{"_id":"62264e3f7021123ebb47260b","slug":"international-women-s-day-10-players-from-madhya-pradesh-who-gave-a-new-identity-to-the-heart-of-the-country","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस : मध्य प्रदेश की 10 स्पोर्ट्स वूमेन, जिन्होंने देश के दिल को दी नई पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस : मध्य प्रदेश की 10 स्पोर्ट्स वूमेन, जिन्होंने देश के दिल को दी नई पहचान
Tue, 08 Mar 2022 11:30 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Tue, 08 Mar 2022 11:30 AM IST
सार
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस : मध्य प्रदेश की 10 खिलाड़ी, जिसने देश के दिल को दी नई पहचान
विज्ञापन
मध्य प्रदेश की स्पोर्ट्स वूमेन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चाहे जंग का मैदान हो या खेल की पिच, देश चलाना हो या घर महिलाएं आज किसी भी काम में पीछे नहीं है। हर क्षेत्र में बुलंदी हासिल कर वे विश्वभर में अपनी जीत का परचम लहरा रही हैं। आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हम आपको मध्य प्रदेश की 10 महिला खिलाड़ियों से मिलवाते हैं, जिन्होंने न सिर्फ प्रदेश को बल्कि देश को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
शूटर बांधवी सिंह
- फोटो : सोशल मीडिया
जिज्ञासा राजपूत
जिन्हें लगता है बॉक्सिंग महिलाओं का काम नहीं है, उनकी इस सोच को राजधानी भोपाल की जिज्ञासा ने बदल दिया। करीब 7 राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर जिज्ञासा ने साबित कर दिया कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में जीत का परचम लहरा सकती हैं। नेशनल और स्टेट लेवल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में अब तक जिज्ञासा 3 गोल्ड, 2 सिल्वर, 1 ब्रांज मेडल जीत चुकी हैं। बीते दिनों उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में भारत की चुनौती पेश की थी।
अपने कोच के साथ बॉक्सर जिज्ञासा राजपूत
- फोटो : अमर उजाला
कावेरी ढीमर
इंदिरा सागर बांध के बैकवॉटर में अपने पिता के साथ मिलकर मछली पकड़ने का काम करने वाली कावेरी आज एमपी की गोल्डन गर्ल के रूप में जानी जाती हैं। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की रहने वाली कावेरी ने कायाकिंग कैनोइंग में अपने श्रेष्ठ प्रदर्शन के दम पर 17 गोल्ड और 5 सिल्वर मेडल अपने नाम किए हैं। सिर्फ 19 साल की उम्र में नेशनल और स्टेट लेवल की चैंपियनशिप में दमदार प्रदर्शन कर कावेरी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। कावेरी इतनी प्रतिभावान खिलाड़ी हैं जिन्होंने जूनियर रहते हुए सीनियर कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अपने कोच के साथ कावेरी
- फोटो : अमर उजाला
गौरांशी शर्मा
भोपाल की रहने वाली दिव्यांग खिलाड़ी गौरांशी शर्मा सुन और बोल नहीं पाती लेकिन जब बैडमिंटन कोर्ट में उनका रैकेट बोलता है तो लोग चुप हो जाते हैं। गौरांशी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 5 रजत और 1 कांस्य जीत चुकी हैं। वहीं, गौरांशी को मध्य प्रदेश सरकार 2020 में एकलव्य पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी हैं। गौरांशी उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल हैं जो अपनी कमियों से हार मान लेते हैं और रूक जाते हैं। गौरांशी अंतरराष्ट्रीय पदक भी अपने नाम कर चुकी हैं वहीं, चीन के ताइपे में वर्ल्ड डीफ बैडमिंटन चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं। जमशेदपुर में जूनियर व सब जूनियर नेशनल एथलेटिक्स गेम्स ऑफ द डीफ में गौरांशी ने कांस्य पदक हासिल किया था, भोपाल में आयोजित नेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप में चौथा स्थान प्राप्त किया था। गौरांशी करीब 12 स्टेट लेवल टूर्नामेंट खेल चुकी हैं।
विज्ञापन
बैडमिंटन प्लेयर गौरांशी शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
प्राची यादव
मध्य प्रदेश के ग्वालियर की प्राची यादव पैरालंपिक में कैनोइंग के फाइनल में पहुंचने वाली पहली महिला खिलाड़ी हैं। बचपन से ही दिव्यांग प्राची पहले स्वीमिंग किया करती थी, लेकिन उनके लंबे हाथों को देखकर कोच ने उन्हें कैनोइंग और कायाकिंग में भाग लेने के लिए कहा। कोच की सलाह पर प्राची ने गेम बदला और वे इसमें सफल हुईं। प्राची ने सात साल की उम्र में अपनी मां को खो दिया था। ये वही साल था जब प्राची को जूनियर खेलने का मौका मिला और प्राची ने चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। उस जीत के बाद प्राची रूकी नहीं। उन्होंने 2018 में भोपाल के छोटे तालाब में प्रैक्टिस शुरू की और कठिन परिश्रम के परिणामस्वरूप 2019 में उन्होंने नेशनल में एक गोल्ड और एक सिल्वर जीता। वहीं अगस्त 2019 में हंगरी में पैरालंपिक क्वालीफाइंग टूर्नामेंट के कैनोइंग इवेंट में 8वीं पोजिशन हासिल की।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर की प्राची यादव पैरालंपिक में कैनोइंग के फाइनल में पहुंचने वाली पहली महिला खिलाड़ी हैं। बचपन से ही दिव्यांग प्राची पहले स्वीमिंग किया करती थी, लेकिन उनके लंबे हाथों को देखकर कोच ने उन्हें कैनोइंग और कायाकिंग में भाग लेने के लिए कहा। कोच की सलाह पर प्राची ने गेम बदला और वे इसमें सफल हुईं। प्राची ने सात साल की उम्र में अपनी मां को खो दिया था। ये वही साल था जब प्राची को जूनियर खेलने का मौका मिला और प्राची ने चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। उस जीत के बाद प्राची रूकी नहीं। उन्होंने 2018 में भोपाल के छोटे तालाब में प्रैक्टिस शुरू की और कठिन परिश्रम के परिणामस्वरूप 2019 में उन्होंने नेशनल में एक गोल्ड और एक सिल्वर जीता। वहीं अगस्त 2019 में हंगरी में पैरालंपिक क्वालीफाइंग टूर्नामेंट के कैनोइंग इवेंट में 8वीं पोजिशन हासिल की।
