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मध्य प्रदेश: मालवा-निमाड़ में शिव मंदिरों में नंदी की मूर्ति के दूध-पानी पीने की अफवाह, भक्तों की उमड़ी भीड़
Sat, 05 Mar 2022 04:28 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खंडवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खंडवा
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sat, 05 Mar 2022 04:28 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ इलाके में आज सुबह से मंदिरों में दूध लेकर श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कारण बताया जा रहा है कि शिव मंदिरों में स्थापित नंदी जी दूध पी रहे हैं। खंडवा जिले से शुरू हुई ये खबर पूरे मालवा-निमाड़ में आग की तरह फैल गई। इंदौर, देवास, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर आदि जगह के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ पहुंच रही है।
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मध्य प्रदेश के कई जिलों में नंदी के दूध-पानी पीने की खबरें आ रही हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ इलाके में आज सुबह से मंदिरों में दूध लेकर श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कारण बताया जा रहा है कि शिव मंदिरों में स्थापित नंदी जी दूध पी रहे हैं। खंडवा जिले से शुरू हुई ये खबर पूरे मालवा-निमाड़ में आग की तरह फैल गई। इंदौर, देवास, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर आदि जगह के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ पहुंच रही है।
इंदौर में भी शिव मंदिरों में भीड़ उमड़ पड़ी।
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल खंडवा जिले की एक महिला सुबह-सुबह मंदिर पहुंची थी। पूजा के दौरान उसे लगा कि नंदी पानी पी रहे हैं। उसने चम्मच से पानी पिलाकर देखा, फिर दूध पिलाकर देखा। चम्मच खाली होने से वह अंचभित रह गई। उसने ग्रामीणों को बताया कि शिव मंदिर में स्थापित नंदी जी की मूर्ति दूध पी रही है। यह खबर सुनते ही गांव के दर्जनों लोग कटोरी में दूध लेकर इकट्ठा हो गए। सबने बारी-बारी से चम्मच से भरा दूध मूर्ति के मुख के सामने लगाया, और दावा किया कि मूर्ति दूध पी रही है।
यह अफवाह कुछ ही देर में काफी दूर तक फैल गई। कई जिलों में स्थित शिव मंदिर पर भी लोग पहुंच गए, और वहां भी दूध पिलाने लगे। जानकारों ने कहा कि ये आस्था का विषय है, कुछ लोगों को ऐसा लगा होगा कि नंदी दूध पी रहे हैं पर ऐसा है नहीं।
यह अफवाह कुछ ही देर में काफी दूर तक फैल गई। कई जिलों में स्थित शिव मंदिर पर भी लोग पहुंच गए, और वहां भी दूध पिलाने लगे। जानकारों ने कहा कि ये आस्था का विषय है, कुछ लोगों को ऐसा लगा होगा कि नंदी दूध पी रहे हैं पर ऐसा है नहीं।
देवास के मंदिरों में लोग पानी-दूध लेकर पहुंच गए।
- फोटो : अमर उजाला
इंदौर में धार रोड स्थित हरिओम नगर क्षेत्र में शिव मंदिर में नंदी के पानी पीने की बात शुरू हुई। तीन दशक पूर्व गणेश जी के दुग्ध पीने के बाद आज शहर भर के शिवालय में नंदी के पानी पीने की अफवाह से शिव मंदिर में नंदी को चम्मच से पानी पिलाने महिलाओं का तांता लग गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
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खबर मिलते ही लोग मंदिरों में उमड़ने लगे।
- फोटो : अमर उजाला
