लिवर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, जो खून से अशुद्ध चीजों को फिल्टर करने, डाइजेशन को ठीक रखने, ब्लड शुगर को कंट्रोल करने से लेकर एल्ब्यूमिन जैसे जरूरी प्रोटीन बनाने में मदद करता है। मसलन शरीर स्वस्थ रहे इसके लिए जरूरी है कि आपका लिवर ठीक तरीके से काम करता रहे। हालांकि लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी के कारण लिवर से संबंधित बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। लिवर में फैट जमा होने की बीमारी यानी फैटी लिवर डिजीज समय के साथ कम उम्र के लोगों को भी अपना शिकार बना रही है।
Liver Health: न वजन ज्यादा और न पेट बाहर, फिर भी हो रहा फैटी लिवर! डॉक्टर से जानिए क्या है इसका कारण
अक्सर माना जाता रहा है कि अगर आपका वजन नॉर्मल है और लिवर एंजाइम, शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसे रूटीन टेस्ट लिमिट में हैं, तो उनका लिवर हेल्दी होना चाहिए। बदकिस्मती से, यह हमेशा सच नहीं होता। नॉर्मल वजन का मतलब जरूरी नहीं कि आप फैटी लिवर से सुरक्षित हैं।
दुबले-पतले लोगों में बढ़ती फैटी लिवर की समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर माना जाता रहा है कि फैटी लिवर की बीमारी सिर्फ मोटापा ग्रस्त या ज्यादा वजन वाले लोगों को होती है, हालांकि विशेषज्ञ कहते हैं, ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है जिनका वजन तो कंट्रोल में होता है पर उनके लिवर में फैट जमा होने की समस्या देखी जाती है। दुबले-पतले लोग भी फैटी लिवर रोग का शिकार पाए जा रहे हैं। इस तरह के फैटी लिवर को लीन फैटी लिवर या फिर नॉन-ओबेसिटी फैटी लिवर डिजीज कहा जाता है।
अमर उजाला से बातचीत में लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ अभिजीत पाण्डेय कहते हैं, अगर आप कम वजन वाले हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि आपको फैटी लिवर डिजीज नहीं होगी। अगर लाइफस्टाइल ठीक नहीं है तो ये बीमारी किसी को भी हो सकती है।
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क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
डॉ अभिजीत पाण्डेय बताते हैं, फैटी लिवर रोग का संबंध मेटाबॉलिज्म से होता है। वजन कंट्रोल में होने का मतलब ये नहीं है कि आपका मेटाबॉलिज्म ठीक हो।
कुछ लोगों के लिवर के आसपास फैट जमा हो जाता है, भले ही वे पतले दिखते हों। इसके लिए लाइफस्टाइल में गड़बड़ी, खानपान की गड़बड़ी सहित कई अन्य स्थितियों को जिम्मेदार माना जा सकता है।
- लाइफस्टाइल की गड़बड़ आदतें जैसे ज्यादा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और मीठी चीजें खाना, सॉफ्ट ड्रिंक्स और पैकेज्ड स्नैक्स खाने की आदत लिवर की सेहत को नुकसान पहुंचाती है और फैटी लिवर रोग का कारण बन सकती है।
- शारीरिक गतिविधियों की कमी, नींद पूरी न होना, लंबे समय तक बैठकर काम करना, स्ट्रेस और गट हेल्थ में असंतुलन भी आपमें फैटी लिवर रोग का खतरा बढ़ाने वाले हो सकते हैं, भले ही आपका वजन कंट्रोल में है।
ये आदतें बढ़ा देती हैं खतरा
वजन कंट्रोल में होने के बाद भी फैटी लिवर का शिकार हो गए हैं तो इसके लिए कुछ कारणों को जिम्मेदार माना जा सकता है।
- लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, व्यायाम नहीं करते हैं तो इससे फैट का मेटाबॉलिज्म बिगड़ने लगता है। इसका असर सीधे लिवर पर पड़ता है और वहां फैट जमा होने लगता है। यानी बाहर से शरीर पतला दिखता है, लेकिन अंदरूनी अंगों में चर्बी जमा हो जाती है।
- बहुत ज्यादा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, शुगर, मीठे पेय, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड खाने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस होने पर लिवर फैट को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता और फैटी लिवर की समस्या हो सकती है।
- इसके अलावा अगर परिवार में किसी को फैटी लिवर, डायबिटीज या मेटाबॉलिक सिंड्रोम रहा है, तो नॉर्मल वजन वाले व्यक्ति को भी फैटी लिवर होने का खतरा बढ़ जाता है। कुछ जीन लिवर में फैट जमा होने की प्रवृत्ति को बढ़ा देते हैं, भले ही शरीर का वजन सामान्य हो।
भारत में बढ़ती जा रहा हैं लिवर की समस्याएं
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दुनियाभर में लिवर रोगों से होने वाली मौतों में से 18% अकेले भारत से रिपोर्ट किए जा रहे हैं। भारत में, लिवर रोग एक गंभीर जन स्वास्थ्य चिंता का विषय है, जिसमें नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) और कई अन्य प्रकार के क्रोनिक लिवर रोग प्रमुख हैं। एम्स के एक अध्ययन में बताया गया है कि लगभग 38% भारतीय आबादी फैटी लिवर से प्रभावित है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं।
इंडियन जर्नल ऑफ क्लिनिकल रिसर्च में छपे एक अध्ययन के अनुसार मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज वाले 60% से अधिक लोगों में लिवर की दिक्कतों का खतरा अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों में फैटी लिवर डिजीज का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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