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Indore Water Crisis: दोपहर की भीषण गर्मी में पानी का संघर्ष, रिंग रोड से सटे इलाकों में रहवासियों की फजीहत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Dinesh Sharma
Updated Sat, 02 May 2026 06:31 AM IST
सार
इंदौर में भीषण गर्मी और गिरते भूजल स्तर से जल संकट गहरा गया है। बोरिंग सूख रहे हैं, टैंकर कम पड़ रहे हैं और लोग दूर-दूर से पानी ला रहे हैं। यशवंत सागर सहित जलाशयों का स्तर घटा है। प्रशासन टैंकर आपूर्ति, मैपिंग और नर्मदा परियोजना से राहत देने की कोशिश कर रहा है।
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इंदौर में जलसंकट से लोग परेशान होने लगे हैं।
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में जल संकट गहराता जा रहा है। इस वर्ष गर्मी के तेवर तीखे हैं। इसके परिणामस्वरूप शहर के कई हिस्सों में जल संकट तेजी से बढ़ रहा है। भीषण तपिश और गिरते भूजल स्तर ने आम जनता की मुश्किलों को दोगुना कर दिया है। लगातार बोरिंग सूखते जा रहे हैं और पार्षदों द्वारा सप्लाई करवाए जा रहे टैंकर भी कम पड़ने लगे हैं। नतीजा यह है कि कई क्षेत्रों में पानी भरने के लिए लंबी लंबी कतारें नजर आ रही हैं। लोग गाड़ियों से कई किमी की दूरी तय करके पानी भरकर घर की जरूरतें पूरी कर रहे हैं। रिंगरोड से सटी बस्तियों में तो हालात और भी खराब हैं। यहां पर बसाहट ज्यादा है और नर्मदा लाइन भी अधिकांश क्षेत्रों में पहुंची नहीं है। इससे यहां के लोगों को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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इंदौर में जलसंकट पर बोले रहवासी
- फोटो : अमर उजाला
पानी के लिए लंबी जद्दोजहद
इंदौर के रिंगरोड के इलाकों और कई घनी बस्तियों में सुबह होते ही लोग डिब्बे और बाल्टियां लेकर पानी की तलाश में निकल पड़ते हैं। शहर के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर है, जहां पिछले कुछ हफ्तों में भूजल स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। यहां रहने वाले और एक आईटी कंपनी में नौकरी करने वाले हितेश ने बताया कि कई कॉलोनियों के निजी और सार्वजनिक बोरिंग पूरी तरह सूख चुके हैं। लोग 2 से 5 किलोमीटर दूर स्थित सार्वजनिक प्याऊ या अन्य स्रोतों से अपनी गाड़ियों पर पानी ढोकर लाने को मजबूर हैं।
दोपहर की भीषण गर्मी में पानी के लिए संघर्ष
इसी क्षेत्र के व्यवसायी धर्मेंद्र ने बताया कि हमें अपनी दुकानें बंद करने के बाद नगर निगम की पानी टंकियों पर पानी भरने के लिए आना पड़ता है। इसमें दो से तीन घंटे का समय लग जाता है। धर्मेंद्र ने बताया कि दोपहर के समय पानी भरने आते हैं ताकि भीड़ कम मिले लेकिन इस समय इतनी तेज धूप रहती है कि बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ये भी पढ़ें- दुकानें बंद कर टंकियों पर उमड़ी भीड़, तीन किमी दूर से ला रहे पानी; आधे शहर में त्राहिमाम
इंदौर के रिंगरोड के इलाकों और कई घनी बस्तियों में सुबह होते ही लोग डिब्बे और बाल्टियां लेकर पानी की तलाश में निकल पड़ते हैं। शहर के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर है, जहां पिछले कुछ हफ्तों में भूजल स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। यहां रहने वाले और एक आईटी कंपनी में नौकरी करने वाले हितेश ने बताया कि कई कॉलोनियों के निजी और सार्वजनिक बोरिंग पूरी तरह सूख चुके हैं। लोग 2 से 5 किलोमीटर दूर स्थित सार्वजनिक प्याऊ या अन्य स्रोतों से अपनी गाड़ियों पर पानी ढोकर लाने को मजबूर हैं।
दोपहर की भीषण गर्मी में पानी के लिए संघर्ष