सीहोर के अनेक शिव मंदिरों में दूध पिलाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। रफीकगंज मंदिर के सुनील सिंह ने बताया कि शनिवार की सुबह एक भक्त ने जैसे ही नंदी के सामने पानी रखा वह गायब हो गया। इसकी सूचना उसने मंदिर के पुजारी को दी। शहर के अनेक शिव मंदिरों में भगवान नंदीश्वर को दूध और पानी पिलाने के समाचार मिले। लोगों ने बताया कि शनिवार की सुबह इंदौर में किसी शिव मंदिर में नंदीश्वर भगवान द्वारा दूध और पानी पीने की जानकारी मिली थी। इसके बाद से ही सीहोर में भी भगवान नंदीश्वर को दूध और पानी पिलाने का सिलसिला शुरू हो गया। महिलाओं ने बताया कि कई मंदिरों में ऐसा हो रहा है, नंदी के सामने चम्मच भर कर पानी रखने से धीरे-धीरे गायब हो रहा है।
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कई लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं तो कई लोग इसे लोगों की आस्था बता रहे हैं।
- फोटो : अमर उजाला
जानकारों का कहना है मूर्ति का दूध-पानी पीना संभन नहीं है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है, बाइनरी थ्योरम लागू होता है। पृष्ठतनाव के कारण संगमरमर या पत्थर की मूर्तियों या फिर फर्श या दीवार के भीतर पतली दरार पड़ जाती है जिससे कभी-कभी दूध या पानी भीतर जाता है। मूर्ति दूध पीती नहीं है। जगह मिलते ही वहां किसी न किसी हिस्सा से बाहर निकलने लगता है।
नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने एक प्रयोग के जरिये किसी भी मूर्ति द्वारा दूध या पानी पीने की घटना की व्याख्या करते हुए बताया कि कोई भी प्रतिमा दूध नहीं पीती है। बल्कि द्रव्यों की गति, पृष्ठ तनाव, आसंजन और संबंद्धता जैसे भौतिक गुणों के कारण ऐसा प्रतीत होता है।
पृष्ठ तनाव यानी सरफेस टेंशन द्रव्यों का वह गुण है जिससे वह अपने क्षेत्रफल को कम से कम बनाए रखने का प्रयास करता है। द्रव्यों के अंतरआणविक बल से उत्पन्न इस तनाव के कारण द्रव्य की ऊपरी परत इलास्टिक शीट की तरह व्यवहार करती है। अगर किसी बंद किए नल की टोंटी से टपकती बूंद को स्पर्श किया जाये तो वह सरक कर हाथ में आ जाती है। इसी प्रकार जब दूध से भरे चम्मच को किसी बाहर की ओर निकली आकृति वाली मूर्ति से स्पर्श किया जाता है तो दूध का पृष्ठ तनाव द्रव्य को ऊपर की ओर चम्मच से बाहर खींचता है। खिंचने के बाद गुरुत्वाकर्षण के कारण यह दूध मूर्ति से नीचे की ओर सरक जाता है। आस्था के कारण नीचे जाते दूध पर ध्यान नहीं जाता है।
नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने एक प्रयोग के जरिये किसी भी मूर्ति द्वारा दूध या पानी पीने की घटना की व्याख्या करते हुए बताया कि कोई भी प्रतिमा दूध नहीं पीती है। बल्कि द्रव्यों की गति, पृष्ठ तनाव, आसंजन और संबंद्धता जैसे भौतिक गुणों के कारण ऐसा प्रतीत होता है।
पृष्ठ तनाव यानी सरफेस टेंशन द्रव्यों का वह गुण है जिससे वह अपने क्षेत्रफल को कम से कम बनाए रखने का प्रयास करता है। द्रव्यों के अंतरआणविक बल से उत्पन्न इस तनाव के कारण द्रव्य की ऊपरी परत इलास्टिक शीट की तरह व्यवहार करती है। अगर किसी बंद किए नल की टोंटी से टपकती बूंद को स्पर्श किया जाये तो वह सरक कर हाथ में आ जाती है। इसी प्रकार जब दूध से भरे चम्मच को किसी बाहर की ओर निकली आकृति वाली मूर्ति से स्पर्श किया जाता है तो दूध का पृष्ठ तनाव द्रव्य को ऊपर की ओर चम्मच से बाहर खींचता है। खिंचने के बाद गुरुत्वाकर्षण के कारण यह दूध मूर्ति से नीचे की ओर सरक जाता है। आस्था के कारण नीचे जाते दूध पर ध्यान नहीं जाता है।
