Kids Anger Problem Yoga: आज के बच्चे उम्र से पहले ही बड़े हो रहे हैं। उनका बर्ताव अब बच्चों जैसा न रहकर चिड़चिड़ा, गुस्सैल होता जा रहा है। इसका कारण है उनके आसपास का माहौल। मोबाइल स्क्रीन, ऑनलाइन क्लास, लगातार तुलना, पढ़ाई का दबाव और खेलने के लिए घटती खुली जगहों के कारण बच्चों में छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा, बात-बात पर चिड़चिड़ापन और बेचैनी देखने को मिलती है। माता-पिता अक्सर इसे उम्र का असर या जिद कहकर टाल देते हैं, लेकिन इसे अनदेखा करना बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
Kids Anger Problem Yoga: बच्चों में गुस्सा क्यों बढ़ रहा है? योग कैसे बन सकता है सबसे आसान समाधान
Kids Anger Problem Yoga: अगर आपका बच्चा गुस्सैल हैं या चिड़चिड़ा बर्ताव करता है तो योग से उसके व्यवहार में बदलाव लाया जा सकता है। आइए जानते हैं कैसे योग बच्चे के मन के तनाव और चिंता को कम कर एकाग्रता बढ़ाता है।
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग का असर
ताड़ासन और वृक्षासन
ताड़ासन और वृक्षासन योगासन बच्चे को एकाग्रता और संतुलन सिखाते हैं। इन आसनों से शरीर स्थिर होता है और मन का भटकाव कम होता है। पढ़ाई में ध्यान बढ़ता है और बेचैनी घटती है।
भुजंगासन
इस आसन से दबा हुआ तनाव बाहर निकालता है। इससे सीने का विस्तार होता है, सांस गहरी होती है। गुस्सा और घबराहट धीरे-धीरे कम होने लगती है।
बालासन
बालासन का अभ्यास चिड़चिड़े मन को शांति देता है। यह आसन बच्चों के नर्वस सिस्टम को शांत करता है और भावनात्मक संतुलन लाता है।
अनुलोम-विलोम और भ्रामरी
अनुलोम विलोम और भ्रामरी प्राणायाम गुस्से पर सीधा असर डालते हैं। सांस पर काम करने से बच्चों का मूड संतुलित होता है, नींद बेहतर आती है और चिल्लाने की आदत घटती है।
-----------------------------
नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योग गुरु से संपर्क कर सकते हैं। गर्भावस्था में योग को लेकर डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।