Govardhan Made By Gobar: दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है। इस वर्ष गोवर्धन पूजा 26 अक्तूबर को मनाई जा रही है। गोवर्धन पूजा में महिलाएं गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाती है और उसकी पूजा करती है। मान्यताओं के मुताबिक, भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्रदेव के अहंकार को तोड़ा था और गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी। वहीं जब तेज बारिश हुई तो गोवर्धन पर्वत ने ही ब्रजवासियों की रक्षा की थी, तब से यह पर्व मनाया जाने लगा और गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाने लगी। इस त्योहार को प्रति वर्ष महिलाएं घर पर मनाती हैं। इसमें गाय के गोबर से कुछ आकृतियां बनाई जाती है, फिर उसकी पूजा की जाती है। शाम में इसी गोबर की आकृति को मिटाकर उसका एक पर्वत नुमा ढांचा तैयार किया जाता है। चलिए जानते हैं कि गोवर्धन पूजा के लिए गोबर से गोवर्धन कैसे बनाए जाते हैं।
Govardhan Made By Gobar: गोबर से गोवर्धन कैसे बनाए जाते हैं? जानें सबसे आसान तरीका
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गोवर्धन बनाने के लिए क्या सामग्री चाहिए
गाय या भैंस का ताजा गोबर, एक लकड़ी गोबर को आकृति देने के लिए, उनके वस्त्र, तिलक करने के लिए सफेद या पीला रंग, मोर पंख (वैकल्पिक), एक दीपक गोवर्धन पूजा के लिए।
गोवर्धन पूजा के लिए चौक कैसे बनाएं ?
गोवर्धन पूजा के लिए गाय या भैं का गोबर मंगवा लें। इस गोबर से एक चौक या बॉर्डर बनाएं। इसी चौक के अंदर पहाड़, भगवान कृष्ण, गाय, पेड़ पौधे आदि सभी की आकृति गोबर से ही बना लें। अधिकतर घरों में यह आकृति बनाकर सुबह के समय इसकी पूजा की जाती है। गोबर से बने इस चौक की पूजा के बाद शाम में गोवर्धन पर्वत बनाया जाता है।
गोवर्धन कैसे बनाएं?
गोबर से बनी चौक का सारा गोबर एकत्र कर लें। गोबर का पर्वत नुमा ढांचा बना लें। अब एक छड़ी की मदद से इस ढांचे की आंख, नाक बनाकर चेहरे का आकार दें। जब गोबर से बने गोवर्धन पर्वत की संरचना सूखने लगे तो उसके मुकुट, कपड़े पहना कर सजा सकते हैं।
गोवर्धन पूजा कैसे करते हैं?
आप चाहें तो गोवर्धन पर्वत की संरचना में मोर पंख का उपयोग भी कर सकते हैं। अब गोवर्धन के माथे पर सफेद या पीले रंग का तिलक लगाएं। इनकी पूजा करते समय फूल अर्पित करें और भोग में खील, बताशे और शक्कर के खिलौने चढ़ाएं। शाम के समय इस पर दीपक जलाकर घर के द्वार पर रखें।