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मैहर में मंदिर कर्मचारी का अद्भुत कारनामा: हाथ के औजारों से बनाई नारियल के खोल की अनोखी कलाकृतियां, देखें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैहर Published by: शबाहत हुसैन Updated Fri, 08 Aug 2025 02:51 PM IST
सार

MP: मंदिर परिसर में प्रतिदिन भारी संख्या में नारियल तोड़े जाने से काफी मात्रा में कचरा इकट्ठा हो जाता है। मंदिर कर्मचारी इसकी सफाई करते हैं, लेकिन अशोक इस बेकार सामग्री का उपयोग कर उन्हें खूबसूरत कलाकृतियों में बदल देते हैं।

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Maihar Temple Worker Creates Unique Coconut Shell Art with Hand Tools, Promotes Eco-Conservation
कलाकृति - फोटो : अमर उजाला

मां शारदा प्रबंधन समिति, मैहर में पदस्थ प्रोटोकॉल कर्मचारी अशोक विश्वकर्मा अपनी अनोखी कला के कारण इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। बीते 35 वर्षों से वे नारियल के खोल से आकर्षक और उपयोगी कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं, वह भी बिना किसी मशीन के। लगातार कई वर्षों से वे इन कलाकृतियों में नए-नए डिजाइन और तरीके अपनाकर उन्हें और सुंदर बना रहे हैं।

मां शारदा देवी मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए नारियल पूजन के बाद तोड़ दिए जाते हैं। आमतौर पर इन्हें बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, लेकिन अशोक विश्वकर्मा इन्हीं खोलों को नया जीवन देते हैं। वे नारियल के खोल से कप, केतली, कटोरी, गुलदस्ते, शोपीस और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं बनाते हैं। इन हस्तनिर्मित कलाकृतियों को लोग न केवल पसंद कर रहे हैं, बल्कि उनकी जमकर सराहना भी कर रहे हैं।

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Maihar Temple Worker Creates Unique Coconut Shell Art with Hand Tools, Promotes Eco-Conservation
कलाकृति - फोटो : अमर उजाला

अशोक बिना किसी मशीन के काम करते हैं। वे केवल हाथ से काम करने वाले औजार जैसे आरी, ब्लेड, रेतमार कागज और एरालडाइट की सहायता से इन्हें आकार देते हैं। इन कलाकृतियों की खासियत है कि ये पूरी तरह हस्तनिर्मित होती हैं और साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती हैं।

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कचरे से कला और पर्यावरण संरक्षण
मंदिर परिसर में प्रतिदिन भारी संख्या में नारियल तोड़े जाने से काफी मात्रा में कचरा इकट्ठा हो जाता है। मंदिर कर्मचारी इसकी सफाई करते हैं, लेकिन अशोक इस बेकार सामग्री का उपयोग कर उन्हें खूबसूरत कलाकृतियों में बदल देते हैं। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है, बल्कि लोगों में जागरूकता भी फैल रही है कि फेंकी जाने वाली वस्तुएं भी रचनात्मकता से उपयोगी बन सकती हैं।

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Maihar Temple Worker Creates Unique Coconut Shell Art with Hand Tools, Promotes Eco-Conservation
कलाकृति - फोटो : अमर उजाला

निःस्वार्थ सेवा भाव
अशोक का कहना है कि वे इन वस्तुओं को बेचते नहीं हैं। जो कलाकृतियां वे अपने उपयोग से अधिक बनाते हैं, उन्हें तोहफे के रूप में लोगों को भेंट कर देते हैं। उनका यह निःस्वार्थ भाव समाज में रचनात्मकता, सेवा और पर्यावरणीय चेतना का संदेश फैला रहा है।

स्थानीय लोग उन्हें प्रेरणास्रोत मानते हैं। अशोक का कहना है कि यदि कोई उनकी यह कला सीखना चाहे तो वे खुशी-खुशी सिखाने को तैयार हैं। उनका मानना है कि इससे न केवल मैहर का नाम रोशन होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयास भी मजबूत होंगे।

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