Unique Prasad in Temples: इस मंदिर में चढ़ता है जिंदा मछली का प्रसाद, एक में तो चाउमीन का लगता है भोग
Unique Prasad In Temples: चाहे जिंदा मछली हो या बिरयानी हो, मोमोज हो या चाॅकलेट हो, भारत के कुछ मंदिर आस्था का ऐसा स्वाद पेश करते हैं जिसे भक्त कभी नहीं भूल पाएगा। आइए जानते हैं कुछ ऐसे मंदिरों के बारे में, जहां आस्था का स्वाद है एकदम अलग और खास।
रजरप्पा मंदिर, झारखंड
झारखंड के रामगढ़ जिले में अनोखा प्राचीन रजरप्पा मंदिर स्थित है। 6000 वर्ष पुराना यह मंदिर अपनी रहस्यमय प्रतिमा और अनोखी आध्यात्मिकता के लिए प्रसिद्ध है। इसे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिद्ध पीठ भी माना जाता है, जहां तंत्र साधना होती है। मान्यता है कि यहां माता सती का सिर गिरा था और यहां छिन्नमस्ता देवी की पूजा की जाती है। लेकिन इस मंदिर का प्रसाद भी काफी प्रसिद्ध है। वैसे तो यहां केवल शाकाहारी प्रसाद चढ़ाया जाता है। लेकिन एक अनोखी परंपरा झारखंड और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में देखने को मिलती है, जिसमें श्रद्धालु जिंदा मछली को निगलते हैं। यह अस्थमा के इलाज के लिए की जाने वाली सदियों पुरानी विधि है। यह अनूठी परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।
मंच मुरुगन मंदिर, केरल
एक ऐसा मंदिर भी है, जब श्रद्धा चॉकलेट के स्वाद जैसी लगती है। केरल के अलप्पुझा में मंच मुरुगन मंदिर स्थित है जो भगवान मुरुगन को समर्पित है। खास बात यह है कि इस मंदिर में भगवान मुरुगन को चॉकलेट, वह भी एक खास ब्रांड की चॉकलेट का भोग चढ़ाया जाता है। मान्यता है ककि मंदिर में एक भक्त ने धन्यवाद स्वरूप भगवान को चॉकलेट बार चढ़ाया। यह परंपरा इतनी लोकप्रिय हो गई कि अब यहां सैकड़ों श्रद्धालु चॉकलेट का प्रसाद चढ़ाते हैं। यह सिद्ध करता है कि श्रद्धा दिल से होती है, परंपरा से नहीं।
कामाख्या मंदिर, असम
देश में कई ऐसे मंदिर है, जहां प्रसाद में मांसाहार अर्पित किया जाता है। इन्हीं में देवी का प्रसिद्ध शक्तिपीठ कामाख्या मंदिर है। असम के कामाख्या मंदिर में अब भी बलि प्रथा प्रचलित है, जहां बकरे की बलि दी जाती है। बलि के बाद उसका मांस पकाकर प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। इसी तरह तमिलनाडु के एक मंदिर में तीन दिन तक बिरयानी पकाई जाती है, जिसे बाद में श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
चाइनीज काली मंदिर, कोलकाता
कोलकाता में स्थित चाइनीज काली मंदिर भारत की विविधता और समरसता का सुंदर उदाहरण है। मंदिर कोलकाता के टेंगरा इलाके में स्थित है। मंदिर के कारण इस इलाके को चाइना टाउन कहा जाता है। कहते हैं कि एक चाइनीज परिवार के बच्चे की तबियत खराब होने पर उसे मंदिर लेकर आया गया तो बच्चा ठीक हो गया। इस पर चाइनीज समुदाय के लोगों ने मंदिर को अच्छे से बनवाया और तब से यहां की काली माता को चाइनीज का भोग लगता है। यहां काली माता को चाउमीन, मोमोज और मंचूरियन चढ़ाया जाता है। यह मंदिर बंगाली और चीनी संस्कृति के मेल का अद्भुत प्रतीक है।