क्या आप भी कुछ समय से वजन बढ़ने या कम होने, दिल की धड़कन तेज रहने, घबराहट या ज्यादा पसीना आने जैसी समस्याओं से परेशान हैं? कहीं ये थायरॉइड की बीमारी का संकेत तो नहीं है?
World Thyroid Day 2026: किन कमियों से होती है थायरॉइड की बीमारी? आप भी हैं शिकार तो जानिए कैसे मिलेगा आराम
World Thyroid Day 2026: दुनियाभर में करोड़ों लोग थायरॉइड की समस्या से जूझ रहे हैं। महिलाओं में पुरुषों की तुलना में थायरॉइड की समस्या लगभग 8 गुना ज्यादा देखी जाती है। आखिर ये बीमारी होती क्यों है और इसके खतरे को कैसे कम किया जा सकता है?
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पहले थायरॉइड के बारे में जान लीजिए
थायरॉइड, गर्दन के सामने की ओर तितली के आकार की एक छोटी-सी ग्रंथि होती है। ये ग्रंथि ऐसे हार्मोन्स बनाती है जो शरीर को स्वस्थ रखने और ठीक से काम करते रहने के लिए बेहद जरूरी होते हैं। जब यह ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती, तो आप कई तरह की समस्याओं का शिकार हो सकते हैं।
थायरॉइड मुख्य रूप से दो तरह की समस्याएं पैदा करता है।
- हाइपोथायरायडिज्म में शरीर में कुछ जरूरी हार्मोन्स का उत्पादन कम हो जाता है, जिससे वजन बढ़ने, थकान, बाल झड़ने और सुस्ती जैसी समस्याएं होती हैं।
- हाइपरथायरॉइडिज्म में यही हार्मोन जरूरत से ज्यादा बनने लगते हैं, जिससे वजन तेजी से कम होने, घबराहट, दिल की धड़कन तेज होने और हाथ कांपने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
थायरॉइड की समस्या होती क्यों है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, थायरॉइड विकारों के कारण होने वाली दिक्कतों को आमतौर पर लोग सामान्य कमजोरी या आम समस्या मानकर नजरअंदाज करते रहते हैं। समय पर बीमारी का पता न चलने पर ये हार्ट-ब्रेन से लेकर हड्डियों और प्रजनन क्षमता तक को प्रभावित कर सकती है। बच्चों के विकास और दिमागी क्षमता के लिए भी ये हार्मोन्स जरूरी हैं।
क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट से पता चलता है कि थायरॉइड की बीमारी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। खान-पान और लाइफस्टाइल की समस्याओं के अलावा ऑटोइम्यून डिसऑर्डर और कुछ पोषक तत्वों की कमी भी आपमें इस बीमारी का खतरा बढ़ा देती है।
थायरॉइड होने की क्या वजहें हैं?
थायरॉइड रोग का सबसे बड़ा कारण ऑटोइम्यून डिसऑर्डर माना जाता है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से थायरॉइड ग्रंथि पर अटैक करने लगता है। इससे हार्मोन्स का उत्पादन प्रभावित हो जाता है।
- आयोडीन की कमी भी थायरॉइड रोगों का बड़ा कारण है। भोजन में आयोडीन की कमी आपमें खतरे को बढ़ा सकती है।
- महिलाओं में गर्भावस्था, पीरियड्स और मेनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव भी थायरॉइड का जोखिम बढ़ाते हैं।
- यदि परिवार में पहले किसी को थायरॉइड रहा हो तो आनुवंशिक कारणों के चलते दूसरे लोगों को सावधान हो जाना चाहिए।
थायरॉइड के मरीजों को क्या करना चाहिए?
वैसे तो ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण होने वाली थायरॉइड की समस्या को रोका नहीं जा सकता, फिर भी पोषक तत्वों से भरपूर आहार और लाइफस्टाइल को ठीक रखकर इस बीमारी के खतरे से बच सकते हैं। यदि किसी को थायरॉइड हो जाए तो नियमित इलाज और जीवनशैली पर ध्यान देकर जोखिमों को कम किया जा सकता है।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित दवाएं लेते रहें।
- खान-पान में सुधार जरूरी है। आयोडीन, सेलेनियम, जिंक और आयरन जैसे पोषक तत्व थायरॉइड की समस्या में फायदेमंद माने जाते हैं।
- डाइट में अंडे, मछली, दही, नट्स और हरी सब्जियां जरूर शामिल करें।
- नियमित व्यायाम भी जरूरी है। इससे मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और वजन नियंत्रित रहता है और तनाव कम होता है।
- समय-समय पर डॉक्टर की सलाह पर थायरॉइड प्रोफाइल टेस्ट कराते रहें ताकि स्थिति का अंदाजा हो सके।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।