पिछले करीब एक-डेढ़ महीने से पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस का प्रकोप देखा जा रहा है। 13 जनवरी को अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने दो स्वास्थ्य कर्मियों (एक महिला और एक पुरुष) में निपाह की पुष्टि होने की जानकारी दी थी। अब न्यूज एजेंसी पीटीआई ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि निपाह वायरस संक्रमण से ठीक हो चुकी नर्स की गुरुवार को मौत हो गई है। वह लंबे समय से कोमा में थी और बाद में उसके फेफड़ों में इन्फेक्शन हो गया। गुरुवार (12 फरवरी) को एक प्राइवेट हॉस्पिटल में कार्डियक अरेस्ट से नर्स की मौत हो गई है।
Nipah Alert: निपाह संक्रमण से पश्चिम बंगाल में एक की मौत, जानिए क्यों इसे माना जाता है बेहद खतरनाक
जनवरी के शुरुआती हफ्तों में पश्चिम बंगाल में निपाह के दो मामले सामने आए थे।
अब संक्रमण से ठीक हुई नर्स की गुरुवार को मौत हो गई है। वह लंबे समय से कोमा में थी और बाद में उसके फेफड़ों में इन्फेक्शन हो गया। जानिए इस जानलेवा रोग के बारे में डब्ल्यूएचओ क्या कहता है?
जनवरी में पश्चिम बंगाल में फैला था निपाह संक्रमण
जनवरी के शुरुआती हफ्तों में पश्चिम बंगाल में निपाह का खतरा बढ़ा हुआ देखा गया था। सबसे पहले दो स्वास्थ्य कर्मियों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। पहले उन्हें आईसीयू में और फिर हालत और बिगड़ने के बाद वेंटिलेटर पर रखा गया था। इन मरीजों के संपर्क में आए करीब 120 लोगों को ट्रैक भी किया गया था।
- निपाह वायरस के संक्रमण को कई अध्ययनों में कोरोनावायरस से अधिक खतरनाक बताया जाता रहा है।
- इससे संक्रमितों की हालत तेजी से बिगड़ती जाती है।
- निपाह का संक्रमण फेफड़े और ब्रेन को भी अटैक करता है।
- कुछ मरीजों में संक्रमण के एन्सेफलाइटिस होने के मामले भी देखे गए हैं।
क्या कहता है डब्ल्यूएचओ?
गौरतलब है कि निपाह वायरस एक गंभीर और जानलेवा जूनोटिक रोग है, जिसका मतलब है कि ये जानवरों से इंसानों में फैलता है। मुख्य रूप से ये चमगादड़ों में पाया जाता है और जब इन चमगादड़ों द्वारा दूषित फल इंसान खा लेते हैं तो इसे संक्रमण का खतरा हो सकता है।
भारत के अलावा हाल के दिनों में पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी निपाह का खतरा देखा गया था। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) ने एक रिपोर्ट में बताया कि भारत और बांग्लादेश में पिछले एक महीने में संक्रमण के तीन मामलों की पुष्टि हुई थी। हालांकि अब जानलेवा संक्रमण फैलने का खतरा कम हुआ है। भारत में दो और बांग्लादेश में संक्रमण का एक मामला रिपोर्ट किया गया था। फिलहाल सभी लोगों को अलर्ट रहने की जरूरत है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, जानवरों से इंसानों में फैलने वाले निपाह संक्रमण से बचाव के लिए कोई वैक्सीन नहीं है। डब्ल्यूएचओ चीफ टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने जिनेवा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "पिछले कुछ हफ्तों में निपाह के मामले सुर्खियों में रहे और इसके प्रसार को लेकर चिंता पैदा हुई थी। डब्ल्यूएचओ ने इन इलाके और दुनिया भर में निपाह वायरस के फैलने के खतरे का आकलन किया और पाया कि फिलहाल ये कंट्रोल में है और इसके मामले कम है।
क्यों खतरनाक माना जाता है निपाह?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, निपाह वायरस इसलिए ज्यादा खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह तेजी से शरीर में फैलकर दिमाग और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। कई मामलों में यह संक्रमण बहुत जल्दी गंभीर रूप ले लेता है, जिससे मरीज की जान को खतरा हो सकता है।
- संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत, तेज खांसी और सीने में जकड़न महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में निमोनिया जैसी स्थिति बन जाती है, जिससे ऑक्सीजन लेवल गिरने लगता है। इसके साथ ही मरीज को चक्कर आना, भ्रम की स्थिति और बोलने में परेशानी भी हो सकती है।
मस्तिष्क को अटैक करता है निपाह
अध्ययनों से पता चलता है कि निपाह संक्रमण आपके मस्तिष्क को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है। ये एन्सेफेलाइटिस यानी मस्तिष्क में सूजन का कारण बन सकता है। जब वायरस दिमाग तक पहुंचता है, तो इससे मरीज को दौरे पड़ सकते हैं। इसके अलावा भ्रम, व्यवहार में बदलाव और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई मामलों में मरीज कोमा की हालत में भी चला जाता है।
- कुछ मरीजों में संक्रमण ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक न्यूरोलॉजिकल समस्याएं बनी रहती हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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