मंदसौर में बारिश के बाद नदी नाले उफान पर हैं। इन सबके बाद अब कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो की सरकारी सिस्टम पर कई सवाल खड़े करती हैं। जहां एक ओर पुलिया के अभाव में जिंदगी की अंतिम राह भी मुश्किल भरी हो गई है तो वहीं दूसरी ओर ग्रामीण जुगाड़ का पुल बनाकर नाला पार करने को मजबूर हैं।
2 of 4
जुगाड़ पुल से नाला पार करती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
पहली तस्वीर मंंदसौर जिले के दलौदा तहसील के मजेसरा नई आबादी गांव की है। जहां दिवंगत के अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीणों को मुक्तिधाम तक जाने के लिए सोमली नदी को पार करना पड़ता है। पुलिया या रपट नहीं होने से लोग नदी में उतरकर मुक्तिधाम तक जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, हर साल मानसून से यह परेशानी शुरू हो जाती है, जो नदी में पानी होने तक रहती है।
3 of 4
जुगाड़ पुल से आता हुआ आदमी
- फोटो : अमर उजाला
नदी उफान पर होने के कारण कई बार अंतिम संस्कार के लिए घंटों इंतजार भी करना पड़ता है। यह मुक्तिधाम सीधे पहुंचने का रास्ता है, जो कि गांव से महज 500 मीटर दूर है। वहीं, घूमकर जाने पर रास्ते की दूरी दो किमी से ज्यादा हो जाती है। लिहाजा लोग ज्यादातर इसी शार्टकट मार्ग का उपयोग करते हैं और इस मार्ग को सुगम करने की सालों से मांग भी कर रहे हैं।
4 of 4
मुक्तिधाम जाते हुए लोग
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, दूसरी तस्वीर जिले के ही शामगढ़ तहसील के सागोरिया गांव की है। यहां जब एक नाला लोगों के खेतों की राह में मुश्किल बना और सरकार ने मदद नहीं की तो अपने निजी खर्च से लोगों ने लकड़ी से जुगाड़ का पुल बना लिया। अब ग्रामीण इसी जुगाड़ के पुल पर चलकर सगोरिया और चांदखेड़ी गांव तक का सफर तय कर रहे हैं।
अब सवाल यह है कि क्या यह सही है? तस्वीरो में देखा जा सकता है, जुगाड़ के पुल के नीचे नाला बह रहा है और नाले में पानी का उफान है। ऐसे में कभी भी किसी बड़े हादसे का शिकार यहां लोग हो सकते हें। बताया जा रहा है, ग्रामीणों ने कई बार नाले पर पुल बनाने की मांग नेताओं और अधिकारियों से की। स्वयं सासंद विधायक भी इस पुल से गुजर चुके हैं। बावजूद किसी ने नहीं सुनी। ऐसे में ग्रामीण जुगाड़ का यह पुल बनाकर जान पर जोखिम ले रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि इसके अलावा अगर सड़क मार्ग का सहारा लेते हैं तो 15-20 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है।
कमेंट
कमेंट X