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इन अफसर ने साइबर अपराधियों पर कसा था कानूनी शिकंजा, फेसबुक फ्रेंड बनकर नाइजीरियन ठग को दबोचा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 09 Apr 2019 04:39 PM IST
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दिनेश यादव
- फोटो : amar ujala
लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इनमें दिनेश यादव की अलग पहचान थी। उन्होंने साइबर क्राइम के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।
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पीपीएस अधिकारी दिनेश यादव को साइबर एक्सपर्ट के रूप में जाना जाता है। वर्ष 2012 में राजधानी के सबसे महत्वपूर्ण व संवेदनशील हजरतगंज सर्किल में बतौर क्षेत्राधिकारी तैनात हुए दिनेश यादव ने 2008 से मृतप्राय पड़ी साइबर सेल को न सिर्फ नया जीवन दिया, बल्कि साइबर अपराधों के पंजीकरण और कार्रवाई की दिशा में नए आयाम स्थापित किए। तत्कालीन डीजी एसी शर्मा से मिलकर 2012 में ही उन्होंने हजरतगंज कोतवाली में महज 13 लाख रुपये से छोटे-छोटे संसाधन जुटाकर साइबर सेल की शुरुआत कराई।
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- फोटो : अमर उजाला
इसकी तर्ज पर प्रदेश के सभी जनपदों में साइबर क्राइम सेल की शुरुआत हुई। उनके कार्यकाल में ही साइबर सेल की टीम ने फेसबुक फ्रेंड बनकर ठगी करने वाले नाइजीरियन ठग जेम्स इलोडूबा को दबोचा था। इसके बाद देश-विदेश के कई ठगों को सलाखों के पीछे पहुंचाया और सैकड़ों के खातों से निकले रुपये वापस कराए। उन्होंने ई-मेल, फेसबुक व सोशल मीडिया के जरिये होने वाले अपराध, एटीएम कार्ड के फ्रॉड, कार्ड क्लोनिंग की ठगी, हैकिंग पर सराहनीय काम किया। दिनेश यादव के ही प्रयासों से उत्तर प्रदेश में देश के किसी भी प्रदेश से अधिक साइबर अपराध दर्ज होते हैं और सबसे ज्यादा कार्रवाई की जाती है।
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हिंदी में लिखीं दो किताबों से गुर सीख रही पुलिस
साइबर अपराध पर किताबें और लिखित सामग्री में अंग्रेजी का एकाधिकार तोड़कर दिनेश यादव ने हिंदी में सामग्री उपलब्ध कराई। पुलिस महकमे में सिपाही, दरोगा से लेकर निरीक्षक तक अंग्रेजी के जानकार नहीं हैं। इससे साइबर अपराधों की विवेचना में समस्या आती है। इसे दूर करने को उन्होंने कंप्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी व साइबर अपराधों की विवेचना विषय पर दो किताबें लिखीं। ये अब पुलिस ट्रेनिंग का हिस्सा बन चुकी हैं। उन्हें पढ़कर पुलिसकर्मी साइबर अपराध पर काबू पा रहे हैं।
साइबर अपराध पर किताबें और लिखित सामग्री में अंग्रेजी का एकाधिकार तोड़कर दिनेश यादव ने हिंदी में सामग्री उपलब्ध कराई। पुलिस महकमे में सिपाही, दरोगा से लेकर निरीक्षक तक अंग्रेजी के जानकार नहीं हैं। इससे साइबर अपराधों की विवेचना में समस्या आती है। इसे दूर करने को उन्होंने कंप्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी व साइबर अपराधों की विवेचना विषय पर दो किताबें लिखीं। ये अब पुलिस ट्रेनिंग का हिस्सा बन चुकी हैं। उन्हें पढ़कर पुलिसकर्मी साइबर अपराध पर काबू पा रहे हैं।
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स्कूलों में चलाया जागरूकता अभियान
साइबर अपराधी का सबसे बड़ा हथियार आम जनता में जागरूकता की कमी और पुलिस महकमे में प्रशिक्षण की व्यवस्था न होना थी। दिनेश यादव ने इस समस्या को दूर करते हुए स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम चालू कराए। साथ ही समय-समय पर पुलिस महकमेे में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए। इससे लोग साइबर अपराध का शिकार होने से बचे।
साइबर अपराधी का सबसे बड़ा हथियार आम जनता में जागरूकता की कमी और पुलिस महकमे में प्रशिक्षण की व्यवस्था न होना थी। दिनेश यादव ने इस समस्या को दूर करते हुए स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम चालू कराए। साथ ही समय-समय पर पुलिस महकमेे में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए। इससे लोग साइबर अपराध का शिकार होने से बचे।