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World Heart Day 2022: बढ़ते हृदय रोगों का जोखिम हो सकता है कम, वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला सबसे आसान तरीका

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 29 Sep 2022 12:05 AM IST
हार्ट-अटैक और स्ट्रोक से बचने के तरीके
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वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं पर नजर डालें तो पता चलता है कि इनमें डायबिटीज और हृदय रोगों के मामले सबसे अधिक हैं। आंकड़ों के मुताबिक दुनियाभर में डायबिटीज के 53.7 करोड़ और 52 करोड़ से अधिक लोग कई प्रकार के हृदय रोगों से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिस प्रकार से पिछले कुछ वर्षों में लोगों में लाइफस्टाइल की गड़बड़ी से संबंधित मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं, ऐसे में इन आंकड़ों के और भी बढ़ने की आशंका है। अपने जोखिम कारकों को समझते हुए सभी लोगों को इन गंभीर बीमारियों से बचाव के निरंतर उपाय करते रहने चाहिए, क्योंकि इन दोनों की गंभीर स्थिति जानलेवा हो सकती है। 

इस बीच एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने इन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव के लिए एक सबसे प्रभावी उपाय को लेकर बड़ा दावा किया है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि यदि हम सभी रात की नींद को ठीक कर लेते हैं, यानी कि अगर रात के समय 6-8 घंटे की निर्बाध नींद लेना सुनिश्चित कर लिया जाए तो यह आदत हृदय रोग-स्ट्रोक के जोखिम को कई गुना तक कम करने में मददगार हो सकती है। आइए इस अध्ययन के बारे में विस्तार से समझते हैं।
हृदय रोग का बढ़ रहा है खतरा
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हृदय रोग और स्ट्रोक का बढ़ता खतरा

फ्रांस स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल रिसर्च (आईएनएसईआरएम) के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि जो लोग रोजाना रात में अच्छी नींद ले रहे हैं ऐसे लोगों में हृदय रोग-डायबिटीज होने का खतरा कम पाया गया है। अध्ययन के अनुसार, 10 में से नौ अमेरिकी को रात में अच्छी नींद नहीं आती है, जिसके कारण यहां हृदय रोग-स्ट्रोक के साथ लोगों में डायबिटीज की समस्या भी तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि सभी लोग अच्छी नींद लेने पर ध्यान दें, तो इनमें से दस में से सात को हृदय रोगों से बचाया जा सकता है।
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हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक है अच्छी नींद
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नींद की गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत

आईएनएसईआरएम के प्रोफेसर और अध्ययन के प्रमुख लेखकों में से एक डॉ अबूबकारी नांबिमा कहते हैं,  दुनियाभर में हृदय  रोगों का खतरा बढ़ता जा रहा है, अब यह कम उम्र के लोगों को भी अपना शिकार बनाती जा रही है, इससे बचाव के लिए बच्चों को शुरुआत से ही नींद की गुणवत्ता के महत्व के सेहत पर होने वाले प्रभावों के बारे में बताना चाहिए, जिससे भविष्य में उन्हें इस प्रकार के खतरे से बचाया जा सके। रात की नींद अच्छी करने के लिए कई प्रकार के उपायों को प्रयोग में लाया जा सकता है, यह सभी आयु वाले लोगों के लिए आवश्यक है।
नींद की गुणवत्ता में सुधार जरूरी
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शोध में क्या पता चला?

इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने 7,200 प्रतिभागियों को शामिल किया। अध्ययन में शामिल सभी प्रतिभागी 50 से 75 वर्ष की आयु वाले पुरुष और महिलाएं थीं, इनमें उस वक्त किसी भी प्रकार की हृदय रोगों की समस्या नहीं थी। इनमे से ज्यादातर लोगों में नींद की गुणवत्ता ठीक नहीं थी। हर दो साल में सभी लोगों में कोरोनरी हार्ट डिजीज और स्ट्रोक के खतरे की जांच की गई।

समय के साथ 274 प्रतिभागियों में इस तरह की शिकायतों का पता चला। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों की रात की नींद 4-5 घंटे या उससे कम थी उनमें हृदय रोगों और स्ट्रोक का खतरा 75 फीसदी अधिक पाया गया। वहीं जिन लोगों ने निर्बाध तरीके से 7-9 घंटे की नींद पूरी की उनमें इन रोगों के विकसित होने का जोखिम काफी कम पाया गया। 
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हृदय को कैसे स्वस्थ रखें?
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अध्ययन का निष्कर्ष 

अध्ययन के निष्कर्ष में डॉ. नाम्बीमा कहते हैं, हमारा अध्ययन हृदय को स्वस्थ्य को बनाए रखने के लिए अच्छी नींद की आवश्यकता पर जोर देता है। नींद में सुधार करके कोरोनरी हार्ट डिजीज और स्ट्रोक के जोखिम को कम किया जा सकता है। अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश लोगों को नींद की कठिनाई होती है, यह उनमें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। हृदय रोग दुनियाभर में मृत्यु का शीर्ष कारण है। हृदय को स्वस्थ बनाए रखने के लिए अच्छी नींद के महत्व पर अधिक जागरूकता की आवश्यकता है। सभी लोगों को नींद में सुधार करने की आवश्यकता है, यह हृदय रोग-डायबिटीज के खतरे से बचाने में आपके लिए सहायक हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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