घर में हों या दफ्तर या किसी पार्टी में, क्या आप भी बार बार माथे पर आये तेल को पोंछने के लिए टिशू या रुमाल का प्रयोग करते-करते थक जाते हैं। ये कोई असामान्य बात नहीं, ऐसा कई लोगों के साथ होता है। उनके माथे यानी फोरहेड या नाक या ओठों के ऊपर जरूरत से ज्यादा त्वचा से निकलने वाले तेल की बूँदें चमकने लगती हैं। इसकी वजह से बार बार इस अतिरिक्त तेल को पोंछने के लिए तो मशक्कत करनी ही पड़ती है, शर्मिंदगी और असहजता जैसे भाव भी मन में आ जाते हैं।
Skin care tips: ऑइली फोरहेड की समस्या को करें ऐसे दूर
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क्या है समस्या की जड़?
त्वचा को सामान्य और प्राकृतिक तौर पर नम बनाये रखने के लिए शरीर की सिबेशियस ग्रंथियों द्वारा सीबम (एक प्रकार का तेल) का उत्पादन किया जाता है। इस तेल का अधिक मात्रा में उत्पादन ही समस्या की जड़ बनता है। कई लोगों में यह उत्पादन माथे, नाक आदि जगहों पर बाकी जगहों से कहीं अधिक होता है। यह भी एक तथ्य है कि इन जगहों पर सिबेशियस ग्रंथियों का आकार भी कहीं बड़ा होता है। तेल के बार बार इन जगहों पर उभरने के अलावा मुश्किल यह भी होती है कि मॉइश्राइजर लगाएं या सनस्क्रीन, वो ज्यादा देर इस जगह पर टिक नहीं पाता। फलस्वरूप इस स्थान पर त्वचा रूखी और टैन भी होने लगती है। इस समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं जिनमें जेनेटिक संरचना, उम्र, हार्मोन्स का असंतुलन, मौसम से जुड़ी स्थितियां, अधिक खुले रोमछिद्र, गलत तरीके से प्रयोग में लाये जा रहे या खराब क्वालिटी के स्किन केयर उत्पाद, बालों में बहुत पसीना या तेल आना, स्किन का रूखा रहना, आदि शामिल हैं।
इस तरह करें देखभाल
पूरी ऑइली त्वचा के लिए अलग से एक स्किन केयर रूटीन का होना बहुत जरूरी है क्योंकि यहाँ ऑइल कंट्रोल करने के साथ ही त्वचा पर सही नमी बनाये रखना भी जरूरी होता है। माथे या नाक पर आने वाले अतिरिक्त तेल को सही केयर और लाइफस्टाइल में थोड़ा सा बदलाव लाकर नियंत्रित किया जा सकता है। जैसे-
सबसे पहले तो चेहरे को दिन में 2 बार, सुबह सोकर उठने के बाद और रात को सोने से पहले अच्छे से धोने के बाद थपथपाकर पोंछने और मॉइश्चराइज करने की आदत डालें। चेहरे को बार बार, थोड़ी थोड़ी देर में धोने से बचें। ज्यादा बार चेहरा धोने से शरीर की सिबेशियस ग्रंथियां और भी सक्रिय हो सकती हैं और तेल और तेजी से निकलने लगता है। अगर आप पसीने के साथ बार बार मॉइश्चराइजर पोंछ लेते हैं तो कोशिश करें कि वाटर या जैल बेस्ड मॉइश्चराइजर हमेशा अपने साथ रखें। याद रखें कि कभी भी रगड़ कर माथे को न पोंछें।
सार्वजनिक तौलिये का उपयोग करने से बचें
सामान्य दिनचर्या के अलावा यदि आप जिम जा रहे हैं, वर्कआउट कर रहे हैं तो चेहरे को उसके बाद भी साफ़ पानी और फोम वाले फेसवॉश से धोएं। चाहें तो पहले साफ़ नैपकिन से चेहरा साफ़ करें और फिर धोएं। इससे चेहरे पर लगी गंदगी और पसीना साफ़ हो जायेगा। कभी भी गंदे या सार्वजनिक तौलिये या नैपकिन का उपयोग न करें।
वाटर बेस्ड या ऑइल फ्री मॉइश्चराइजर का उपयोग जरूरी है। यह सिबेशियस ग्रंथियों को अति सक्रिय होने से रोकेगा और त्वचा पर जरूरी नमी भी बनाये रखेगा। इसकी सिर्फ एक लेयर काफी है। साफ हथेलियों पर दो-तीन ड्राप मॉइश्चराइजर लें और पूरे चेहरे पर एक जैसे फैलते हुए इसे लगाएं। ज्यादा देर तक चेहरे पर हाथों को न रखें।
एक्सफोलिएशन भी है जरूरी
हमारी त्वचा प्राकृतिक तौर पर मृत और बेकार हो चुकी कोशिकाओं को निकालती जाती है और इसकी जगह नई कोशिकाएं लेती जाती हैं। यह मृत कोशिकाएं अगर त्वचा पर इकट्ठी रह जाएँ तो कई सारी समस्याएं पैदा कर सकती हैं। इसलिए हफ्ते में कम से कम एक बार एक्सफोलिएशन यानी मृत त्वचा को निकालने की प्रक्रिया जरूर उपयोग में लाएं। इसे ज्यादा बार न करें क्योंकि इससे त्वचा और रूखी-सूखी हो सकती है।
हफ्ते में एक बार चारकोल या मुल्तानी मिटटी का पैक जरूर उपयोग में लाएं। यह त्वचा में कसावट भी लाएगा और अतिरिक्त तेल को सोखने में मदद भी करेगा। इससे त्वचा मुलायम बनी रहेगी और ताजगी से भरपूर दिखेगी।