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Ujjain Mahakal: सावन मास में बाबा की नगरी में उमड़ेगा भक्तों का सैलाब, 10 रूपों में दर्शन देंगे महाकाल

Fri, 23 Jun 2023 08:27 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Fri, 23 Jun 2023 08:27 AM IST
सार

Ujjain Mahakal: सावन मास में बाबा की नगरी में उमड़ेगा भक्तों का सैलाब, 10 रूपों में दर्शन देंगे महाकाल

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Ujjain Mahakal: Devotees will throng Baba city in the month of Sawan, Mahakal will appear in 10 forms
भक्तों का हाल जानने निकलेंगे बाबा महाकाल (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की भक्ति के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। भोलेनाथ के भक्त जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और व्रत कर भगवान को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। वैसे तो हर तीन वर्ष में एक बार पुरुषोत्तम यानी की अधिकमास आता है, लेकिन इस बार सावन मास में 19 वर्षों बाद एक ऐसा महासंयोग आ रहा है, जब यह अधिकमास सावन मास में आएगा और इस बार श्रद्धालु कुल 59 दिन तक भगवान भोलेनाथ की भक्ति कर पाएंगे। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालु धार्मिक नगरी उज्जैन में विराजमान द्वादश ज्योर्तिलिंगो में से एक विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के दर्शन, पूजन और उनका आशीर्वाद लेने पहुंचेंगे। वैसे तो मंदिर में होने वाले हर उत्सव की छटा निराली ही होती है, लेकिन श्रावण भादो मास में बाबा महाकाल जिन्हें उज्जैन की जनता राजा मानती है। वह अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए 10 बार नगर भ्रमण पर निकलेंगे। इस वर्ष श्रावण मास 4 जुलाई से शुरू होगा, जो 30 अगस्त तक रहेगा। इस दौरान पूरे दो मास अधिकमास रहेगा। दो श्रावण मास होने से श्रावण सोमवार की संख्या 4 से बढ़कर 8 हो गई है। इसके बाद भादौ के प्रथम 2 सोमवार को भी भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाएगी। इस तरह इस बार भगवान महाकाल की कुल 10 सवारियां निकलेंगी।


1985 में 10 तो वर्ष 2004 में निकाली गई थी 11 सवारियां
शहर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित आनंदशंकर व्यास ने बताया कि 19 वर्षों बाद ऐसा महासंयोग आया है, जब श्रावण मास में अधिक मास आ रहा है। जिसके कारण दो श्रावण होने की स्थिति बनी है। उन्होंने बताया कि 1985 में भी श्रावण में अधिकमास आने पर महाकालेश्वर मंदिर से 10 सवारियां निकाली गई थीं। जबकि 2004 में भी ऐसा ही संयोग बनने पर कुल 11 सवारियां निकाली जा चुकी हैं। पूर्व की तरह ही इस वर्ष भी परंपराओं का निर्वहन करते हुए राजाधिराज बाबा महाकाल की 10 सवारियां निकाली जाएंगी। 
Ujjain Mahakal: Devotees will throng Baba city in the month of Sawan, Mahakal will appear in 10 forms
दो सावन पड़ने की वजह से निकलेंगी 10 सवारियां (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
सिंधिया राजवंश में हुई थी सवारी निकालने की शुरूआत
उज्जैन के लोग भगवान महाकाल को अपना राजा मानते हैं। सवारी के दौरान जब भगवान महाकाल की पालकी नगर भ्रमण पर निकलती है, तो ऐसा माना जाता है कि भगवान अपने भक्तों का हाल-चाल जानने के लिए शहर भ्रमण कर रहे हैं। ये परंपरा अधिक पुरानी नहीं है। इसे सिंधिया राजवंश ने शुरू किया। रियासतकाल के दौरान उज्जैन पर सिंधियां राजवंश का प्रभाव था। उस समय सिंधिया परिवार के विद्वानों ने भगवान और भक्तों की दूरी कम करने के लिए ये परंपरा शुरू की, जिसने आज भव्य रूप ले लिया है। आज भी महाकाल की अंतिम सवारी में सिंधिया परिवार का कोई न कोई सदस्य बाबा महाकाल की आरती करने जरूर आता है।

इस दिन निकलेगी बाबा महाकाल की सवारी
पहली सवारी - 10 जुलाई 2023
दूसरी सवारी - 17 जुलाई 2023
तीसरी सवारी - 24 जुलाई 2023
चौथी सवारी - 31 जुलाई 2023
पांचवी सवारी - 7 अगस्त 2023
छठी सवारी - 14 अगस्त 2023
सातवीं सवारी - 21 अगस्त 2023
आठवीं सवारी - 28 अगस्त 2023
नौवीं सवारी - 4 सितंबर 2023
अंतिम शाही सवारी - 11 सितंबर 2023 
Ujjain Mahakal: Devotees will throng Baba city in the month of Sawan, Mahakal will appear in 10 forms
सावन मास में प्रजा का हाल जानने निकलेंगे बाबा (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
पालकी हाथी और आठ रथ पर निकलेंगे बाबा महाकाल 
इस वर्ष बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए कुल 10 बार नगर भ्रमण पर निकलेंगे। हर वर्ष बाबा महाकाल की छह से सात सवारी निकाली जाती है, लेकिन इस बार अधिकमास होने के कारण कुल 10 सवारियां निकाली जाएगी। जिसके लिए श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति ने एक माह पूर्व से ही तैयारियां शुरू कर दी थी। इस बार सवारी में पालकी और हाथी के साथ कुल आठ रथ शामिल होंगे। जिन पर बाबा महाकाल के अलग-अलग स्वरूप प्रति सवारी में बढ़ाए जाएंगे। महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश गुरु ने बताया कि पहली सवारी में भगवान की पालकी में भगवान मनमहेश भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे। दूसरी सवारी में हाथी पर भगवान मनमहेश तो पालकी में भगवान चंद्रमौलेश्वर का स्वरूप भक्तों को दर्शन देगा। इसी तरह तीसरी सवारी में गरुड़ पर शिव तांडव स्वरूप, चौथी सवारी में नंदी पर भगवान महाकाल का उमा महेश स्वरूप, पांचवी सवारी में बैलगाड़ी पर होलकर स्वरूप, छठी सवारी में बैलगाड़ी पर घटाटोप स्वरूप, सातवीं सवारी में जटाशंकर स्वरूप, आठवीं सवारी मे कोटेश्वर स्वरूप, नवमीं सवारी में सप्तधान स्वरूप के साथ ही अंतिम सवारी में यह सभी स्वरूप एक साथ बाबा महाकाल के भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे। बताया जाता है कि मंदिर में बाबा महाकाल की सवारी के लिए पांच पुराने रथ तो तैयार हैं, लेकिन इस बार सवारी की संख्या अधिक होने पर दिल्ली, इंदौर और उज्जैन के दानदाताओं के सहयोग से 3 नए रथ का निर्माण श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति के द्वारा करवाया जा रहा है जो कि इस सवारी में नजर आएंगे।
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