कैंसर वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। जिस तरह से लोगों की दिनचर्या और खान-पान में गड़बड़ी देखी जा रही है, इसने कैंसर जैसी बीमारियों के खतरे को और भी बढ़ा दिया है। लिहाजा अब कम उम्र के लोग भी इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आने लगे हैं।
Cancer Alert: 30 की उम्र में भी हो सकता है ये खतरनाक कैंसर, खानपान की इन गड़बड़ियों का सबसे बड़ा रोल
कोलन कैंसर के सभी मामलों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन, धूम्रपान और शराब से दूरी तथा समय पर जांच के जरिए इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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कोलन कैंसर का खतरा
मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार कोलन कैंसर, बड़ी आंत में शुरू होने वाली समस्या है। इसमें कोशिकाओं की अनियंत्रित तरीके से वृद्धि होने लग जाती है। ज्यादातर लोगों में इसका पता ही तब चल पाता है जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है।
- असल में कोलन कैंसर के शुरुआती लक्षण पेट की सामान्य समस्याओं जैसे मल से खून आने, लगातार कब्ज या दस्त और पेट दर्द जैसे होते हैं।
- यही कारण है कि लोग समय पर ध्यान नहीं देते हैं। जब इसका पता चलता है तब तक ये बीमारी काफी फैल चुकी होती है।
डॉक्टर कहते हैं, यदि कैंसर केवल कोलन तक सीमित हो तो इलाज की सफलता की संभावना काफी अधिक रहती है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों तक फैलने पर उपचार जटिल हो जाता है। इसी कारण समय पर स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान बहुत जरूरी है।
कम उम्र में बढ़ रहे हैं मामले
कोलन कैंसर को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या के तौर पर जाना जाता था हालांकि अब कम उम्र वाले भी इसका शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स का अधिक सेवन, खाने में फाइबर की कमी और लंबे समय तक बैठे रहने वाली दिनचर्या इसका बड़ा कारण हो सकती है।
आइए जानते हैं कि खाने-पीने की कौन सी चीजें इसका जोखिम बढ़ा रही हैं?
रेड मीट ज्यादा खाना नुकसानदायक
कैंसर अनुसंधान एजेंसी (आईएआरसी) की रिपोर्ट के अनुसार प्रोसेस्ड मीट और रेड मीट ज्यादा खाना कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है।
- ज्यादा तापमान पर इसे पकाने के दौरान बनने वाले कुछ खास कंपाउंड्स जैसे हीम आयरन, एन-नाइट्रोसो कंपाउंड्स और हेटेरोसाइक्लिक एमाइन्स इसका बड़ा कारण हो सकते हैं।
- इसी तरह से प्रोसेस्ड मीट में केमिकल एडिटिव्स के तौर पर नाइट्रेट्स और नाइट्राइट्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो पाचन तंत्र में कैंसर को बढ़ावा देने वाले कंपाउंड्स बनने का कारण बनते हैं।
खाने में फाइबर की कमी
फाइबर आंतों की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। यह मल को नरम रखता है, पाचन को बेहतर बनाता है और गुड बैक्टीरिया को पोषण देता है।
- जब भोजन में साबुत अनाज, फल-सब्जियां, दालों की मात्रा कम होती है तो इससे फाइबर की मात्रा भी घट जाती है।
- इससे कब्ज की समस्या बढ़ सकती है और आंतों की गतिविधि भी प्रभावित हो सकता है।
- कई अध्ययनों में फाइबर की कमी को कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिमों को बढ़ाने वाला पाया गया है।
ज्यादा शक्कर और शराब-सिगरेट की आदत
कोल्ड ड्रिंक, केक, कुकीज जैसी चीजें ज्यादा खाने से मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम बढ़ाता है। मोटापा कोलोरेक्टल कैंसर का बड़ा कारण है। ज्यादा चीनी भी मोटापा और कैंसर का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है।
धूम्रपान और शराब को भी विशेषज्ञ कोलोरेक्टल कैंसर के मामलों के लिए जिम्मेदार मानते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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