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Health Tips: क्या होता है 'गट माइक्रोबायोम'? जानें आंतों के बैक्टीरिया का मूड, इम्युनिटी और पेट से गहरा संबंध

Sat, 28 Jun 2025 01:59 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Sat, 28 Jun 2025 01:59 PM IST
सार

हम सबकी आंतों में करोड़ों बैक्टीरिया होते हैं। इनके समूह को गट माइक्रोबायोम कहते हैं, जिसमें अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का संतुलन बेहद जरूरी है। इसका सीधा असर हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ता है। खासकर, हमारा मूड, इम्युनिटी और पेट का स्वास्थ्य इस गट माइक्रोबायोम से गहराई से जुड़े होते हैं।

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What is Gut Microbiome Know Link Between Gut Bacteria Immunity and Mood
पेट की समस्या - फोटो : Adobe stock

Gut Microbiome: क्या आपने कभी सोचा है कि हमारी आंतों में, असंख्य सूक्ष्म जीव मौजूद हैं जो हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं? आंतों में मौजूद छोटे-छोटे बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्मजीव, जिन्हें सामूहिक रूप से 'गट माइक्रोबायोम' कहा जाता है, केवल पाचन में ही नहीं, बल्कि ये हमारे मूड, रोग प्रतिरोधक क्षमता और समग्र स्वास्थ्य को भी सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।



आधुनिक वैज्ञानिक शोध लगातार यह साबित कर रहे हैं कि एक स्वस्थ और संतुलित गट माइक्रोबायोम हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए कितना जरूरी है। यह समझना बेहद रोमांचक है कि कैसे ये अदृश्य जीव हमारे शरीर के इतने महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करते हैं। आइए, इस लेख में हम विस्तार से जानते हैं कि यह गट माइक्रोबायोम क्या है और यह हमारे शरीर को किस-किस तरह से प्रभावित करता है।

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पाचन तंत्र - फोटो : Freepik.com

गट माइक्रोबायोम क्या है?
गट माइक्रोबायोम हमारी आंतों में रहने वाले खरबों सूक्ष्मजीवों का समूह है। ये बैक्टीरिया भोजन को पचाने, पोषक तत्वों को अवशोषित करने और हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। ये सूक्ष्मजीव एक जटिल पारिस्थितिकी तंत्र की तरह काम करते हैं, जो हमारे शरीर के कई कार्यों को नियंत्रित करता है। स्वस्थ गट माइक्रोबायोम में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का संतुलन होता है। असंतुलन होने पर पाचन समस्याएं, तनाव, या गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।


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इम्युनिटी - फोटो : Adobe stock photos

पाचन और इम्युनिटी पर प्रभाव
गट माइक्रोबायोम पाचन तंत्र का आधार है। यह भोजन को तोड़ने और पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है। साथ ही, यह इम्यून सिस्टम का 70% हिस्सा नियंत्रित करता है। अच्छे बैक्टीरिया हानिकारक रोगाणुओं से लड़ते हैं और इंफेक्शन से बचाव करते हैं। असंतुलित माइक्रोबायोम से कब्ज, दस्त, इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS), या ऑटोइम्यून बीमारियां हो सकती हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ प्रोबायोटिक्स युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे दही और खमीरयुक्त (फर्मेंटेड) भोजन को डाइट में शामिल करने का सुझाव देते हैं, क्योंकि ये गट माइक्रोबायोम को संतुलित रखने में मदद करते हैं।

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पाचन तंत्र - फोटो : Freepik.com

मूड और मानसिक स्वास्थ्य से संबंध
गट माइक्रोबायोम आपके मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने में अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि यह मस्तिष्क के साथ गट-ब्रेन एक्सिस के जरिए जुड़ा होता है। आंतों के बैक्टीरिया सेरोटोनिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर बनाते हैं, जो मूड को नियंत्रित करते हैं। असंतुलित माइक्रोबायोम तनाव, चिंता या डिप्रेशन का कारण बन सकता है। शोध बताते हैं कि फाइबर युक्त आहार और प्रोबायोटिक्स मूड को बेहतर बनाते हैं। उदाहरण के लिए, दही और साबुत अनाज मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा रखने में मदद करते हैं।
 

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पेट की समस्या - फोटो : Adobe stock
गट माइक्रोबायोम को स्वस्थ रखने के उपाय
गट माइक्रोबायोम को स्वस्थ रखने के लिए फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और नट्स खाएं। प्रोबायोटिक्स (दही, छाछ) और प्रीबायोटिक्स (प्याज, लहसुन) अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं। प्रोसेस्ड फूड, चीनी और एंटीबायोटिक्स के अत्यधिक उपयोग से बचें, क्योंकि ये माइक्रोबायोम को नुकसान पहुंचाते हैं। पर्याप्त पानी, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद भी आंतों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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