क्या आप भी जब दूध पीते हैं या दही खाते हैं तो कुछ ही मिनटों में पेट में गड़बड़ी और पेट फूलने की दिक्कत शुरू हो जाती है? वैसे तो कभी-कभी ऐसा होना सामान्य है, पर अगर आपको बार-बार ये दिक्कत हो रही है इसे बस अपच समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। कई मामलों में ये लैक्टोज इंटॉलरेंस का संकेत भी हो सकता है।
Lactose Intolerance: दूध पीते ही फूल जाता है पेट? कहीं आपको लैक्टोज इंटॉलरेंस तो नहीं
लैक्टोज इंटॉलरेंस कोई एलर्जी नहीं बल्कि एक पाचन संबंधी समस्या है। इसमें शरीर छोटी आंत में बनने वाले लैक्टेज एंजाइम की पर्याप्त मात्रा नहीं बना पाता। यही एंजाइम दूध में मौजूद प्राकृतिक शुगर लैक्टोज को पचाने का काम करता है।
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लैक्टोज इंटॉलरेंस की समस्या
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दुनिया की बड़ी आबादी किसी न किसी स्तर पर लैक्टोज इंटॉलरेंस से प्रभावित है। एशियाई देशों में इसके मामले ज्यादा देखे जाते रहे हैं।
- लैक्टोज इंटॉलरेंस के कारण शरीर दूध में मौजूद प्राकृतिक शुगर लैक्टोज को सही तरीके से पचा नहीं पाता।
- कुछ मामलों में आंतों के संक्रमण, सीलिएक डिजीज और क्रोहन रोग के बाद भी यह समस्या विकसित हो सकती है।
- आमतौर पर लोग इसे दूध की एलर्जी समझ लेते हैं पर लैक्टोज इंटॉलरेंस केवल पाचन संबंधी समस्या है।
आप लैक्टोज इंटॉलरेंस का शिकार हैं या नहीं, इसका पता लगाना बहुत आसान है।
- दूध या डेयरी उत्पाद खाने के आधे से दो घंटे के भीतर अगर आपको पेट फूलने, गैस बनने, पेट में मरोड़, दस्त जैसी दिक्कते हो रही हैं तो सावधान हो जाइए।
- कुछ लोगों में थोड़ी मात्रा में दूध पीने पर भी परेशानी हो सकती है।
- डॉक्टर कहते हैं, लैक्टोज इंटॉलरेंस किसी भी उम्र में हो सकता है। जिन लोगों के परिवार में पहले से यह समस्या रही हो, उनमें जोखिम ज्यादा देखा जाता है।
तो क्या दूध पीना छोड़ देना चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लैक्टोज इंटॉलरेंस वाले हर मरीज को दूध पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं होती। कई लोग थोड़ी मात्रा में दूध या भोजन के साथ डेयरी वाली चीजें लेने पर बिना परेशानी के रह सकते हैं। दही में लैक्टोज अपेक्षाकृत कम होता है, इसलिए कई मरीजों को इससे कोई दिक्कत नहीं होती। इसके अलावा बाजार में लैक्टोज-फ्री दूध भी उपलब्ध है।
खान-पान में और क्या सावधानी बरतें?
यदि आपको लैक्टोज इंटॉलरेंस की समस्या है तो दूध, मिल्कशेक, आइसक्रीम, क्रीम का सेवन कम कर देना चाहिए।
- पैकेज्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय लेबल पढ़ना जरूरी है क्योंकि कई बिस्कुट, सूप, चॉकलेट में भी दूध की मात्रा हो सकती है।
- लैक्टोज इंटॉलरेंस का कोई इलाज नहीं है। हालांकि सही डाइट और जीवनशैली में सुधार करके आप लक्षणों को कंट्रोल कर सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।