मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में दक्षिण अफ्रीका से आए 12 चीतों का जोरदार स्वागत हुआ। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और वनमंत्री भूपेंद्र सिंह ने सभी चीतों को क्वारंटीन बाड़ों में रिलीज किया है। इन्हें मिलाकर कूनो में चीतों की संख्या 20 हो चुकी है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाबिमिया से आए आठ चीतों को 17 सितंबर 2022 को क्वारंटीन बाड़ों में छोड़ा था।
{"_id":"63f0a9495900e83d2b01cf63","slug":"kuno-national-park-12-more-cheetahs-came-to-kuno-now-20-south-african-team-will-monitor-2023-02-18","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Kuno National Park: कूनो आए 12 और चीते, अब हो गए 20, दक्षिण अफ्रीकी टीम करेगी निगरानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kuno National Park: कूनो आए 12 और चीते, अब हो गए 20, दक्षिण अफ्रीकी टीम करेगी निगरानी
Sat, 18 Feb 2023 04:02 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर/श्योपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर/श्योपुर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Sat, 18 Feb 2023 04:02 PM IST
सार
Kuno National Park: प्रोजेक्ट चीता के तहत 12 और चीते कूनो नेशनल पार्क पहुंच गए हैं। दक्षिण अफ्रीका से लाए गए इन चीतों को एक महीने के लिए क्वारंटीन बाड़ों में रखा जाएगा। इनकी निगरानी दक्षिण अफ्रीका से आई टीम रखेगी। वह रिपोर्ट भी बनाएगी।
विज्ञापन
प्रोजेक्ट चीता के तहत कूनो में दक्षिण अफ्रीका से लाए चीतों को छोड़ा गया।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कूनो नेशनल पार्क पहुंचे चीते
- फोटो : सोशल मीडिया
एक महीना रखा जाएगा क्वारंटीन
कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से आठ चीते लाए गए थे। अब दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते आए हैं। इन 12 चीतों को फिलहाल एक महीने तक क्वारंटीन रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें भैंसे का मांस खिलाया जाएगा। यह किसी भी जानवर का दुनिया का पहला इंटर-कॉन्टिनेंटल रीहैबिलिटेशन प्रोजेक्ट है। इस वजह से प्रोसीजर के तहत एक महीने तक चीतों पर नजर रखी जाती है, ताकि वह नए माहौल में रच-बस सके। नामीबिया से आए चीतों को एक-एक कर क्वारंटीन बाड़ों से बड़े बाड़ों में छोड़ा गया था।
दक्षिण अफ्रीकी टीम रखेगी चीतों पर नजर
दक्षिण अफ्रीका से आए 12 चीतों की निगरानी के लिए दक्षिण अफ्रीका से विशेषज्ञों की चार सदस्यीय टीम आई है। वह चीतों के कूनो के माहौल में पूरी तरह घुलने-मिलने तक यहीं पर रहेगी और निगरानी करेगी। उनकी डे-टू-डे रिपोर्ट बनाई जाएगी। प्रोजेक्ट चीता के तहत बने टास्क फोर्स के साथ मिलकर काम करेगी। सुरक्षा की दृष्टि से देखा जाए तो कूनो नेशनल पार्क में सीसीटीवी कैमरे से लेकर डॉग स्क्वॉड की टीम और रिटायर्ड सैनिको को भी तैनात किया गया है। चीतों को तेंदुओं और बाघों से सुरक्षित रखने के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।
कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से आठ चीते लाए गए थे। अब दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते आए हैं। इन 12 चीतों को फिलहाल एक महीने तक क्वारंटीन रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें भैंसे का मांस खिलाया जाएगा। यह किसी भी जानवर का दुनिया का पहला इंटर-कॉन्टिनेंटल रीहैबिलिटेशन प्रोजेक्ट है। इस वजह से प्रोसीजर के तहत एक महीने तक चीतों पर नजर रखी जाती है, ताकि वह नए माहौल में रच-बस सके। नामीबिया से आए चीतों को एक-एक कर क्वारंटीन बाड़ों से बड़े बाड़ों में छोड़ा गया था।
दक्षिण अफ्रीकी टीम रखेगी चीतों पर नजर
दक्षिण अफ्रीका से आए 12 चीतों की निगरानी के लिए दक्षिण अफ्रीका से विशेषज्ञों की चार सदस्यीय टीम आई है। वह चीतों के कूनो के माहौल में पूरी तरह घुलने-मिलने तक यहीं पर रहेगी और निगरानी करेगी। उनकी डे-टू-डे रिपोर्ट बनाई जाएगी। प्रोजेक्ट चीता के तहत बने टास्क फोर्स के साथ मिलकर काम करेगी। सुरक्षा की दृष्टि से देखा जाए तो कूनो नेशनल पार्क में सीसीटीवी कैमरे से लेकर डॉग स्क्वॉड की टीम और रिटायर्ड सैनिको को भी तैनात किया गया है। चीतों को तेंदुओं और बाघों से सुरक्षित रखने के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।
इस तरह लाए गए हैं दक्षिण अफ्रीका से चीते।
- फोटो : अमर उजाला
15 घंटे का सफर तय किया है चीतों ने
दक्षिण अफ्रीका से यह चीते 17 फरवरी की रात आठ बजे रवाना हुए थे। 15 घंटे का सफर तय कर एयरफोर्स का विशेष विमान सी-ग्लोबमास्टर ग्वालियर के पास हिंडन एयरबेस पहुंचा। वहां चीतों की प्राथमिक जांच की गई। वहां से हेलीकॉप्टर में चीतों को कूनो नेशनल पार्क लाया गया। यहां पर इन्हें क्वारंटीन बाड़ों में छोड़ा गया। प्रोजेक्ट चीता के तहत अगले आठ से दस साल सालाना 12 चीतों को देश में लाया जाएगा। हर पांच साल में प्रोजेक्ट की समीक्षा होगी।
52 साल पहले विलुप्त हुए थे चीते
भारत में 52 साल पहले चीते विलुप्त हो गए थे। इन्हें पुनर्स्थापित करने की योजना पर लंबे अरसे से काम चल रहा था। सितंबर में नामीबिया से आठ चीते आए थे। इनमें तीन मेल और पांच फीमेल चीते थे। इस बार दक्षिण अफ्रीका से जो 12 चीते आए हैं, उनमें सात मेल और पांच फीमेल हैं।
दक्षिण अफ्रीका से यह चीते 17 फरवरी की रात आठ बजे रवाना हुए थे। 15 घंटे का सफर तय कर एयरफोर्स का विशेष विमान सी-ग्लोबमास्टर ग्वालियर के पास हिंडन एयरबेस पहुंचा। वहां चीतों की प्राथमिक जांच की गई। वहां से हेलीकॉप्टर में चीतों को कूनो नेशनल पार्क लाया गया। यहां पर इन्हें क्वारंटीन बाड़ों में छोड़ा गया। प्रोजेक्ट चीता के तहत अगले आठ से दस साल सालाना 12 चीतों को देश में लाया जाएगा। हर पांच साल में प्रोजेक्ट की समीक्षा होगी।
52 साल पहले विलुप्त हुए थे चीते
भारत में 52 साल पहले चीते विलुप्त हो गए थे। इन्हें पुनर्स्थापित करने की योजना पर लंबे अरसे से काम चल रहा था। सितंबर में नामीबिया से आठ चीते आए थे। इनमें तीन मेल और पांच फीमेल चीते थे। इस बार दक्षिण अफ्रीका से जो 12 चीते आए हैं, उनमें सात मेल और पांच फीमेल हैं।
