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हृदय रोग विशेषज्ञ ने चेताया: डीजे की तेज आवाज बढ़ा रही है 'सडेन हार्ट अटैक' का खतरा, आप भी हो सकते हैं शिकार

अभिलाष श्रीवास्तव
Updated Tue, 04 Oct 2022 01:44 PM IST
हार्ट अटैक के जोखिम कारकों को जानिए
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पिछले कुछ वर्षों में हृदय रोगों के मामले में आई तेजी, विशेषज्ञों की चिंता बढ़ाने वाली है। हाल के महीनों में 'सडेन हार्ट अटैक' के केस भी काफी बढ़े हुए रिकॉर्ड किए गए हैं। डॉक्टर्स कहते हैं, विशेषरूप से युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के मामले काफी गंभीर हैं। उन लोगों में भी इस तरह की समस्या देखी जा रही है जिनको महामारी से पहले हृदय रोगों की समस्या नहीं थी, या संभवत: वह इससे अनजान थे। मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को आए हार्ट अटैक के बाद जिम में बढ़ते दिल के दौरे के मामलों को लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है, इस बीच सोशल मीडिया पर वायरल तीन वीडियो ने हार्ट अटैक के एक नए कारक को लेकर लोगों के बीच चर्चा बढ़ा दी है। 

सोशल मीडिया पर वायरल इन तीन अलग-अलग वीडियो में डांस करते हुए अचानक हुए हार्ट अटैक के कारण मौत के मामले सामने आए हैं। डॉक्टर्स कहते हैं, अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियों के अलावा इस तरह से बढ़ते हृदय रोगों के लिए कोरोना महामारी और तेज ध्वनि को प्रमुख कारणों के तौर पर देखा जा रहा है।

आश्चर्यजनक बात यह है कि ऐसे ज्यादातर लोगों को पहले से पता ही नहीं होता है कि उन्हें हृदय की समस्या है। इसके अलावा डीजे या तेज बेस वाली आवाज हृदय पर अतिरिक्त दवाब बढ़ा देती है जिसके कारण भी हार्ट अटैक के मामले बढ़े हुए देखे जा रहे हैं। आइए अध्ययनों की रिपोर्ट और हृदय रोग विशेषज्ञ से इस तरह की बढ़ती समस्या के बारे में समझते हैं।
हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के कारण
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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं हार्ट अटैक के तीन वीडियो

अचानक आए हार्ट अटैक के तीन वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। तीनों में तेज आवाज वाले साउंड्स कॉमन हैं।

पहले वीडियो में गणेश मूर्ति पंडाल में हनुमान की भूमिका करते हुए रवि शर्मा को अचानक दिल का दौरा पड़ गया।

दूसरे वीडियो में बरेली में एक कार्यक्रम के दौरान 48 वर्षीय व्यक्ति को हार्ट अटैक आया जिसके कारण उसकी तुरंत मौत हो गई।

तीसरे वीडियो में जम्मू के 20 वर्षीय स्टेज कलाकार की भी इसी तरह से अचानक हार्ट अटैक के कारण मौत हुई है।
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तेज आवाज के कारण बढ़ सकती हैं हृदय की समस्याएं
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क्या तेज आवाज के कारण हो रहा है हार्ट अटैक?

अमर उजाला से बातचीत में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ अनवर.एम खान कहते हैं इन तीनों वीडियो में डीजे की तेज आवाज को प्रथमदृश्या दिल का दौरा पड़ने का प्रमुख कारण माना जा रहा है। एहतियात के तौर पर जिन लोगों को हृदय की कमजोरी की दिक्कत रहती है, उन्हें तेज आवाज (जिससे हृदय पर दबाव बढ़ता हो) उससे दूर रहने की सलाह दी जाती है। हालांकि कम उम्र के लोगों में इस तरह की दिक्कत हैरान करने वाली है।

वीडियो में जिन लोगों को हार्ट अटैक आया है, या तो उनमें पहले से ही हृदय रोग की समस्या रही होगी या फिर इसे लॉन्ग कोविड के संभावित दुष्प्रभाव के कारण उत्पन्न स्थिति माना जा सकता है। सडेन हार्ट अटैक के मामलों में यदि कार्डियो पल्मोनरी रिस्यूसिटेशन (सीपीआर) दे दिया जाए तो ऐसे लोगों की जान बचाई जा सकती है। सीपीआर में दोनों हाथों से रोगी की छाती को दबाने उसे सांस लेने में मदद मिलती है। रोगी की सांस की जांच करें और सीपीआर की मदद से उसे सांस दिलाएं, ऐसा करके जान बचाई जा सकती है। इस बारे में सभी लोगों को जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
ध्वनि प्रदूषण के कारण होने वाली दिक्कतें
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तेज आवाज है घातक

डीजे/लाउडस्पीकर्स की तेज आवाज सिर्फ परेशान करने वाली ही नहीं होती है, ये स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। जर्मनी स्थित मेंज यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के एक अध्ययन के अनुसार, बढ़ता शोर आपके हार्ट रिदम यानी कि हृदय की लय को बिगाड़ देती है। इस स्थिति को मेडिकल की भाषा में एट्रियल फिब्रिलेशन कहा जाता है। यह स्थिति दिल के धड़कन की अनियमितता को बढ़ा देती है जिसके कारण रक्त के थक्के बनने, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर की समस्या भी हो सकती है।

अध्ययनकर्ताओ का कहना है कि कोई भी चीज जो हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालती है या  रक्तचाप में बदलाव का कारण बनती है इसके कारण  फिब्रिलेशन ट्रिगर हो सकता है। डीजे/लाउडस्पीकर की तेज आवाज को हमेशा से हानिकारक माना जाता रहा है, यह न सिर्फ हृदय रोगियों के लिए गंभीर है बल्कि स्वस्थ लोगों में भी हृदय की समस्याओं का कारण बन सकती है। 
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हृदय की सेहत को लेकर बरतें विशेष सावधानी
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

डॉ अनवर कहते हैं, अध्ययनों में पाया गया है कि तेज आवाज के संपर्क में रहने वाले लोगों में दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम अधिक हो सकते हैं। डीजे के साउंड्स से निकलने वाली ध्वनि कंपन, हृदय पर अतिरिक्त प्रहार का कारण बनती है। यह स्थिति नाजुक तंत्रिका अंत को नुकसान पहुंचाने के लिए काफी है। इससे सिर्फ हृदय ही नहीं मस्तिष्क और कानों को भी गंभीर नुकसान हो सकता है। तेज आवाज मस्तिष्क के भीतर इंफ्लामेटरी प्रतिक्रियाओं का कारण बनती हुई देखी गई है, जिससे स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है।
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