मौजूदा समय में सभी की नजरें एक ही जगह टिकी हैं, रूस और यूक्रेन युद्ध पर। हर कोई इस युद्ध को करीब से देख रहा है, और समझ रहा है कि क्या विश्व अगले विश्व युद्ध की तरफ तो नहीं बढ़ रहा? लोगों के मन में सवाल तो कई हैं, लेकिन फिलहाल इनके जवाब नहीं हैं। जहां एक तरफ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी ताकतवर फौज के साथ यूक्रेन पर हमला बोल चुके हैं, तो वहीं दूसरी तरफ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वे पहले ही कह चुके हैं कि हमारी कोई मदद नहीं कर रहा है, लेकिन हम आखिरी दम तक रूसी सेना का सामना करेंगे। इस दम को भरने वाले जेलेंस्की के बारे में आप कितना जानते हैं? शायद न के बराबर, लेकिन मौजूदा हालात चाहते हैं कि आप वोलोडिमिर जेलेंस्की के बारे में जानें। समझें कि आखिर वो इस पद तक पहुंचे कैसे, उनका जीवन कैसा रहा आदि। तो चलिए हम आपको इनके बारे में बताते हैं। आप अगली स्लाइड्स में इस बारे में जान सकते हैं...
Russia Ukraine War: जानें कैसे तय किया कॉमेडियन से राष्ट्रपति पद तक का सफर, आज जीते हैं शानदार जिंदगी
कैसा रहा जीवन?
- दरअसल, वोलोडिमिर जेलेंस्की का जन्म 25 जनवरी 1978 क्रिवी रिह, यूएसएसआर में हुआ था। हालांकि, बाद में उनका परिवार मंगोलिया में रहने चला गया था। जेलेंस्की ने यूक्रेनी और रशियन भाषा पर पकड़ बनाई थी। वहीं, पढ़ाई के दौरान उनकी रूचि थिएटर और कॉमेडी में थी।
यहां से मिली थी प्रसिद्धि
- जैसा कि वोलोडिमिर जेलेंस्की की रूचि थिएटर और कॉमेडी को लेकर थी। इसी कड़ी में वो आगे बढ़े और उन्होंने एक टीवी शो में स्कूल शिक्षक का किरदार निभाया। ये शो ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी आया था, और यही वो शो था जहां से जेलेंस्की को काफी प्रसिद्धि मिली थी।
टीवी चैनल में करने लगे काम
साल 2011 में जेलेंस्की एक कंपनी में आर्ट डायरेक्टर की भूमिका में रहे थे। इसके बाद वे यूक्रेन के एक टेलीविजन चैनल इंटर टीवी में काम करने लगे। वहीं, टीवी में काम करने के अलावा वे फिल्मों से भी जुड़े और यहां अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा।
टीवी छोड़ राजनीति में एंट्री
- वहीं, साल 2012 में जेलेंस्की ने टीवी को अलविदा कह दिया, और अपनी सियासी पारी शुरू की। इसके बाद वे लगातार आगे बढ़ते गए, और 19 अप्रैल 2019 में वे यूक्रेन के राष्ट्रपति बने। अगले दिन यानी 20 अप्रैल 2019 को उन्होंने शपथ ली और फिर अपना कार्यभार संभाला। इसके बाद से जेलेंस्की की पहचान एक कड़े फैसले लेने वाले नेता के तौर पर होने लगी।
