Bache Ka Screen Time Kaise Kam Kare: IPL 2026 शुरू हो गए हैं। आईपीएल का क्रेज सिर्फ बड़ों तक सीमित नहीं है, बच्चे भी घंटों मोबाइल, टीवी या टैबलेट पर मैच देखने लगे हैं। लेकिन बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों की सेहत और विकास पर असर डाल सकता है।
IPL 2026: मैच से बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ा? तुरंत अपनाएं ये 7 स्मार्ट टिप्स
IPL 2026 Screen Time Control: आईपीएल के दौरान बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ना सामान्य है, लेकिन इसे सीमित करना जरूरी है। अभिभावक को समय सीमा तय करनी चाहिए, आउटडोर एक्टिविटी बढ़ानी चाहिए और स्क्रीन-फ्री रूटीन अपनाना चाहिए ताकि बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास प्रभावित न हो।
ज्यादा स्क्रीन टाइम के नुकसान
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स्क्रीन टाइम बढ़ने से नींद की समस्या हो सकती है।
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अधिक वक्त पर टीवी या मोबाइल पर बिजी रहने से ध्यान और पढ़ाई में कमी आती है।
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बैठे बैठे मोबाइल यूज करने या टीवी देखने से शारीरिक सक्रियता कम हो जाती है और मोटापा बढ़ सकता है।
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ज्यादा समय तक स्क्रीन पर नजर गड़ाए रखने से आंखों की समस्या जैसे जलन, आंखों से आंसू आना, कमजोर दृष्टि आदि हो सकती है।
स्क्रीन टाइम कंट्रोल करने के लिए अभिभावक क्या करें?
स्क्रीन टाइम लिमिट सेट करें
बच्चों के लिए टीवी या मोबाइल पर रोजाना एक-दो घंटे की सीमा तय करें और उसे फॉलो करवाएं। उन्हें कहें कि अगर मैच देखना है तो बाकि वक्त वह फोन या टीवी का यूज नहीं कर सकते हैं।
मैच और एक्टिविटी का संतुलन बनाएं
बच्चों को पूरा मैच देखने की बजाय सिर्फ कुछ ओवर्स या हाइलाइट्स देखने दें और बाकी समय खेल-कूद में लगाएं। लगातार दो तीन घंटे टीवी देखने के बजाए फिजिकल एक्टिविटी पर ज्यादा फोकस रखें।
स्क्रीन फ्री टाइम तय करें
टीवी देखते देखते सोने की आदत न लगाएं। जब भी बच्चे को सोना हो, उससे एक घंटे पहले टीवी और मोबाइल से दूरी बना लें। इसके अलावा खाने के समय भी टीवी बंद रखें। यह आदत बच्चों की नींद और हेल्थ के लिए जरूरी है।
स्लीप रूटीन बनाए रखें
अत्यधिक स्क्रीन टाइम नींद को खराब करता है और बच्चों की ग्रोथ पर असर डालता है। इसलिए बच्चे के सोने का एक रूटीन तय करें और उसी रूटीन के हिसाब से उसे सुलाएं व जगाएं।
फैमिली के साथ ही स्क्रीन टाइम
बच्चों को अकेले मोबाइल देने के बजाय उससे कहें कि परिवार के साथ मैच देखें, इससे बाॅन्डिंग बढ़ती है और एक्सपोजर कम होता है। साथ ही बच्चा आपके रूटीन को अपनाता है।
मिसाल बनें
बच्चे वही सीखते हैं जो देखते हैं। बच्चे के लिए मिसाल बनें। अभिभावक खुद भी कम स्क्रीन इस्तेमाल करें, ताकि बच्चा भी आपको देखकर सीखें।
अन्य एक्टिविटी अपनाएं
सिर्फ टीवी देखना या मैच ही बच्चे की एक्टिविटी में न हो, उनकी रूचि अन्य गतिविधियों में बढ़ाएं। जैसे आउटडोर गेम्स खिलाएं। बोर्ड गेम्स और किताबें पढ़ने को भी कहें।