आज जनजातीय गौरव दिवस है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मध्यप्रदेश के दौरे पर रहेंगी। पेसा कानून को लागू करने की घोषणा भी इसी दौरान की जाएगी।
जनजातीय गौरव दिवस विशेष: पेसा कानून लागू करने की आज घोषणा करेगी सरकार, तस्वीरों में देखें CM के अलग अंदाज
आज जनजातीय गौरव दिवस है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मध्यप्रदेश के दौरे पर रहेंगी। पेसा कानून को लागू करने की घोषणा भी इसी दौरान की जाएगी।
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प्रदेश में समरसता के साथ पेसा कानून को प्रभावी क्रियान्वयन भी प्रारंभ कर दिया गया है। प्रदेश भर में जनजातीय विद्यार्थियों के लिए आश्रम, छात्रावास, शालाएँ, कन्या शिक्षा परिसर संचालित किए जा रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रशिक्षण के लिए अनेक तरह की प्रोत्साहन योजना संचालित हो रही हैं। स्व-रोजगार हेतु कौशल विकास के केन्द्र भी संचालित किये जा रहे हैं। जनजातीय विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी राज्य सरकार द्वारा छात्रवृत्ति दी जाती है। अलग-अलग जिलों में बालक-बालिकाओं के लिए क्रीड़ा परिसर भी बनाए गए हैं। प्रदेश में अनुसूचित जनजाति साहूकार विनियम 1972 को अब और प्रभावी बनाया गया है। साहूकारों द्वारा वसूले जाने वाले ब्याज की दरों को भी अब नियंत्रित किया गया है। निर्धारित दर से अधिक ब्याज वसूलने वाले साहूकारों को कड़ा दण्ड दिया जा रहा है।
जनजातीय लोगों ने प्रदेश में जंगलों को बचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। पेसा एक्ट ग्राम सभा को सामुदायिक संसाधनों की सुरक्षा और संरक्षण का अधिकार देता है। वन भी सामुदायिक संसाधन है। इस कारण पेसा एक्ट वनों की सुरक्षा और संरक्षण का भी अधिकार ग्राम सभा को देता है। राज्य सरकार इस एक्ट के अंतर्गत सामुदायिक वन प्रबंधन समितियों के गठन की जिम्मेदारी ग्राम सभा दी है। राज्य सरकार ने पंचायती राज व्यवस्था की पांचवीं अनुसूची के क्रियान्वयन में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए पेसा ग्राम सभाओं के का गठन किया। ग्राम सभाएं अपने स्थानीय विकास के लिये स्वयं योजनाएँ बना रही हैं और वनोपज के अधिकार मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति और बेहतर हुई है। पेसा ग्राम पंचायतों में गैर जनजातीय वर्ग के अधिकारों को भी संरक्षित रखा जा रहा है ।
साहूकारों के शोषण से मुक्ति
मध्यप्रदेश की प्रमुख जनजातियों में भील, भिलाला, बारेला, गोंड, कोल, कोरकू, सहरिया भारिया, बैगा, सोर, पटेलिया, मवासी, पनिका, कंवर, हल्बी, मुंडा, खरिया हैं। प्रमुख जनजाति बोलियाँ भीली, भिलाली, बारेली, गोंडी, मवासी, कोरकू आदि हैं। मध्यप्रदेश में जनजातियों के प्रमुख जननायक टंट्या भील, भीमा नायक, ख्वाजा नायक, संग्राम सिंह, शंकर शाह, रघुनाथ शाह, रानी दुर्गावती, बादल भोई, राजा भभूत सिंह, रघुनाथ मंडलोई भिलाला, राजा ढिल्लन शाह गोंड, राजा गंगाधर गोंड, सरदार विष्णु सिंह उईके आदि हुए हैं, जिनकी गौरव गाथाएं आज भी जन-जन की जुबान पर हैं। इन सभी जनजातीय नायकों को समुचित सम्मान राज्य शासन की ओर से प्रदान किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति साहूकार विनियम 1972 को अब और प्रभावी बनाया गया है। जनजातीय क्षेत्रों में साहूकारी का धंधा करने वालों के लिए पंजीयन शुल्क में वृद्धि की गई है। साहूकारों द्वारा वसूले जाने वाले ब्याज की दरों को भी अब नियंत्रित किया गया है। निर्धारित दर से अधिक ब्याज वसूलने वाले साहूकारों को कड़ा दण्ड दिया जाएगा।
जन-जन की जुबान पर जनजातीय नायकों की गाथाएं
