ डॉक्टरों की सलाह पर ही लेनी चाहिए।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस क्या है?
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस तब होता है जब बैक्टीरिया या कवक जैसे रोगाणुओं को मारने के लिए बनाई गई दवाओं (एंटीबायोटिक्स) के प्रति ये रोगाणु बचाव की क्षमता विकसित कर लेते हैं।
एंटीबायोटिक दवाएं मुख्यरूप से संक्रमण की स्थिति में रोगजनकों को खत्म करने के लिए दी जाती हैं, पर एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की स्थिति में ये दवाएं काम करना ही बंद कर देती हैं। इस स्थिति में दवा लेने पर भी रोगाणु मरते नहीं बल्कि और बढ़ते रहते हैं। प्रतिरोधी संक्रमणों का इलाज करना कठिन और असंभव भी हो सकता है।
हर छह में से एक बैक्टीरियल संक्रमण एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023 में दुनिया भर में देखा गया हर छह में से एक बैक्टीरियल संक्रमण एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी था। डब्ल्यूएचओ ने बताया, मूत्र मार्ग और रक्तप्रवाह में संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणुओं में एंटीबायोटिक प्रतिरोध सबसे अधिक देखा गया है जबकि गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और यूरो-जेनिटल गोनोरिया इंफेक्शन पैदा करने वाले जीवाणुओं में प्रतिरोध दर कम देखी गई। विशेषज्ञों ने सावधान किया है कि अगर अभी भी सख्त कदम न उठाए गए तो आने वाले वर्षों में ये समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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