फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

MP News: एयरफोर्स बेस पर राफेल की राह रोक रहीं नीलगाय, अफ्रीकन बोमा तकनीक से पकड़ने की तैयारी

Sat, 07 Jan 2023 02:39 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर Published by: रवींद्र भजनी Updated Sat, 07 Jan 2023 02:39 PM IST
सार

ग्वालियर के एयरफोर्स बेस पर इन दिनों नीलगायों ने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। राफेल और मिराज जैसे लड़ाकू विमानों को उड़ाने में भी दिक्कत आ रही है। अब इन नीलगायों को अफ्रीकन बोमा तकनीक से पकड़ने की तैयारी है। 

विज्ञापन
MP News: Nilgai blocking Rafale's path at Airforce base, preparing to catch it with African boma technique
ग्वालियर एयरबेस के पास 200 से ज्यादा नीलगायों का एक झुंड परेशानी का सबब बन गया है। - फोटो : अमर उजाला

नीलगायों की वजह से पूरे देश में किसान परेशान हैं। नीलगाय किसानों की खड़ी फसल बर्वाद कर उन्हें परेशान करती हैं। इस बार ग्वालियर की नीलगायों के आतंक की चर्चा रक्षा मंत्रालय में भी हो रही है। दरअसल, देश के सबसे बड़े एयरफोर्स बेस ग्वालियर के महाराजपुरा इलाके में नीलगायों ने नाक में दम कर रखा है। इस बेस पर राफेल से लेकर हर तरह के अत्याधुनिक फाइटर प्लेन प्रशिक्षण उड़ान भरते हैं। इसके आसपास लगभग दो सौ से ज्यादा नीलगाय हैं, जिनकी वजह से फाइटर प्लेन के संचालन में खलल पड़ रही है। अब इन नीलगायों को काबू करने के लिए सरकार पहली बार बोमा तकनीक का इस्तेमाल करने की तैयारी में है। इस तकनीक से रणनीतिक ढंग से एक बाडा बनाकर इन्हें पकड़ा जाता है। 


 


MP News: Nilgai blocking Rafale's path at Airforce base, preparing to catch it with African boma technique
ग्वालियर एयरबेस - फोटो : अमर उजाला

करोड़ों रुपये की फसल बर्बाद हो रही है 
नीलगायों ने समूचे उत्तर भारत में आतंक मचा रखा है। उनके झुंड मध्यप्रदेश में भी करोड़ों रुपये की खड़ी फसल उजाड़कर चले जाते हैं। अनेक बार यह समस्या विधानसभा में भी चर्चा का विषय बन चुकी है। इस बार नीलगायों ने देश की सुरक्षा के लिए तैनात लड़ाकू विमानों की उड़ानों में खलल डाला है। ग्वालियर के महाराजपुरा बेस में राफेल समेत सभी अत्याधुनिक फाइटर प्लेन उड़ान भरते हैं। लड़ाकू विमानों के हैंगर से नियमित अभ्यास उड़ानों में नीलगायों के झुंड खलल डालते हैं। यह नीलगाय हवाई पट्टी तक आ जाती हैं, जिनसे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। एक बार तो दुर्घटना हो चुकी है। इस समस्या को लेकर भारतीय रक्षा मंत्रालय ने मध्यप्रदेश सरकार से सहयोग मांगा है। यह क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील होने के कारण वन विभाग ने इसके लिए बोमा तकनीक का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव भेजा है। इससे नीलगाय को पकड़ा जा सकता है। पहले इन्हें मारने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन संवेदनशीलता के चलते इसे मंजूरी नहीं मिली तो पकड़ने पर विचार शुरू हुआ।

फिलहाल पत्र व्यवहार चल रहा है 
ग्वालियर डीएफओ विजेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि अभी इस मामले को लेकर पत्र व्यवहार चल रहा है। विशेषज्ञों के साथ सीसीएफ और डीएफओ के नेतृत्व में टीम स्थल निरीक्षण कर चुकी है। प्रोजेक्ट भी बन चुका है। सरकार से मंजूरी मिलते ही विशेषज्ञ बोमा हैबिटेट बनाने का काम शुरू हो जाएगा। श्रीवास्तव ने बताया कि बोमा तकनीक का इस्तेमाल खेत या खुली जगह में नहीं किया जा सकता क्योंकि यह खर्चीली है। सीमित हिस्से में ही हैबिटेट की अधोसंरचना तैयार की जा सकती है। इसके लिए बाडा बनाना पड़ता है जो बड़े खुले भूभाग पर बनाना संभव नहीं है।
 

MP News: Nilgai blocking Rafale's path at Airforce base, preparing to catch it with African boma technique
ग्वालियर में नीलगाय परेशानी का सबब बन गई है। - फोटो : अमर उजाला
क्या है बोमा हैबिटेट 
जंगली जानवरों और पशुओं को पकड़ने की यह तकनीक दक्षिण अफ्रीका में उपयोग की जाती है। इससे जानवरों को जीते-जी पकड़ने की कोशिश होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि नीलगाय को पकड़ने के लिए एक स्थान को चयनित किया जाएगा। वहां हैबिटेट तैयार किया जाएगा। वहां नमक बिछाया जाता और अन्य ऐसे केमिकल डाले जाते हैं जिनकी गंध नीलगाय को आकर्षित करती है। जब उस क्षेत्र में नीलगायों के बड़े झुंड पहुंच जाते हैं तो इसे एक बाड़े में तब्दील कर गेट लगा दिया जाता है। खास तरह से खुले हुए ट्रक लगे होते हैं। जैसे ही नीलगाय उस ट्रक में घुसती है, वैसे ही वह कैद हो जाती है।

नीलगाय को पकड़ना और मारना मुश्किल
नीलगाय को सबसे फुर्तीला और मजबूत देहयष्टि वाला जानवर माना जाता है। इसे पकड़ना या मारना बहुत मुश्किल होता है। इसकी वजह उसकी देह ही है। वह इतनी छलांग लगाते हुए भागती है कि गोली का निशाना भी चूक जाता है। यह घोड़े के आकार की होती है लेकिन इसका पीछे का हिस्सा आगे के हिस्से से छोटा होता है, इसलिए यह दौड़ते समय अलग नजर आती है। निशाना भी चूक जाता है। इसका वजन भी काफी होता है। हर नीलगाय औसतन डेढ़ सौ से ढाई सौ किलो तक वजन की होती है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed