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Maihar News: रेस्क्यू के बाद भी नहीं बचा बाघ शावक, मुकुंदपुर सफारी में उपचार के दौरान हुई मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैहर
Published by: मैहर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Apr 2026 09:11 PM IST
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सार
मुकुंदपुर सफारी में गंभीर रूप से घायल बाघ शावक की इलाज के दौरान मौत हो गई। रेस्क्यू के बाद विशेषज्ञों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा था, लेकिन हालत में सुधार नहीं हो सका।
गंभीर रूप से घायल शावक की मौत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिले के महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव व्हाइट टाइगर सफारी एंड जू मुकुंदपुर से दुखद खबर सामने आई है। यहां गंभीर रूप से घायल बाघ शावक की उपचार के दौरान मौत हो गई। यह शावक 19 अप्रैल 2026 को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला वनपरिक्षेत्र की भद्रशिला बीट से रेस्क्यू कर लाया गया था।
वन विभाग की टीम ने सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर करीब 6 माह के नर शावक को रेस्क्यू किया था। प्राथमिक जांच में सामने आया कि शावक बुरी तरह घायल था। उसके दोनों पैरों में गहरी चोट के साथ ही पीठ, पेट और शरीर के अन्य हिस्सों पर दांतों के गहरे निशान थे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि शावक पर किसी वयस्क जंगली जानवर, संभवतः बाघ ने हमला किया था।
रेस्क्यू के बाद शावक को तुरंत मुकुंदपुर सफारी लाया गया, जहां वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की टीम ने उपचार शुरू किया। लगातार मॉनिटरिंग, संक्रमण रोकने और आंतरिक चोटों के इलाज के प्रयास किए गए, लेकिन गंभीर चोटों और आंतरिक रक्तस्राव के चलते 21 अप्रैल सुबह करीब 6:05 बजे शावक की मौत हो गई।
ये भी पढ़ें: Narmadapuram: शादी की खुशियां मातम में बदलीं, खाने के विवाद में चाकूबाजी; दो की मौत, आरक्षक पर भी हमला
मृत्यु के बाद डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया और आवश्यक जैविक सैंपल जांच के लिए सुरक्षित किए गए। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में शावक का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मुख्य वन संरक्षक रीवा राजेश कुमार राय और वनमंडलाधिकारी मैहर विद्याभूषण मिश्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
वन विभाग अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है। जांच में यह देखा जा रहा है कि हमला किन परिस्थितियों में हुआ, क्या यह क्षेत्रीय संघर्ष का मामला था और शावक अपनी मां से अलग कैसे हुआ।
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वन विभाग की टीम ने सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर करीब 6 माह के नर शावक को रेस्क्यू किया था। प्राथमिक जांच में सामने आया कि शावक बुरी तरह घायल था। उसके दोनों पैरों में गहरी चोट के साथ ही पीठ, पेट और शरीर के अन्य हिस्सों पर दांतों के गहरे निशान थे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि शावक पर किसी वयस्क जंगली जानवर, संभवतः बाघ ने हमला किया था।
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रेस्क्यू के बाद शावक को तुरंत मुकुंदपुर सफारी लाया गया, जहां वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की टीम ने उपचार शुरू किया। लगातार मॉनिटरिंग, संक्रमण रोकने और आंतरिक चोटों के इलाज के प्रयास किए गए, लेकिन गंभीर चोटों और आंतरिक रक्तस्राव के चलते 21 अप्रैल सुबह करीब 6:05 बजे शावक की मौत हो गई।
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मृत्यु के बाद डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया और आवश्यक जैविक सैंपल जांच के लिए सुरक्षित किए गए। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में शावक का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मुख्य वन संरक्षक रीवा राजेश कुमार राय और वनमंडलाधिकारी मैहर विद्याभूषण मिश्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
वन विभाग अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है। जांच में यह देखा जा रहा है कि हमला किन परिस्थितियों में हुआ, क्या यह क्षेत्रीय संघर्ष का मामला था और शावक अपनी मां से अलग कैसे हुआ।

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