शहर भले ही अब भी उतने ही बड़े हैं लेकिन समय की रफ्तार ने हर दूरी को बढ़ा डाला है। ऐसा लगता है जैसे कि हर एक व्यक्ति जल्दी में कहीं जाना चाहता है। हालाँकि यह व्यस्तता विकास की भी निशानी है। इसलिए मनुष्य ने कम समय में जल्दी काम करवाने के लिए आविष्कार किया संसाधनों का, मशीनों का। ऐसा ही एक उपयोगी संसाधन अब बन गए हैं टू व्हीलर। कहीं भी आना-जाना हो, छोटा-मोटा सामान लाना ले जाना हो। टू व्हीलर से ये काम आसान हो जाते हैं। लेकिन हर अन्य मशीन और संसाधन की तरह ही टू व्हीलर भी रखरखाव मांगते हैं।
Two Wheeler: जब करवानी हो टू व्हीलर की सर्विसिंग, इन बातों का जरूर रखें ध्यान
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सर्विसिंग के साथ लम्बी होगी उम्र
कोई भी मशीन लगातार चलते हुए थकती भी है और घिसती भी है। बाइक, स्कूटरेट या अन्य दो पहिया वाहन इससे परे नहीं हैं। लम्बे समय तक अच्छी सेवाएं देने के लिए इनका मेंटेनेंस भी जरूरी है। ठीक वैसे ही जैसे हम अपने शरीर को फिट बनाये रखने के लिए एक्सरसाइज, जिमिंग, पोषक भोजन, मालिश आदि का उपयोग करते हैं। टू व्हीलर की सर्विसिंग में कई चीजें आती हैं और यह पूरी गाड़ी को फिट बनाये रखती हैं। इससे न केवल गाड़ी का माइलेज और ब्रेक आदि दुरुस्त रहते हैं, बल्कि आपातकाल में कभी गाड़ी अचानक खराब होने की आशंका कम से कम हो जाती है। इसलिए जरूरी है कि समय पर गाड़ी की सर्विसिंग की ओर ध्यान दिया जाए।
इन बातों को रखें ध्यान में
गाड़ी खरीदते समय मैन्युअल या सर्विस कार्ड मिलता है ज्यादातर बातें तो इसी से समझी जा सकती हैं। इसके अलावा गाड़ी खरीदते समय भी सर्विसिंग के बारे में विस्तार से बताया जाता है। इन बातों को एक पेपर में नोट कर लें और कार्ड को हमेशा संभाल कर रखें। इसके अतिरिक्त जिन बातों का ध्यान सर्विसिंग के दौरान रखना चाहिए वे इस प्रकार हैं-
नई गाड़ी खरीदने के बाद की शुरूआती सर्विसिंग फ्री होती हैं और इनके लिए आपके सर्विस कार्ड में बकायदा कूपन दिए होते हैं। ये सर्विसिंग गाड़ी के कुछ किलोमीटर चलने या कुछ माह की अवधि बीतने के बाद करवाने का विकल्प होता है। कई कंपनियां एक से ज्यादा सर्विसिंग भी फ्री देती हैं लेकिन फ्री सर्विसिंग में अधिकांशतः गाड़ी की धुलाई, ऑइल चेंज व चैकअप ही शामिल होता है। यदि इससे ज्यादा कुछ करवाना होता है तो उसके लिए अलग अलग नियम व सुविधाएँ हो सकती हैं। इसलिए इस बारे में गाड़ी खरीदते समय ही पूरी जानकरी लेकर रखें।
सर्विसिंग सही जगह पर करवाएं
यदि गाड़ी में खरीदने के कुछ ही दिनों के भीतर पार्ट्स संबंधी कोई परेशानी आ रही है या गाड़ी स्टार्ट करते समय, चलाते समय कोई दिक्कत दे रही है तो तुरंत डीलर को बताएं। मेन्युफेक्चरिंग से संबंधित समस्या होने पर पार्ट्स को निशुल्क बदलना या जरूरत पड़ने पर गाड़ी को ही बदलकर देने का प्रावधान है। इस बात का हमेशा ध्यान रखें।
गाड़ी की सर्विसिंग जहां तक हो सके कम्पनी के सुझाये आउटलेट में ही करवाएं। ऐसा अक्सर होता है कि नई गाड़ी की फ्री सर्विसिंग तो लोग कम्पनी में करवाते हैं लेकिन उसके बाद वे कहीं भी बाहर सर्विसिंग करवाने लगते हैं। थोड़ी बहुत बचत के लिए किसी के भी हाथ में गाड़ी देना गलत निर्णय भी साबित हो सकता है। यदि आप बाहर सर्विसिंग करवाते भी हैं तो यह ध्यान रखें कि मैकेनिक या सर्विस सेंटर भरोसेमंद और आपकी गाड़ी को समझने वाला हो। प्राथमिकता उसी सर्विस स्टेशन को दें जहाँ बकायदा जॉब कार्ड बनता हो।
इंश्योरेंस, ऑइल चेंज और ब्रेक पर भी दें ध्यान
गाड़ी का इंश्योरेंस हमेशा समय पर रिन्यू करवाएं और यह ध्यान में रखें कि इंश्योरेंस में क्या क्या कवर किया गया है। अधिकांशतः गाड़ी खरीदते समय डीलर्स ही आपको इंश्योरेंस पॉलिसी भी सजेस्ट करते हैं। लेकिन हमेशा इंश्योरेंस पॉलिसी वही लें जो आपको सभी तरह का कवर दे रही हो और स्थापित कम्पनी की हो। सर्विसिंग करवाते समय यदि आपको किसी पार्ट को चेंज करवाना है या बड़ी डेंटिंग-पेंटिंग का का काम है तो यह इंश्योरेंस बहुत काम आएगा।
हर सर्विसिंग पर ऑइल चेंज करवाने और ब्रेक चैक करवाने का काम जरूर करें। खराब या बहुत लम्बे समय से उपयोग में आ रहा इंजन ऑइल कभी भी मुश्किल खड़ी कर सकता है और इससे गाड़ी अचानक बंद होने की स्थिति में भी आ सकती है। इसी तरह ब्रेक गड़बड़ होने से भी अचानक दुर्घटना होने का जोखिम बढ़ सकता है, खासकर स्कूटरेट (बिना गियर वाली गाड़ियों) में।