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Coronavirus:  हमारे रिश्तों को कैसे प्रभावित कर रहा कोरोना वायरस

Sat, 28 Mar 2020 10:03 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Sat, 28 Mar 2020 10:03 AM IST
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How Coronavirus effect human body and relationship by social distancing in lockdown
कोरोना वायरस(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
कोरोना वायरस ने इंसान के साथ जो किया वो है एक इंसान को दूसरे से दूर कर देना। अलगाव, क्वारंटीन, सोशल डिस्टेंसिंग जैसे शब्द अब हम आम तौर पर इस्तेमाल करने लगे हैं। सोशल मीडिया पर आपने कोरोना वायरस से जुड़ी कई तरह की तस्वीरें देखी होंगी जो हाल में वायरल भी हुई हैं। कुछ तस्वीरों में ताबूतों के साथ लोगों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। तस्वीरों में दिखता है कि इंसान को एक अजीब अकेलेपन ने घेर लिया है जो मौत के बाद भी खत्म नहीं होती। मां अपने बच्चे को छू नहीं सकती, पति अपनी पत्नी को ढांढस बंधा नहीं सकता क्योंकि एक दूसरे को छूने से कोरोना का संक्रमण फैलने का डर है। ये एक अभूतपूर्व समय है, जब अगर हम अपने प्रियजनों को जीवित देखना चाहते हैं तो हमें उनसे दूर जाना ही होगा। इटली में अस्पतालों में आखिरी सांस लेने वाले कई लोग अपने परिवार वालों को देख नहीं पा रहे हैं और न ही उन्हें छू पा रहे हैं।

 

How Coronavirus effect human body and relationship by social distancing in lockdown
- फोटो : social media

कई लोगों के परिवार के सदस्य को कोरोना वायरस लील चुका है, लेकिन न तो उनके अंतिम संस्कार में कोई भी जा पा रहा है न ही उन्हें अंतिम विदाई दे पा रहा है। कोरोना वायरस ने इंसान को इंसान से दूर कर दिया है। ये किसी फिल्म के डायलॉग की तरह लग सकता है लेकिन अब ये वास्तविकता बन चुका है। अगर खुद को बचाना है तो आपको दूसरों से दूर रहना ही होगा। बीते कुछ दिनों में क्या आपको लगा कि आप अपने मित्र को गले लगाना चाहते तो हैं लेकिन आप ऐसा कर नहीं सकते, आपकी बहन विदेश से घर लौटी है लेकिन आप जा कर उससे मुलाकात नहीं कर सकते, आप गांव जा कर अपने पिता से मिलना चाहते हैं और उनका हालचाल लेना चाहते हैं लेकिन आप ऐसा नहीं कर पा रहे, वर्क फ्रॉम होम कर रहे पति पत्नी को एकांत के पल मिलते तो हैं लेकिन एक दूसरे के नजदीक जाने में उन्हें डर लगता है।

How Coronavirus effect human body and relationship by social distancing in lockdown
- फोटो : पीटीआई
हम ऐसे दौर में पहुंच गए हैं जहां एक दूसरे को छूने से हमें डर लगता है, किसी को छूते ही जो एक काम हम सबसे पहले करते हैं वो है अपने हाथ धोना या फिर हाथों पर सैनिटाइजर लगाना। फिलहाल हम जिस वक्त से गुजर रहे हैं ये बेहद जरूरी है लेकिन हम जिस एक चीज़ को इस मुश्किल वक्त में खो रहे हैं वो है.... एक दूसरे को छूना या कहें स्पर्श।

स्पर्श आपके जीवन में कितना महत्वपूर्ण है? क्या ये वाकई में जरूरी भी है? बीबीसी संवाददाता क्लाउडिया हेमंड मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े रेडियो कार्यक्रम करती हैं। उन्होंने एक्सपर्ट्स से जानना चाहा कि स्पर्श का हमारे जीवन में महत्व क्या है।


 
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How Coronavirus effect human body and relationship by social distancing in lockdown
corona virus - फोटो : पीटीआई
जीवन का पहला परिचय- स्पर्श

मां के पेट में मौजूद बच्चा सबसे पहले जो चीज अनुभव कर पाता है वो है स्पर्श। इसके बाद ही उसमें सुन सकने, सूंघ सकने और स्वाद लेने जैसी संवेदनाएं विकसित होती हैं। ये दिलचस्प बात है कि अगर मां के पेट में जुड़वा बच्चे हैं तो वो एक दूसरे को सबसे पहले छू कर अनुभव करने की कोशिश करते हैं। जन्म के बाद मां से उम्मीद होती है कि वो बच्चे को अपनी गोद में रखें ताकि बच्चा सुरक्षित महसूस कर सके। यही भावना हमारे साथ जीवनभर बनी रहती है। इस कारण किसी मुश्किल वक्त में जब हमारे प्रियजन या परिवार वाले हमें गले लगाते हैं तो हम सुरक्षित महसूस करते हैं। क्लाउडिया लिखती हैं कि आपके प्रियजन का स्पर्श और आपके मन की शांति आपस में जुड़ी हुई है।


 
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कोरोना वायरस - फोटो : पीटीआई
सबसे महत्वपूर्ण भावना
हम अपनी त्वचा पर से स्पर्श का अनुभव करते हैं। हमारी सभी इंद्रियों में - आंख, नाक, कान - में हमारी त्वचा सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। यही कारण है कि हम अक्सर अनजाने में कई फैसले इस स्पर्श के आधार पर ही लेते हैं। जैसे, सब्जी ताजी है या नहीं, किसी व्यक्ति को बुखार है या नहीं। इतना ही नहीं कभी कभी किसी को छू कर हम ये भी जान पाते हैं कि वो व्यक्ति कैसा महसूस कर रहा है। और इसी कारण हमारे लिए मौजूदा परिस्थिति अभूतपूर्व है क्योंकि हम पहले की तरह अपनी इस इंद्रियों पर निर्भर नहीं रह सकते, दुनिया को समझने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते।

केईएम अस्पताल में मनोरोग विभाग की पूर्व डीन डॉक्टर शुभांगी पारकर कहती हैं कि, "ये बीमारी हमारी एक इंद्री को बुरी तरह प्रभावित कर रही है, वो है स्पर्श। इंसानों में ही नहीं बल्कि जानवरों में भी स्पर्श बेहद महत्वपूर्ण संवेदना है लेकिन कोविड 19 के कारण हम एक तरह से एक दूसरे से दूर होते जा रहे हैं।"



 
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