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Janmashtami 2022: शाजापुर में विदेशी नोटों से सजता है श्रीकृष्ण का दरबार
Fri, 19 Aug 2022 10:12 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शाजापुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शाजापुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 19 Aug 2022 10:12 PM IST
सार
Janmashtami 2022: शाजापुर में विदेशी नोटों से सजता है श्रीकृष्ण का दरबार
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शाजापुर में नोटों से सजता है कृष्णजी का दरबार
- फोटो : सोशल मीडिया
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शाजापुर के वजीरपुरा स्थित खंजाची मंदिर पर पर विदेशी नोटों से भगवान श्री कृष्ण का दरबार सजाया जाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि श्रीराम जानकी के इस मंदिर में जन्माष्टमी पर्व धूमधाम से मनाया जाता है और भगवान श्रीराम को कृष्ण व माता जानकी का राधा स्वरूप में शृंगार किया गया। वहीं भगवान लक्ष्मण जी के सखा के रूप में दर्शन हुए। मंदिर की यह अनूठी परंपरा यहां के आयोजन को खास बनाती है और जिले के साथ ही दूर-दूर से लोग यहां दर्शन-पूजन के लिए जन्माष्टमी पर आते हैं। यहां भगवान के दरबार को भारतीय नोट सहित विदेशी मुद्राओं से सजाया जाता है।
श्रीराम जानकी के मंदिर में जन्माष्टमी पर्व धूमधाम से मनाया जाता है
- फोटो : सोशल मीडिया
साल में एक बार जन्माष्टमी पर पर होने वाले अनूठे शृंगार और सजावट को एक नजर निहारने के लिए हजारों लोग मंदिर पर पहुंचते हैं। मंदिर के पंडित सीताराम तिवारी ने बताया कि मंदिर परिसर को डॉलर, रियाल सहित अन्य देशों की मुद्राओं से सजाया गया है। यहां प्रभुश्री के दर्शन करने आए भक्तों को साज-सज्जा भी खूब भाती है। तिवारी बताते हैं कि मंदिर परिसर में फूलों व विद्युत से भी आकर्षक साज सज्जा की जाती है। भगवान के दरबार में एक रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक के नोट लगाए जाते हैं।
जन्माष्टमी पर सजावट में उपयोग किए गए रुपये, डॉलर, नेपाल, भूटान सहित अन्य विदेशी मुद्राओं को मिलाकर करीब ढाई से तीन लाख रुपये की राशि उपयोग की जाती है। यह परंपरा पुजारी पं. तिवारी के पिता दुर्गाशंकर तिवारी द्वारा करीब 52 साल पहले प्रारंभ की गई थी, जो अब तक जारी है। खजांची मंदिर में मूर्तियां सप्त धातु से निर्मित हैं, मूर्तियां सुंदर और आकर्षक हैं। भक्त कई बार इन्हें निहारते ही रहते हैं।
जन्माष्टमी पर सजावट में उपयोग किए गए रुपये, डॉलर, नेपाल, भूटान सहित अन्य विदेशी मुद्राओं को मिलाकर करीब ढाई से तीन लाख रुपये की राशि उपयोग की जाती है। यह परंपरा पुजारी पं. तिवारी के पिता दुर्गाशंकर तिवारी द्वारा करीब 52 साल पहले प्रारंभ की गई थी, जो अब तक जारी है। खजांची मंदिर में मूर्तियां सप्त धातु से निर्मित हैं, मूर्तियां सुंदर और आकर्षक हैं। भक्त कई बार इन्हें निहारते ही रहते हैं।
वजीरपुरा क्षेत्र स्थित यह प्राचीन मंदिर श्री झालरिया मठ डीडवाना (राज.) शाखा का है।
- फोटो : सोशल मीडिया
श्री झालरिया मठ डीडवाना (राज.) की शाखा है मंदिर
वजीरपुरा क्षेत्र स्थित यह प्राचीन मंदिर श्री झालरिया मठ डीडवाना (राज.) शाखा का है। श्रीश्री 1008 श्री बाल मुकुंदाचार्य महराज द्वारा यह मंदिर स्थापित है। वर्तमान मठाधीश श्रीश्री 1008 घनश्यामाचार्य महाराज के सान्निध्य में परंपरानुसार भगवान का झूलोत्सव एवं जन्माष्टमी पर्व मनाया जा रहा है। झूलोत्सव में प्रभुश्री के दर्शन होंगे। यहां पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर्व को लेकर पुजारी सीताराम तिवारी, परिजन व भक्तगण कई दिन से तैयार कर रहे थे।
वजीरपुरा क्षेत्र स्थित यह प्राचीन मंदिर श्री झालरिया मठ डीडवाना (राज.) शाखा का है। श्रीश्री 1008 श्री बाल मुकुंदाचार्य महराज द्वारा यह मंदिर स्थापित है। वर्तमान मठाधीश श्रीश्री 1008 घनश्यामाचार्य महाराज के सान्निध्य में परंपरानुसार भगवान का झूलोत्सव एवं जन्माष्टमी पर्व मनाया जा रहा है। झूलोत्सव में प्रभुश्री के दर्शन होंगे। यहां पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर्व को लेकर पुजारी सीताराम तिवारी, परिजन व भक्तगण कई दिन से तैयार कर रहे थे।
