एक पुरानी कहावत है- ''पेट ठीक तो सेहत ठीक''। हालांकि मेडिकल रिपोर्ट्स पर नजर डालें तो पता चलता है कि पेट और पाचन से संबंधित समस्याओं के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते जा रहे। पेट से संबंधित कई प्रकार के कैंसर के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव भी बढ़ता जा रहा है, जिसे लेकर विशेषज्ञ काफी चिंतित हैं।
Colorectal cancer: पेट की ये आम दिक्कत कहीं बन न जाए जानलेवा, 600% तक बढ़ा सकती है कैंसर का खतरा
Stomach Cancer Risk: विशेषज्ञों ने बताया कि जिन लोगों को इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज की दिक्कत होती है, ऐसे लोगों में आगे चलकर बाउल कैंसर का खतरा 600 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकता है। बाउल कैंसर को कोलन कैंसर या कोलोरेक्टल कैंसर के नाम से भी जाना जाता है।
पेट की समस्या बढ़ा देती है बाउल कैंसर का खतरा
वैज्ञानिकों की एक टीम ने लोगों को सावधान करते हुए कहा है कि 50 की उम्र से पहले भी लोगों में जानलेवा कोलोरेक्टल कैंसर होने का गंभीर खतरा बढ़ता देखा जा रहा है। ऐसे लोगों की जब मेडिकल हिस्ट्री देखी गई तो पता चला कि ज्यादातर लोगों को पेट की एक आम समस्या रह चुकी है।
विशेषज्ञों ने बताया कि जिन लोगों को इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज की दिक्कत होती है, ऐसे लोगों में आगे चलकर बाउल कैंसर का खतरा 600 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकता है। बाउल कैंसर को कोलन कैंसर या कोलोरेक्टल कैंसर के नाम से भी जाना जाता है।
- अगर आपका पेट भी अक्सर खराब (डायरिया/कब्ज) रहता है, पेट में तेज दर्द या ऐंठन बनी रहती है, बार-बार शौच जाना पड़ता है या फिर वजन कम होता जा रहा है तो ये इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज का लक्षण हो सकता है।
- इस तरह की समस्याओं पर समय रहते गंभीरता से ध्यान देना और इलाज कराना जरूरी हो जाता है। इसमें देरी बाउल कैंसर का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है।
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?
ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज लंदन की न्यूट्रिशन साइंटिस्ट प्रोफेसर सारा बेरी का कहना है कि इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज के शिकार लोगों के पेट में अक्सर बहुत ज्यादा दर्द होता रहता है।
- इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज (आईबीडी) एक अम्ब्रेला टर्म है यानी कि ये कई समस्याओं का समूह है जिसमें पाचन तंत्र की के सूजन की समस्या बनी रहती है।
- इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज में आमतौर पर दो समस्याएं बहुत आम हैं, क्रोहन रोग और अल्सरेटिव कोलाइटिस, ये दोनों ही आंतों को नुकसान पहुंचाती हैं।
- विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में बाउल कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इसकी रोकथाम के लिए आईबीडी वाले मरीजों का इलाज करना सबसे जरूरी हो जाता है।
प्रोफेसर बेरी कहती हैं, आईबीडी के मरीजों को बाकी लोगों की तुलना में कम उम्र में कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। आंतों में लगातार सूजन की समस्या कैंसर को ट्रिगर करने वाली हो सकती है।
भारतीय आबादी में भी बढ़ रही है ये बीमारी
गौरतलब है कि भारतीय आबादी में भी बाउल (कोलोरेक्टल) कैंसर बढ़ रहा है, यह टॉप-पांच कैंसर में से एक है। शहरी इलाकों में इसके मामले ज्यादा देखे जा रहे हैं। साल 2022 के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि इस साल देश में कोलन कैंसर के 64,000 से ज्यादा मामले सामने आए थे। 50 साल से कम उम्र के युवाओं (15–20% मामलों) में भी इसका जोखिम देखा जा रहा है।
प्रोफेसर बेरी कहती हैं, ज्यादातर मरीजों में शुरुआती लक्षणों में हम सबसे पहले शौच की आदतों में बदलाव वाले लक्षण देखते हैं। इसमें डायरिया और कब्ज से लेकर मल में खून, पेट दर्द, थकान और बिना किसी वजह के वजन कम होने जैसी दिक्कतें नोटिस की जाती हैं।
- मोटापा, व्यायाम की कमी और शराब, ये सभी समय के साथ इस बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं।
- एक और थ्योरी यह है भी है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स (जो आर्टिफिशियल चीजो से बने होते हैं) का ज्यादा सेवन करना भी इस बीमारी को बढ़ाने वाली हो सकती है।
बाउल कैंसर से बचाव के लिए क्या करें?
प्रोफेसर सारा बेरी कहती हैं, हमें यह पहले से ही पता है कि जिन मरीजों की डाइट ठीक नहीं होती है यानी कि जो लोग प्रोसेस्ड फूड्स और मीठे ड्रिंक्स ज्यादा लेते हैं, उन्हें बाउल कैंसर का खतरा अधिक होता है। अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स को इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज का भी बड़ा कारण माना जाता रहा है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि जिन मरीजों को हाई ब्लड शुगर की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और मोटापे की समस्या है, उन्हें कम उम्र में कोलोरेक्टल कैंसर होने का खतरा लगभग 360 प्रतिशत तक अधिक हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहती हैं, निष्कर्ष से पता चलता है कि अगर कम उम्र से ही लाइफस्टाइल और खान-पान में सुधार कर लिया जाए तो इस जानलेवा बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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स्रोत:
Common gut problem that raises risk of bowel cancer by '600 per cent'
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