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तस्वीरें: अयोध्या में सरयू में पूर्णिमा स्नान के लिए भक्तों का लगा है तांता, जानें- पवित्र नदियों में स्नान का शास्त्रीय महत्व
Mon, 30 Nov 2020 11:29 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 30 Nov 2020 11:29 AM IST
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कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान करते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
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अयोध्या में कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर सोमवार को सरयू स्नान शुरू हुआ। कार्तिक भर अयोध्या में रहकर कल्पवास करने वालों का अनुष्ठान पूरा हुआ। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जिला प्रशासन ने बाहरी श्रद्धालुओं को अयोध्या में आने की अनुमति नहीं दी है। अयोध्या के स्थानीय श्रद्धालुओं और कल्पवासी ही सरयू नदी में स्न्नान कर रहे हैं।
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पूर्णिमा स्नान के लिए बाहरी श्रद्धालुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाते हुए रामनगरी की सीमा सील कर दी गई है। बिना आईडी जांच के किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। रविवार को कार्तिक पूर्णिमा दोपहर 12:33 बजे लग गई है जो 30 नवंबर की दोपहर 2.16 बजे तक रहेगी। कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु देशभर के अयोध्या पहुंचते हैं और पवित्र सरयू नदी में स्नान करके रामलला का दर्शन करते हैं। हर साल यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचकर सरयू नदी में डुबकी लगाते हैं, लेकिन इस बार कोरोना महामारी की वजह से बाहरी लोगों के अयोध्या में प्रवेश पर रोक लगाई गई है। इसके लिए अयोध्या के प्रवेश मार्ग पर बैरियर लगाकर सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
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कोरोना को देखते हुए प्रशासन हर तरह का एहतियात बरत रहा है। केवल स्थानीय श्रद्धालुओं-भक्तों को ही सरयू स्नान की अनुमति दी है। श्रद्धालु मास्क पहनकर अयोध्या की सड़कों पर धार्मिक कार्य करेंगे और अयोध्या के धार्मिक स्थल मठ-मंदिरों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
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कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान का है शास्त्रीय महत्व
हिंदू धर्म में कार्तिक मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दीपदान करने का शास्त्रीय महत्व बताया गया है। इसी मान्यता के चलते अयोध्या में पूर्णिमा तिथि पर स्नान के लिए देश के कोने-कोने से लाखों भक्त अयोध्या पहुंचते हैं। कार्तिक पूर्णिमा का महत्व महाभारत से भी जुड़ा है। कथा के अनुसार जब कौरवों और पांडवों के बीच महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ तब पांडव इस बात को लेकर बहुत ही परेशान और दुखी हुए कि युद्ध में उनके कई सगे- संबंधियों की मृत्यु हो गई। असमय मृत्यु के कारण वे सोचने लगे कि इनकी आत्मा को शांति कैसे मिलेगी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों की चिंता को दूर करने के लिए कार्तिक शुक्लपक्ष की अष्टमी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए तर्पण और दीपदान करने को कहा था। तभी से कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान और पितरों को तर्पण देने के लिए इस तिथि का महत्व होता है। पुराणों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा की तिथि पर ही भगवान विष्णु ने धर्म, वेदों की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था। कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही सिख धर्म के पहले गुरु, गुरु नानकदेव का जन्म हुआ था। इस कारण से भी हिंदू और सिख धर्म के अनुयायी कार्तिक पूर्णिमा को प्रकाश उत्सव के रूप मनाते हैं।
हिंदू धर्म में कार्तिक मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दीपदान करने का शास्त्रीय महत्व बताया गया है। इसी मान्यता के चलते अयोध्या में पूर्णिमा तिथि पर स्नान के लिए देश के कोने-कोने से लाखों भक्त अयोध्या पहुंचते हैं। कार्तिक पूर्णिमा का महत्व महाभारत से भी जुड़ा है। कथा के अनुसार जब कौरवों और पांडवों के बीच महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ तब पांडव इस बात को लेकर बहुत ही परेशान और दुखी हुए कि युद्ध में उनके कई सगे- संबंधियों की मृत्यु हो गई। असमय मृत्यु के कारण वे सोचने लगे कि इनकी आत्मा को शांति कैसे मिलेगी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों की चिंता को दूर करने के लिए कार्तिक शुक्लपक्ष की अष्टमी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए तर्पण और दीपदान करने को कहा था। तभी से कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान और पितरों को तर्पण देने के लिए इस तिथि का महत्व होता है। पुराणों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा की तिथि पर ही भगवान विष्णु ने धर्म, वेदों की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था। कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही सिख धर्म के पहले गुरु, गुरु नानकदेव का जन्म हुआ था। इस कारण से भी हिंदू और सिख धर्म के अनुयायी कार्तिक पूर्णिमा को प्रकाश उत्सव के रूप मनाते हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
एटीएस ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था
अयोध्या में सुरक्षा की दृष्टि से कड़े इंतजाम किए गए हैं। कार्तिक पूर्णिमा मेला की सुरक्षा को एटीएस के हवाले किया गया है। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है। एडिशनल एसपी के साथ एक मजिस्ट्रेट भी मौके पर तैनात हैं। अयोध्या मेले के सुरक्षा अधिकारी एसपी सिटी विजयपाल सिंह का कहना है कि कार्तिक मेले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। कार्तिक पूर्णिमा में सरयू नदी स्नान के लिए स्थानीय लोगों पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन बाहरी व्यक्तियों के अयोध्या आने पर प्रतिबंध है। इसके लिए बैरियर लगाकर सीमाओं पर चेकिंग की जा रही है। उनकी आईडी को चेक किया जा रहा है। 30 नवंबर की शाम तक अयोध्या की सीमाओं को सील रखा जाएगा, उसके बाद सामान्य कर दिया जाएगा।
अयोध्या में सुरक्षा की दृष्टि से कड़े इंतजाम किए गए हैं। कार्तिक पूर्णिमा मेला की सुरक्षा को एटीएस के हवाले किया गया है। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है। एडिशनल एसपी के साथ एक मजिस्ट्रेट भी मौके पर तैनात हैं। अयोध्या मेले के सुरक्षा अधिकारी एसपी सिटी विजयपाल सिंह का कहना है कि कार्तिक मेले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। कार्तिक पूर्णिमा में सरयू नदी स्नान के लिए स्थानीय लोगों पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन बाहरी व्यक्तियों के अयोध्या आने पर प्रतिबंध है। इसके लिए बैरियर लगाकर सीमाओं पर चेकिंग की जा रही है। उनकी आईडी को चेक किया जा रहा है। 30 नवंबर की शाम तक अयोध्या की सीमाओं को सील रखा जाएगा, उसके बाद सामान्य कर दिया जाएगा।