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लड़का हो या लड़की, नजर आएं ये लक्षण तो बिल्कुल न शरमाएं...वरना जिंदगी बर्बाद समझो
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 22 Apr 2018 03:52 PM IST
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लड़की हो या लड़की, अगर ये लक्षण नजर आ जाएं तो बिल्कुल भी शर्म न करें। अगर ऐसा किया तो जिंदगी बर्बाद हो जाएगी आपकी।
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अब आंखों के कैंसर होने पर रोशनी नहीं गंवानी पड़ेगी। इस गंभीर बीमारी का इलाज जीएमसीएच सेक्टर-32 में उपलब्ध है। अब तक 12 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। इनमें दो से तीन मरीजों का इलाज ब्रेकीथैरेपी और अन्य का लेजर और रेडियोथैरेपी से किया गया है। बताया जा रहा है कि आंखों के कैंसर के बारे में मरीजों को पता नहीं है। इस वजह से देरी होती है और रोशनी गंवानी पड़ती है।
eyes cancer
जीएमसीएच के ऑप्थेलमोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी प्रो. सुदेश आर्या ने बताया कि आंखों के कैंसर का सही समय पर इलाज नहीं मिलने से आंखों की रोशनी जा सकती है। यह काफी गंभीर बीमारी है, लेकिन लोगों को इस बारे में जागरूकता नहीं है। इस वजह से इलाज संभव नहीं हो पाता। अब इसका इलाज जीएमसीएच में भी उपलब्ध है, जो अन्य संस्थानों के मुकाबले काफी सस्ता है।
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कितना खतरनाक है आंखों का कैंसर
यह कैंसर दस हजार में से एक बच्चे को होता है। 2 साल की उम्र में ही रेटिना कैंसर सामने आ जाता है।, कैंसर के मरीज की आंखों की पुतली का हिस्सा सफेद हो जाता है। बीमारी आगे बढ़ने पर आंख बाहर निकलने लगती हैं। बीमारी गंभीर होने पर ब्रेन और हड्डियों का कैंसर होने का खतरा रहता है। आखिरी चरण में आंखों की रोशनी भी जा सकती है।
यह कैंसर दस हजार में से एक बच्चे को होता है। 2 साल की उम्र में ही रेटिना कैंसर सामने आ जाता है।, कैंसर के मरीज की आंखों की पुतली का हिस्सा सफेद हो जाता है। बीमारी आगे बढ़ने पर आंख बाहर निकलने लगती हैं। बीमारी गंभीर होने पर ब्रेन और हड्डियों का कैंसर होने का खतरा रहता है। आखिरी चरण में आंखों की रोशनी भी जा सकती है।
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आंखों के कैंसर के लक्षण
आंख की पुतली का सफेद हो जाना (ल्यूकोकोरिया), आंखों से तिरछा देखना (भेंगापन), मोतियाबिंद के कारण आंखों में दर्द होना (बहुत कम मामलों में), आंखों की दोनों पुतलियों के रंग में अंतर होना, एक आंख से धुंधला दिखाई देना, आंख की पुतली के रंग का बदलना या इस पर काला धब्बा पड़ना, आंख का लाल होना या आंख में दर्द होना, या फिर दोनों, आंख में उभार आना, आंखों की रोशनी लगातार कमजोर होना।
आंख की पुतली का सफेद हो जाना (ल्यूकोकोरिया), आंखों से तिरछा देखना (भेंगापन), मोतियाबिंद के कारण आंखों में दर्द होना (बहुत कम मामलों में), आंखों की दोनों पुतलियों के रंग में अंतर होना, एक आंख से धुंधला दिखाई देना, आंख की पुतली के रंग का बदलना या इस पर काला धब्बा पड़ना, आंख का लाल होना या आंख में दर्द होना, या फिर दोनों, आंख में उभार आना, आंखों की रोशनी लगातार कमजोर होना।