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Arthritis Risk: आंखों में रहती है जलन और सांस लेना भी हो रहा है मुश्किल? कहीं ये गठिया की वजह से तो नहीं

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 22 May 2026 02:09 PM IST
सार

रूमेटॉइड आर्थराइटिस के मरीजों को सबसे पहले जोड़ों में दर्द, सूजन और जकड़न की समस्या होती है। अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए तो इसका आपकी आंखों और फेफड़ों पर भी असर हो सकता है।

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आर्थराइटिस की समस्या और जोखिम - फोटो : Amarujala.com/AI

गठिया की समस्या काफी आम है। पहले ये उम्र बढ़ने के साथ होने वाली दिक्कत मानी जाती थी हालांकि अब कम्र उम्र वाले, युवाओं में भी ये परेशानी तेजी से बढ़ती जा रही है। लाइफस्टाइल की दिक्कतों ने इस खतरे को और भी बढ़ा दिया है। लिहाजा प्रभावित लोगों के जोड़ों में दर्द और जकड़न की समस्या होती है और चलना-उठना तक मुश्किल हो जाता है।



गठिया का नाम सुनते ही सबसे पहले पैर के जोड़ों में दर्द से कराहते व्यक्ति की तस्वीर आंखों में आती है, पर क्या आप जानते हैं कि गठिया की समस्या आपकी आंखों और फेफड़ों को भी गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली हो सकती है? जी हां, गठिया की समस्या के एक प्रकार जिसे रूमेटॉइड आर्थराइटिस कहा जाता है उसके शिकार लोगों को आंखों और फेफड़ों से संबंधित गंभीर समस्याओं का भी खतरा रहता है।

हालांकि सवाल ये है कि पैरों और जोड़ों में होने वाली दिक्क्त आंखों और फेफड़ों तक कैसे पहुंच जाती है? कब आपको अलर्ट हो जाना चाहिए? आइए इन सबके बारे में विस्तार से जान लेते हैं।

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रूमेटाइड आर्थराइटिस के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com

पहले रूमेटॉइड आर्थराइटिस के बारे में समझना जरूरी

रूमेटॉइड आर्थराइटिस (आरए) केवल जोड़ों में होने वाले दर्द की समस्या भर नहीं है, ये एक ऑटोइम्यून बीमारी है। जिसका मतलब है कि शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से जोड़ों की स्वस्थ कोशिकाओं पर अटैक कर देता है, इस वजह से गठिया की समस्या होती है।
 

  • सामान्य आर्थराइटिस की तरह आरए में भी जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न बनी रहती है।
  • अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। 
  • शुरुआत में रूमेटॉइड आर्थराइटिस के कारण हाथों, उंगलियों, घुटनों में दर्द और सूजन महसूस होती है।
  • समय के साथ यह समस्या आंखों, फेफड़ों, दिल और नसों तक को नुकसान पहुंचा सकती है।
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आर्थराइटिस का आंखों पर असर - फोटो : Adobe Stock Photo

रूमेटॉइड आर्थराइटिस से आंखों को खतरा

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि रूमेटॉइड आर्थराइटिस का आंखों पर भी असर हो सकता है। 
 

  • शरीर में बनी रहने वाली लगातार सूजन के कारण ये दिक्कत होती है।
  • मरीजों में ड्राई आई सिंड्रोम की दिक्कत सबसे ज्यादा देखी जाती है। इसके कारण आंखों जलन, खुजली और लालिमा होने का  जोखिम रहता है
  • रूमेटॉइड आर्थराइटिस की स्थिति आंखों के सफेद भाग स्क्लेरा कॉर्निया को भी प्रभावित कर सकता है।


नेशनल आई इंस्टीट्यूट के अनुसार रूमेटॉइड आर्थराइटिस के कारण लंबे समय तक बने रहने वाले इंफ्लामेशन की स्थिति आंखों की नसों और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगती है। रूमेटॉइड आर्थराइटिस के शिकार लगभग 90% लोगों को ड्राई आइज का खतरा रहता है।

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आर्थराइटिस के कारण फेफड़े की दिक्कत - फोटो : Adobe Stock

रूमेटॉइड आर्थराइटिस का फेफड़ों पर असर

रूमेटॉइड आर्थराइटिस आंखों के अलावा आपके फेफड़ों पर भी असर डालता है।

रूमेटॉइड अर्थराइटिस के कारण शरीर में होने वाली सूजन की प्रक्रिया फेफड़ों की समस्याओं जैसे पल्मोनरी नोड्यूल्स (फेफड़ों में छोटी गांठें), प्लूरल इफ्यूजन (फेफड़े और छाती की दीवार के बीच तरल पदार्थ का जमाव), ब्रोंकिएक्टेसिस (सांस की नलियों को नुकसान) का खतरा हो सकता है।

अध्ययनों के अनुसार शरीर में बनी रहने वाली सूजन श्वसन तंत्र के विभिन्न हिस्सों को प्रभावित कर सकती है। फेफड़ों से जुड़ी जटिलताएं रूमेटॉइड आर्थराइटिस में काफी आम हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ रूमेटॉइड आर्थराइटिस वाले मरीजों को फेफड़ों की जांच कराते रहने की भी सलाह देते हैं।

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आर्थराइटिस की समस्या और खतरा - फोटो : Freepik.com

किन्हें रूमेटॉइड आर्थराइटिस का खतरा ज्यादा?

मेडिकल रिसर्च के अनुसार महिलाओं में रूमेटॉइड आर्थराइटिस की समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक देखी जाती है। खासतौर पर 30 से 60 वर्ष की उम्र के बीच इसके मामले तेजी से सामने आते हैं। 

रूमेटॉइड आर्थराइटिस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य थकान या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि शुरुआती पहचान और सही इलाज से इसके प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। 

 
  • जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ये बीमारी रही है, धूम्रपान करते हैं या मोटापे का शिकार हैं उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए।
  • सुबह उठने के बाद जोड़ों में लंबे समय तक अकड़न रहता है, चलने-उठने में कठिनाई होती है, जोड़ों की बनावट बदलने लगी है तो तुरंत सावधान हो जाएं और डॉक्टर की सलाह लें। 




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स्रोत:
RA-related eye conditions


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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