कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने लोगों के मन में एक डर का माहौल बना दिया है। पहली लहर के विपरीत इस बार स्वस्थ लोग भी संक्रमित हो रहे हैं। इतना ही नहीं संक्रमितों के लक्षणों में भी तेजी से गिरावट देखी जा रही है, जो फिलहाल सबसे ज्यादा चिंता का विषय है। खांसी या बुखार के अलावा इस बार लोग कई असामान्य और अपेक्षाकृत कहीं अधिक जटिल लक्षणों के शिकार हो रहे हैं। कोरोना संक्रमितों में न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं भी काफी ज्यादा देखने को मिल रही हैं।
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सावधान: कोरोना संक्रमितों में देखे जा रहे हैं यह न्यूरोलॉजिकल लक्षण, कहीं आपको भी तो नहीं है ऐसी कोई परेशानी?
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Thu, 06 May 2021 02:44 PM IST
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कोरोना के न्यूरोलॉजिकल प्रभाव
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तंत्रिका संबंधी लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं कोरोना संक्रमित
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अब तक के तमाम अध्ययनों के आधार पर विशेषज्ञों ने बताया है कि सार्स-सीओवी-2 वायरस और इसके म्यूटेशन के कारण संक्रमितों के मस्तिष्क और न्यूरोलॉजिकल गतिविधियों पर भी बुरा प्रभाव देखने को मिल रहा है। इसका असर कम समय या फिर लंबे वक्त के लिए भी हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड-19 संक्रमित एक तिहाई रोगियों ने कई तरह के तंत्रिका संबंधी लक्षणों का अनुभव किया। इसके दीर्घकालिक प्रभाव के तौर पर भविष्य में लोगों को स्ट्रोक जैसी दिक्कतों का खतरा बढ़ जाता है।
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स्वाद और गंध न आना कोरोना का हो सकता है संकेत
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स्वाद और गंध न आना
गंध और स्वाद न आना, कोरोना के सामान्य लक्षणों में से एक है, लेकिन इसका असर गंभीर भी हो सकता है। पहले इसे ऊपरी श्वसन पथ के लक्षण के रूप में देखा जा रहा था हालांकि नए शोधों से पता चला है कि यह दिक्कत वायरस के मस्तिष्क तक पहुंचने के कारण भी हो सकती है। उदाहरण के लिए घ्राण इंद्रियों और मस्तिष्क के बीच किसी विकृति के कारण सूंघने की शक्ति प्रभावित हो सकती है। संभव है कि यह वायरस इस तरह की दिक्कतें पैदा कर रहा हो।
गंध और स्वाद न आना, कोरोना के सामान्य लक्षणों में से एक है, लेकिन इसका असर गंभीर भी हो सकता है। पहले इसे ऊपरी श्वसन पथ के लक्षण के रूप में देखा जा रहा था हालांकि नए शोधों से पता चला है कि यह दिक्कत वायरस के मस्तिष्क तक पहुंचने के कारण भी हो सकती है। उदाहरण के लिए घ्राण इंद्रियों और मस्तिष्क के बीच किसी विकृति के कारण सूंघने की शक्ति प्रभावित हो सकती है। संभव है कि यह वायरस इस तरह की दिक्कतें पैदा कर रहा हो।
कोरोना के कारण लोगों को हो सकती है ब्रेन फॉग या फिर याददाश्त में कमजोरी
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ब्रेन फॉग और भ्रम की स्थिति
अध्ययनों से संकेत मिला है कि कोविड-19 मस्तिष्क पर काफी प्रभाव डाल सकता है, जिसका रोगियों में अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह का असर देखा जा सकता है। ब्रेन फॉग इसी तरह की एक समस्या है। दुनियाभर में 81 फीसदी से अधिक कोविड के रोगियों में ब्रेन फॉग या फिर याददाश्त में कमजोरी से संबंधित दिक्कतें देखी गई हैं। कोविड के गंभीर संक्रमण वाले रोगियों में इसका खतरा अधिक हो सकता है।
अध्ययनों से संकेत मिला है कि कोविड-19 मस्तिष्क पर काफी प्रभाव डाल सकता है, जिसका रोगियों में अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह का असर देखा जा सकता है। ब्रेन फॉग इसी तरह की एक समस्या है। दुनियाभर में 81 फीसदी से अधिक कोविड के रोगियों में ब्रेन फॉग या फिर याददाश्त में कमजोरी से संबंधित दिक्कतें देखी गई हैं। कोविड के गंभीर संक्रमण वाले रोगियों में इसका खतरा अधिक हो सकता है।
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कोरोना में चिंता, घबराहट और चिड़चिड़ापन होना सामान्य
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चिड़चिड़ापन और घबराहट
एक नए नैदानिक विश्लेषण के अनुसार, कोविड-19 के 11 फीसदी से अधिक लोगों को संक्रमण के दौरान चिंता, घबराहट और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं का अनुभव होता है। इसके अलावा जो लोग पहले से ही मानसिक या न्यूरोलॉजिकल रोगों से ग्रसित हैं उनमें लक्षणों के बिगड़ने का जोखिम भी बढ़ जाता है।
एक नए नैदानिक विश्लेषण के अनुसार, कोविड-19 के 11 फीसदी से अधिक लोगों को संक्रमण के दौरान चिंता, घबराहट और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं का अनुभव होता है। इसके अलावा जो लोग पहले से ही मानसिक या न्यूरोलॉजिकल रोगों से ग्रसित हैं उनमें लक्षणों के बिगड़ने का जोखिम भी बढ़ जाता है।
