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MP BJP: इंदौर नगर-जिला अध्यक्ष के नामों पर मंत्रियों की नहीं चली? गौरव क्यों पिछड़े, जानें इसके पीछे की सियासत

Dinesh Sharma दिनेश शर्मा
Updated Fri, 31 Jan 2025 04:01 AM IST
सार

इंदौर में भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा और जिला अध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा की नियुक्ति हो गई है। इसके बाद सियासी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। यहां पढ़ें क्या कुछ कह रही है इंदौर की राजनीति

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MP BJP: Ministers did not follow the names of Indore city-district president? Why Gaurav lagged behind
इंदौर में भाजपा नगर अध्यक्ष को लेकर मची खींचतान खत्म हो गई है। - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश में भाजपा के जिला अध्यक्षों की घोषणा हो चुकी है। प्रदेश में सबसे चर्चित इंदौर में पदाधिकारियों की घोषणा के बाद अलग-अलग चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कहा जा रहा है कि इंदौर लगातार अलग तरह की सियासत का गढ़ बनता जा रहा है। आइए जानते हैं इन सब चर्चाओं से इंदौर का सियासी रंग कैसे बदलता दिख रहा है। 


गुरुवार को लंबे इंतजार के बाद भाजपा नगर अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष के नामों की घोषणा हो गई। पहले बताया जा रहा था कि दो मंत्रियों के दबाव के कारण नाम घोषित नहीं हो पा रहे हैं, दोनों अपने-अपने समर्थकों के नाम आगे बढ़ा रहे थे। हालांकि अब नगर अध्यक्ष पद पर सुमित मिश्रा का नाम घोषित हुआ है। जिला अध्यक्ष पर श्रवण सिंह चावड़ा का नाम सामने आया है। दोनों को विजयवर्गीय गुट का माना जा रहा है।  

तो क्या विजयवर्गीय की चली
चर्चाओं में कहा जा रहा है कि नगर अध्यक्ष पद पर कैलाश विजयवर्गीय दीपक जैन टीनू के नाम को आगे बढ़ा रहे थे, पर विधायक रमेश मेंदोला और गोलू शुक्ला ने सुमित मिश्रा के नाम को आगे बढ़ाया था। कैलाश विजयवर्गीय जिलाध्यक्ष के लिए चिंटू वर्मा को रिपीट कराना चाहते थे। हालांकि श्रवण सिंह चावड़ा भी विजयवर्गीय से जुड़े रहे हैं, विधानसभा चुनाव के समय देपालपुर विधानसभा से उन्होंने चावड़ा के नाम को आगे भी बढ़ाया था। कुल मिलाकर देखा जाए तो विजयवर्गीय गुट का पलड़ा भारी रहा है।

 
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इंदौर भाजपा नगर अध्यक्ष बने सुमित मिश्रा - फोटो : अमर उजाला
तो क्या कैलाश का दबदबा कम करने की प्लानिंग
शहर के कुछ लोगों का कहना है कि इस बार नगर अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष के जो नाम सामने आए हैं, उनका नाम कैलाश विजयवर्गीय नहीं चाहते थे। कैलाश जिन नामों को आगे बढ़ा रहे थे, उन्हें संगठन ने जिम्मेदारी नहीं दी। कहा तो ये भी जा रहा है कि रमेश मेंदोला के नामों को मंजूरी देकर कैलाश विजयवर्गीय का दबदबा कम करने का काम किया गया है। 

सिंधिया गुट का संगठन चुनावों में दखल 
नगर अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष के नामों में मंत्री तुलसी सिलावट की भी नहीं चली। हालांकि संगठन चुनावों में पहली बार है जब सिंधिया गुट ने इसमें दखल दिया हो। कहा जाता है कि सिलावट यानी सिंधिया। 2019 में भाजपा के सरकार बनाने के लिए सिंधिया ने अहम भूमिका निभाई थी, तब उनकी लगभग हर बात प्रदेश संगठन ने मानी थी, पर इस बार के चुनावों के बाद उनका जादू कम होता दिखा है। बताते हैं कि इंदौर जिला अध्यक्ष के नामों में तुलसी सिलावट ने भी अपनी पसंद का नाम आगे बढ़ाया था। सिलावट अंतर दयाल को जिला अध्यक्ष पद दिलाना चाहते थे। दयाल को विधायक उषा ठाकुर, मनोज पटेल का समर्थन था, और विशाल पटेल की भी इस नाम पर सहमति थी। हालांकि संगठन ने श्रवण सिंह चावड़ा को जिम्मेदारी देकर इस पर विराम लगा दिया। लेकिन संगठन चुनावों में सिंधिया गुट की दखलंदाजी भी चर्चा में है। 


 
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MP BJP: Ministers did not follow the names of Indore city-district president? Why Gaurav lagged behind
इंदौर भाजपा जिला अध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा ने माल्यार्पण किया। - फोटो : अमर उजाला
रणदिवे इसलिए नहीं हो सके रिपीट
बता दें कि वर्तमान नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे का कार्यकाल सफल माना जा रहा है। उनके अध्यक्ष रहते इंदौर भाजपा का नाम देशभर में चर्चित हुआ है। बता दें कि लोकसभा चुनाव में देशभर में सबसे बड़ी जीत इंदौर की थी। इंदौर में ही उनके कार्यकाल में देशभर में सबसे ज्यादा भाजपा के सदस्य बने थे। उनके अध्यक्ष रहते इंदौर भाजपा ने सभी नौ सीटें जीती हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने शहर की तीन विधानसभाओं से दावेदारी की थी। उन्होंने तीन नंबर, राऊ और पांच नंबर से दावेदारी की थी। बताया जा रहा है कि नगर अध्यक्ष की रायशुमारी में विधायकों ने उनके नाम को तरजीह नहीं दी थी। इसलिए रणदिवे इतने बेहतरीन कार्यकाल के बावजूद रिपीट नहीं हो सके। 

कौन हैं नगर अध्यक्ष बने सुमित मिश्रा
नगर अध्यक्ष बने सुमित मिश्रा कुशल वक्ता हैं। वे पहले नगर उपाध्यक्ष रह चुके हैं। प्रदेश प्रवक्ता (पैनलिस्ट) भी रहे हैं। वे अक्सर रमेश मेंदोला के साथ देखे जाते रहे हैं। कैलाश विजयवर्गीय भी उन्हें पसंद करते हैं। मनोज पटेल के साथ भी उनकी काफी नजदीकी रही है। जीतू जिराती से उनकी अच्छी मित्रता है। कुल मिलाकर शहर की राजनीति में वे जाना-पहचाना नाम हैं। 

पहले भी चौंका चुकी है इंदौर की सियासत 
इंदौर में चौंकाने वाली सियासत पहले भी होती रही है। बीते लोकसभा चुनावों में इंदौर में कांग्रेस के प्रत्याशी को नाम वापसी के आखिरी दिन भाजपा में शामिल करा लिया गया था। देशभर में इसकी चर्चा रही थी। हालांकि ये अलग बात है कि भाजपा के कुछ लोग भी इसके विरोध में रहे थे। उस समय भी कैलाश विजयवर्गीय ही इस घटना के केंद्र बिंदू माने गए थे। 
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