मंदसौर शहर में स्थित नालछा माता का मंदिर मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध माता मंदिरों में शुमार है। कहा तो ये भी जाता है कि पूरे विश्व में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां बाबा भैरव और भवानी एक ही गादी पर विराजमान है। बताया जाता है कि भगवान श्रीराम के पिता राजा दशरथ के द्वारा स्थापित की गई नालछा माता की प्रतिमा सुबह से लेकर रात तक तीन रूप धारण करती है, जिसमें पहली बाल्यवस्था, दूसरी युवावस्था और तीसरी वृद्धावस्था शामिल है। मां नालछा को मंदसौर की आराध्य देवी भी माना जाता है। यहां दोनो ही नवरात्रि में धार्मिक आयोजन होते हैं, जिसमें जिले सहित प्रदेश व देश के कई श्रद्धालु शामिल होते है।
मंदसौर नगर सहित जिले की आस्था का केंद्र मां नालछा का यह मंदिर भगवान पशुपतिनाथ के मंदिर के बाद नगर का दूसरा सबसे बड़ा आस्था का केंद्र है। नवरात्र शुरू होते ही यहां बड़ी संख्या में भक्तों का पहुंचना शुरू हो गए हैं। नवरात्रि पर माता के दरबार को आकर्षक रूप से सजाया गया है। नवरात्रि के नौ दिनों तक भव्य रूप से मां की आराधना भक्तों द्वारा की जाती है। पंचमी को माता का सोने-चांदी के जेवर से शृंगार किया जाता है। इसके दर्शन दशहरे तक होते हैं। मां नालछा के नाम पर ही गांव का नाम भी नालछा पड़ गया है।
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मंदसौर के नालछा मंदिर की काफी प्रसिद्धि है।
- फोटो : अमर उजाला
नवरात्रि में उगने वाले जवारे से लगाया जाता है बारिश का अनुमान
नालछा माता मंदिर के पुजारी संजय शर्मा ने बताया कि जिले के किसानों के लिए भी मां नालछा वरदान हैं। मां के दरबार में किसान अपनी फसल से पहले पूरे साल के मौसम का रुख जानने आते हैं। नवरात्रि की घटस्थापना के साथ यहां ज्वारे रोपे जाते है। कलश में उगे ज्वारे से पूरे साल का अनुमान लगाया जाता है। जैसे ज्वारे सीधे हो तो साल बहुत अच्छा निकलेगा और छोटे मुरझाए हुए हो तो साल में मौसम मिला-जुला रहेगा। वहीं ज्वारे का नहीं उगना सूखे पड़ने को दशार्ता है। ज्वारे आधे उगना खंड वर्षा की स्थिति को दशार्ता है। इस तरह यहां किसान बारिश पूरे साल के मौसम के स्थिति का पूवानुर्मान लगा लेते हैं।
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माता और भैरव की एक साथ स्थापित प्रतिमा मंदसौर में है।
- फोटो : अमर उजाला
यहां गोद भराई से गूंज उठती है किलकारियों की गूंज
नालछा माता के दरबार में गोद भराई की रस्म की जाती है। बताया जाता है कि जिन महिलाओं की गोद सूनी है और उन्हें बच्चे नहीं हो रहे हैं तो यहां गोद भराई होने से उनके सूने आंचल में किलकारियों की गूंज सुनाई देने लगती है।
चूल व कन्या पूजन का होता है आयोजन
नालछा माता मंदिर परिसर में दशहरे पर बाड़ी विसर्जन के साथ चूल का आयोजन होता है जिसमें बड़ी संख्या में भक्त दहकते अंगारों से निकलते हैं। वंही शारदीय नवरात्रि में जय माता दी ग्रुप द्वारा कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है। चैत्र नवरात्रि में समिति द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है जिसमें करीब 20-25 हजार भक्त प्रसादी ग्रहण करते हैं।
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