गठिया की समस्या काफी आम है। पहले ये उम्र बढ़ने के साथ होने वाली दिक्कत मानी जाती थी हालांकि अब कम्र उम्र वाले, युवाओं में भी ये परेशानी तेजी से बढ़ती जा रही है। लाइफस्टाइल की दिक्कतों ने इस खतरे को और भी बढ़ा दिया है। लिहाजा प्रभावित लोगों के जोड़ों में दर्द और जकड़न की समस्या होती है और चलना-उठना तक मुश्किल हो जाता है।
Arthritis Risk: आंखों में रहती है जलन और सांस लेना भी हो रहा है मुश्किल? कहीं ये गठिया की वजह से तो नहीं
रूमेटॉइड आर्थराइटिस के मरीजों को सबसे पहले जोड़ों में दर्द, सूजन और जकड़न की समस्या होती है। अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए तो इसका आपकी आंखों और फेफड़ों पर भी असर हो सकता है।
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पहले रूमेटॉइड आर्थराइटिस के बारे में समझना जरूरी
रूमेटॉइड आर्थराइटिस (आरए) केवल जोड़ों में होने वाले दर्द की समस्या भर नहीं है, ये एक ऑटोइम्यून बीमारी है। जिसका मतलब है कि शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से जोड़ों की स्वस्थ कोशिकाओं पर अटैक कर देता है, इस वजह से गठिया की समस्या होती है।
- सामान्य आर्थराइटिस की तरह आरए में भी जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न बनी रहती है।
- अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकती है।
- शुरुआत में रूमेटॉइड आर्थराइटिस के कारण हाथों, उंगलियों, घुटनों में दर्द और सूजन महसूस होती है।
- समय के साथ यह समस्या आंखों, फेफड़ों, दिल और नसों तक को नुकसान पहुंचा सकती है।
रूमेटॉइड आर्थराइटिस से आंखों को खतरा
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि रूमेटॉइड आर्थराइटिस का आंखों पर भी असर हो सकता है।
- शरीर में बनी रहने वाली लगातार सूजन के कारण ये दिक्कत होती है।
- मरीजों में ड्राई आई सिंड्रोम की दिक्कत सबसे ज्यादा देखी जाती है। इसके कारण आंखों जलन, खुजली और लालिमा होने का जोखिम रहता है
- रूमेटॉइड आर्थराइटिस की स्थिति आंखों के सफेद भाग स्क्लेरा कॉर्निया को भी प्रभावित कर सकता है।
नेशनल आई इंस्टीट्यूट के अनुसार रूमेटॉइड आर्थराइटिस के कारण लंबे समय तक बने रहने वाले इंफ्लामेशन की स्थिति आंखों की नसों और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगती है। रूमेटॉइड आर्थराइटिस के शिकार लगभग 90% लोगों को ड्राई आइज का खतरा रहता है।
रूमेटॉइड आर्थराइटिस का फेफड़ों पर असर
रूमेटॉइड आर्थराइटिस आंखों के अलावा आपके फेफड़ों पर भी असर डालता है।
रूमेटॉइड अर्थराइटिस के कारण शरीर में होने वाली सूजन की प्रक्रिया फेफड़ों की समस्याओं जैसे पल्मोनरी नोड्यूल्स (फेफड़ों में छोटी गांठें), प्लूरल इफ्यूजन (फेफड़े और छाती की दीवार के बीच तरल पदार्थ का जमाव), ब्रोंकिएक्टेसिस (सांस की नलियों को नुकसान) का खतरा हो सकता है।
अध्ययनों के अनुसार शरीर में बनी रहने वाली सूजन श्वसन तंत्र के विभिन्न हिस्सों को प्रभावित कर सकती है। फेफड़ों से जुड़ी जटिलताएं रूमेटॉइड आर्थराइटिस में काफी आम हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ रूमेटॉइड आर्थराइटिस वाले मरीजों को फेफड़ों की जांच कराते रहने की भी सलाह देते हैं।
किन्हें रूमेटॉइड आर्थराइटिस का खतरा ज्यादा?
मेडिकल रिसर्च के अनुसार महिलाओं में रूमेटॉइड आर्थराइटिस की समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक देखी जाती है। खासतौर पर 30 से 60 वर्ष की उम्र के बीच इसके मामले तेजी से सामने आते हैं।
रूमेटॉइड आर्थराइटिस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य थकान या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि शुरुआती पहचान और सही इलाज से इसके प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
- जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ये बीमारी रही है, धूम्रपान करते हैं या मोटापे का शिकार हैं उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए।
- सुबह उठने के बाद जोड़ों में लंबे समय तक अकड़न रहता है, चलने-उठने में कठिनाई होती है, जोड़ों की बनावट बदलने लगी है तो तुरंत सावधान हो जाएं और डॉक्टर की सलाह लें।
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स्रोत:
RA-related eye conditions
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