सब्सक्राइब करें

Covid-19: कोरोना ने हृदय रोगों का बढ़ाया खतरा, हल्के स्तर का संक्रमण भी खतरनाक; अध्ययन में खुलासा

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 06 Jun 2025 10:41 PM IST
सार

Coronavirus Health Risk: कोरोना का संक्रमण हमारे शरीर को किस प्रकार से प्रभावित कर सकता है? ये समझने की कोशिश कर रहे वैज्ञानिकों की टीम ने अध्ययनों में बड़ा खुलासा किया है। इसमें दिल का दौरा, स्ट्रोक से मौत, गर्भपात की आशंका बढ़ने को लेकर सावधान किया गया है।

विज्ञापन
study says COVID-19 Increases Heart disease Cardiac Deaths Risk in long term
कोरोना और इसका खतरा - फोटो : Freepik.com
loader

Covid-19 Study: दुनियाभर में साल 2019 के आखिरी के महीनों से कोरोनावायरस का संक्रमण देखा जा रहा है। एक अंतराल के बाद संक्रमण के मामले पिछले करीब एक महीने से फिर से बढ़ने लगे हैं। महामारी की शुरुआत से ही कई अध्ययन इस बात पर ध्यान केंद्रित कराते रहे हैं कि कोरोनावायरस भले ही श्वसन रोगों का कारण बनता है पर शरीर के कई अंगों पर इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं। यही कारण है इस वायरस से बचाव को लेकर सभी लोगों को निरंतर सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। 

कोरोनावायरस शरीर को किस प्रकार से प्रभावित करता है, इसे समझने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने कई शोध किए। इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोविड-19 के कारण हृदय संबंधी मौतों में तेजी से वृद्धि हुई है। 

कोविड-19 और हृदय रोगों के खतरे को लेकर लगातार प्रश्न उठते रहे हैं, महामारी के बाद से वैश्विक स्तर पर हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के केस में भी बढ़ोतरी देखी गई है।

Trending Videos
study says COVID-19 Increases Heart disease Cardiac Deaths Risk in long term
कोविड 19 का हृदय पर असर - फोटो : adobe stock images

कोविड-19 महामारी और हृदय संबंधी समस्याएं

वैज्ञानिकों ने बताया कि साल 2020 में कोविड-19 महामारी शुरू होने के बाद से हृदय संबंधी मौतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।

मैसाचुसेट्स में मरने वाले लगभग 128,000 व्यक्तियों के मृत्यु प्रमाणपत्र डेटा का विश्लेषण करने वाली शोधकर्ताओं की एक टीम ने लोगों को सावधान किया है। वैज्ञानिकों ने पाया कि महामारी की शुरुआत, साल 2020 से 2023 के बीच हृदय संबंधी मौतों की दर काफी अधिक थी।  

विज्ञापन
विज्ञापन
study says COVID-19 Increases Heart disease Cardiac Deaths Risk in long term
हार्ट अटैक और हृदय संबंधित समस्याएं - फोटो : Freepik.com

क्या कहते हैं शोधकर्ता?

मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी विभाग में प्रोफेसर और अनुसंधान के निदेशक जेसन एच. वास्फी ने कहा, पहले के कई अध्ययनों से ये स्पष्ट हुआ है कि कोरोना के संक्रमण ने हृदय स्वास्थ्य पर असर डाला है। इस रिपोर्ट में हमने पाया कि महामारी के बाद से घर पर लोगों की कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक से मौतें ज्यादा हो रही हैं।

पहले तो वायरस ने हृदय रोगों का खतरा बढ़ाया, वहीं दूसरी तरफ महामारी के कारण दुनियाभर में स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को भी काफी झटका लगा। हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि 2020 से घर पर होने वाली हृदय संबंधी मौतों में वृद्धि हुई है, जो महामारी के दौरान हृदय रोगियों की देखभाल में संभावित अंतर को दर्शाता है। 




अस्पताल के आंकड़ों से पता चलता है कि मायोकार्डियल इंफार्क्शन (हार्ट अटैक) से अस्पताल में भर्ती होने वालों में 20-34% की कमी आई है, जबकि घर पर हृदय संबंधी मौतों में वृद्धि हुई है, ये महामारी के दौरान अन्य स्वास्थ्य सेवाओं में देखभाल की कमी को उजागर करता है।

study says COVID-19 Increases Heart disease Cardiac Deaths Risk in long term
हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com

कोरोना के कारण हार्ट अटैक और असामयिक मृत्यु का जोखिम

इससे पहले अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने एक रिपोर्ट में बताया था कि कोविड-19 का शिकार रहे लोगों को भविष्य में तीन साल बाद तक भी किसी भी कारण से दिल का दौरा, स्ट्रोक या असामयिक मृत्यु का जोखिम दोगुना अधिक हो सकता है, भले ही उनमें कभी गंभीर बीमारी के लक्षण न दिखे हों।

लॉस एंजिल्स स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ साउथर्न कैलिफोर्निया में सार्वजनिक स्वास्थ्य विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. हूमन अल्लाये कहते हैं, शोध में पाया गया है कि यहां तक कि जिन लोगों का परीक्षण सकारात्मक आया था, लेकिन उनमें गंभीर लक्षण विकसित नहीं हुए थे, उनमें भी हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम दोगुना था। ऐसा प्रतीत होता है कि कोरोनावायरस कुछ व्यक्तियों को दीर्घकालिक रूप से नुकसान पहुंचा रहा है।

विज्ञापन
study says COVID-19 Increases Heart disease Cardiac Deaths Risk in long term
गर्भावस्था में संक्रमण से बचाव के उपाय जरूरी - फोटो : Freepik.com

कोविड-19 और गर्भपात का खतरा

कोरोना का संक्रमण हमारे शरीर को किस प्रकार से प्रभावित कर सकता है? ये समझने की कोशिश कर रहे वैज्ञानिकों की टीम ने एक हालिया अध्ययन में चौंकाने वाली बात बताई थी।

अध्ययन में पाया गया है कि गर्भावस्था से पहले या उसके दौरान अगर कोविड का संक्रमण हो जाता है तो गर्भावस्था के 20वें सप्ताह से पहले गर्भपात होने की आशंका दो से तीन गुना अधिक हो सकती है। 

अमेरिका के ह्यूस्टन में महामारी विज्ञानी डॉ मीकाएला सैंडोवाल कहती हैं, अध्ययन से पता चला है कि गर्भावस्था में कोरोना का संक्रमण गर्भपात के खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है। इसलिए ऐसी महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।



-----------
स्रोत
At-home heart attacks and cardiac deaths on the rise since COVID-19 pandemic


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed