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Omkareshwar Hundreds of hectares of crops were submerged due to blocked drainage, forcing a road blockade.
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बारिश ने बिगाड़ी किसानों की मेहनत: जल निकासी रोकने से सैकड़ों हेक्टेयर की फसलें जलमग्न, करना पड़ा चक्काजाम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 31 Jul 2026 09:39 PM IST
सार
ओंकारेश्वर–भोगांवा मार्ग किनारे प्राकृतिक जल निकासी बाधित होने से भारी बारिश में सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई, जिससे सोयाबीन, मक्का और कपास की फसलें नष्ट हो गईं। किसानों ने चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। बाद में जेसीबी से पानी निकाला गया, लेकिन तब तक फसलें बर्बाद हो चुकी थीं।
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ओंकारेश्वर : खेतों में भरा पानी
- फोटो : अमर उजाला
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ओंकारेश्वर–कोठी–भोगांवा–सनावद मार्ग के किनारे स्थित सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई, जिससे सोयाबीन, मक्का और कपास की फसलें बर्बाद हो गईं। किसानों का आरोप है कि एक निजी कॉलोनी विकसित करते समय प्राकृतिक जल निकासी मार्ग को बंद कर दिया गया। लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की। जब खेत पूरी तरह पानी में डूब गए और किसानों ने सड़क पर चक्काजाम किया, तब प्रशासन हरकत में आया और जेसीबी से रास्ता खोलकर पानी निकाला गया। लेकिन तब तक किसानों की फसलें पूरी तरह चौपट हो चुकी थीं।
आक्रोशित किसानों ने कहा कि उन्होंने कई बार खंडवा कलेक्टर सहित संबंधित अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें दी थीं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि प्राकृतिक जल निकासी का मार्ग बंद किया गया तो बरसात में भारी नुकसान होगा। इसके बावजूद न तो निर्माण कार्य रोका गया और न ही जल निकासी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। शुक्रवार को भारी बारिश के बाद मोरगंगा नदी का बैक वाटर खेतों में भर गया। देखते ही देखते सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूब गई। खेत तालाब में बदल गए और किसानों के सामने अपनी मेहनत डूबती देखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
मजबूर होकर किसानों ने ओंकारेश्वर–भोगांवा मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। सड़क जाम होने के बाद प्रशासन मौके पर पहुंचा। नायब तहसीलदार उदय मंडलोई के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और तत्काल जेसीबी मशीन बुलाकर कॉलोनी के सामने डाले गए मलबे और अवरोध को हटाया गया। इसके बाद पानी की निकासी शुरू हुई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। भोगांव के कृषक देवेंद्र पटेल अनेक किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन पहले कार्रवाई करता तो इतनी बड़ी क्षति नहीं होती।
ग्रामीणों के अनुसार मोरगंगा नदी वर्षों से इसी प्राकृतिक मार्ग से बहती हुई सड़क की पुलिया के नीचे से निकलती रही है। पहले नहर निर्माण के दौरान भी पर्याप्त पुलिया के स्थान पर छोटे-छोटे पाइप डाल दिए गए थे, जिससे बरसात के समय पानी की निकासी प्रभावित होती थी। कई बार पाइपों में मिट्टी और कचरा भर जाने से भी खेतों में पानी भर चुका है। शिकायतों के बाद पाइपों की सफाई तो कर दी गई, लेकिन मूल समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
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प्रशासन ने चक्काजाम के बाद जेसीबी के बाद पानी की निकासी कराई।
- फोटो : अमर उजाला
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब नई कॉलोनी विकसित करते समय चारों ओर बाउंड्री वॉल बनाकर प्राकृतिक जल निकासी का मार्ग लगभग पूरी तरह बंद कर दिया गया। परिणामस्वरूप मोरगंगा नदी का पानी वापस किसानों के खेतों की ओर फैल गया और सैकड़ों हेक्टेयर भूमि जलमग्न हो गई। किसानों का कहना है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी बर्बाद हुई फसलों की भरपाई कौन करेगा जिन अधिकारियों ने शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं की, क्या उनकी जवाबदेही तय होगी क्या कॉलोनी विकसित करने वाले पर प्राकृतिक जल निकासी बाधित करने के लिए कार्रवाई होगी किसानों ने फसल नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
तहसीलदार उदय मंडलोई बताया कि पहले भी पानी रुकता था, अत्यधिक बरसात होने के कारण जल भराव की स्थिति बनी है। तुरंत जेसीबी लगाकर पानी को निकाला गया है। कॉलोनी कॉलोनी नाइजर दिनेश नारोल ने कहा कि जल भराव की समस्या अनेक वर्षों से बनी हुई है। हमने भी पाइप डाले थे, लेकिन अत्यधिक बरसात होने के कारण लोगों के खेतों में पानी भर गया है।
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