इसी क्षेत्र के व्यवसायी धर्मेंद्र ने बताया कि हमें अपनी दुकानें बंद करने के बाद नगर निगम की पानी टंकियों पर पानी भरने के लिए आना पड़ता है। इसमें दो से तीन घंटे का समय लग जाता है। धर्मेंद्र ने बताया कि दोपहर के समय पानी भरने आते हैं ताकि भीड़ कम मिले लेकिन इस समय इतनी तेज धूप रहती है कि बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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इंदौर में जलसंकट पर बोले रहवासी
- फोटो : अमर उजाला
जलाशयों का गिरता स्तर
गर्मी के कारण वाष्पीकरण की दर बढ़ने से शहर की प्यास बुझाने वाले प्रमुख स्रोत जैसे यशवंत सागर, बिलावली और सिरपुर तालाब के जल स्तर में भी तेजी से कमी आई है। विशेष रूप से यशवंत सागर, जो पश्चिमी इंदौर को करीब 30 एमएलडी पानी की आपूर्ति करता है, अब गंभीर स्तर पर पहुंच गया है।
महापौर बोले जल संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए बनाई है विशेष टीमें
महापौर पुष्यमित्र भार्गव का का कहना है कि नगर निगम शहर के जल संकट को लेकर पूरी तरह सजग है। हमने नर्मदा चतुर्थ चरण के कार्यों को गति दी है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने। वर्तमान संकट को देखते हुए सभी जोन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जहां भी पाइपलाइन या बोरिंग की समस्या है, वहां तत्काल टैंकरों के माध्यम से आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं। हम जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं।
ये भी पढ़ें- अप्रैल में ही सूखने लगे शहर के जलस्रोत, 100 से ज्यादा कॉलोनियों में बोरिंग फेल; हाहाकार
गर्मी के कारण वाष्पीकरण की दर बढ़ने से शहर की प्यास बुझाने वाले प्रमुख स्रोत जैसे यशवंत सागर, बिलावली और सिरपुर तालाब के जल स्तर में भी तेजी से कमी आई है। विशेष रूप से यशवंत सागर, जो पश्चिमी इंदौर को करीब 30 एमएलडी पानी की आपूर्ति करता है, अब गंभीर स्तर पर पहुंच गया है।
महापौर बोले जल संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए बनाई है विशेष टीमें
महापौर पुष्यमित्र भार्गव का का कहना है कि नगर निगम शहर के जल संकट को लेकर पूरी तरह सजग है। हमने नर्मदा चतुर्थ चरण के कार्यों को गति दी है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने। वर्तमान संकट को देखते हुए सभी जोन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जहां भी पाइपलाइन या बोरिंग की समस्या है, वहां तत्काल टैंकरों के माध्यम से आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं। हम जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं।
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इंदौर में जलसंकट पैर पसार रहा है।
- फोटो : अमर उजाला
नगर निगम कमिश्नर बोले प्रभावित इलाकों की मैपिंग जारी
नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने कहा कि भूजल स्तर गिरने के कारण कुछ क्षेत्रों में बोरिंग बंद हुए हैं। हमने प्रभावित इलाकों की मैपिंग की है और वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर अतिरिक्त टैंकर लगाए गए हैं। पानी की बर्बादी रोकने के लिए विशेष टीमें निगरानी कर रही हैं। नागरिकों से भी अपील है कि वे पेयजल का उपयोग सीमित और संभलकर करें।
नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने कहा कि भूजल स्तर गिरने के कारण कुछ क्षेत्रों में बोरिंग बंद हुए हैं। हमने प्रभावित इलाकों की मैपिंग की है और वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर अतिरिक्त टैंकर लगाए गए हैं। पानी की बर्बादी रोकने के लिए विशेष टीमें निगरानी कर रही हैं। नागरिकों से भी अपील है कि वे पेयजल का उपयोग सीमित और संभलकर करें।

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