Benefits of Pranayama For Lungs: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव और प्रदूषम हमारे श्वसन तंत्र को सबसे अधिक प्रभावित कर रहे हैं। एक स्टडी के मुताबिक रोजाना थोड़ी देर प्राणायाम फेफड़ों की कार्यक्षमता को तेजी बढ़ा सकता है। प्राणायाम का अर्थ है 'प्राण' यानी श्वास का 'आयाम' यानी विस्तार। जब हम गहरी और नियंत्रित सांस लेते हैं, तो फेफड़ों के निचले हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचती है, जो सामान्य छोटी सांसों के दौरान निष्क्रिय रहते हैं।
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Yoga: क्या रोजाना प्राणायाम करने से फेफड़ों की ताकत बढ़ाती है, जानें क्या कहती है स्टडी?
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shikhar Baranawal
Updated Mon, 02 Mar 2026 07:30 AM IST
सार
Scientific Study on Deep Breathing: प्राणायाम योग हमारे संपूर्ण सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इस योग की खास बात यह है कि ये आपकी फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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अनुलोम-विलोम प्राणायाम
- फोटो : इंस्टाग्राम
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भ्रामरी प्राणायाम (Bee Breathing)
- फोटो : इंस्टाग्राम
फेफड़ों की कोशिकाओं पर प्राणायाम का वैज्ञानिक प्रभाव
- प्राणायाम के दौरान गहरी सांस लेने से डायाफ्राम मजबूत होता है, जिससे फेफड़ों को फैलने के लिए अधिक जगह मिलती है।
- यह फेफड़ों में जमा टॉक्सिन्स और कार्बन डाइऑक्साइड को पूरी तरह बाहर निकालने में मदद करता है।
- विशेषज्ञ बताते हैं कि प्राणायाम 'पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम' को सक्रिय करता है, जिससे श्वसन दर स्थिर होती है और हृदय गति में भी सुधार होता है।
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कपालभाति प्राणायाम
- फोटो : Amar Ujala
प्रमुख प्राणायाम
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- भस्त्रिका: यह फेफड़ों को साफ करता है और श्वसन मार्ग की रुकावटों को दूर करता है।
- कपालभाति: यह फेफड़ों की झिल्लियों को लचीला बनाता है और शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स को तेजी से बाहर निकालता है।
- अनुलोम-विलोम: यह शरीर की नाड़ियों को शुद्ध करता है और फेफड़ों के दोनों हिस्सों को समान रूप से सक्रिय करता है।
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भ्रामरी प्राणायाम
- फोटो : Amar Ujala
प्रदूषण के बाद की रिकवरी में मदद
- शहरों में बढ़ते एयर क्वालिटी इंडेक्स के प्रभाव को कम करने के लिए प्राणायाम फेफड़ों के सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
- यह श्वसन संबंधी मांसपेशियों की सहनशक्ति बढ़ाता है, जिससे सीढ़ियां चढ़ते समय या भारी काम करते समय सांस फूलने की तिव्रता कम होती है।
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प्राणायाम
- फोटो : Freepik.com
सांसों का सही संतुलन ही है जीवन
प्राणायाम केवल एक योग नहीं है, बल्कि एक पूर्ण वैज्ञानिक श्वसन व्यायाम है। अगर आप अपनी दिनचर्या में इसे शामिल करते हैं, तो आप न केवल फेफड़ों को मजबूत बना सकते हैं, बल्कि उम्र बढ़ने के साथ होने वाली सांस की तकलीफों को भी टाल सकते हैं। आज से ही अपनी सुबह की शुरुआत प्राणायाम से करें।
स्रोत और संदर्भ
Effect of Pranayama on Pulmonary Functions
नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योग गुरु से संपर्क कर सकते हैं। गर्भावस्था में योग को लेकर डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
प्राणायाम केवल एक योग नहीं है, बल्कि एक पूर्ण वैज्ञानिक श्वसन व्यायाम है। अगर आप अपनी दिनचर्या में इसे शामिल करते हैं, तो आप न केवल फेफड़ों को मजबूत बना सकते हैं, बल्कि उम्र बढ़ने के साथ होने वाली सांस की तकलीफों को भी टाल सकते हैं। आज से ही अपनी सुबह की शुरुआत प्राणायाम से करें।
स्रोत और संदर्भ
Effect of Pranayama on Pulmonary Functions
नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योग गुरु से संपर्क कर सकते हैं। गर्भावस्था में योग को लेकर डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।