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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Ujjain: 350 Girl Students Protest School Shifting, Emotional Outburst Raises Questions Over Girls’ Education

Ujjain: स्कूल शिफ्टिंग के खिलाफ 350 छात्रा का हल्लाबोल, आंसूओं में निकला गुस्सा, बेटियों की पढ़ाई पर उठे सवाल

Fri, 14 Aug 2026 08:02 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Fri, 14 Aug 2026 08:02 PM IST
सार

उज्जैन में स्कूल शिफ्टिंग के फैसले के खिलाफ छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा। करीब 350 छात्राओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन से फैसला बदलने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान दो छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई।

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Ujjain: 350 Girl Students Protest School Shifting, Emotional Outburst Raises Questions Over Girls’ Education
कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठी छात्राएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारों के बीच शहर से स्कूल को दूरदराज इलाके में शिफ्ट किए जाने को लेकर लगभग साढ़े तीन सौ छात्राओं ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान दो छात्राएं बेहोश हो गईं, जिन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं एक छात्रा कलेक्ट्रेट के बाहर फूट-फूटकर रो पड़ी और स्कूल को दूर शिफ्ट नहीं करने की गुहार लगाई।

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जानकारी के अनुसार सराफा स्कूल को शहर से करीब 12 से 15 किलोमीटर दूर दाऊदखेड़ी शिफ्ट किए जाने के विरोध में छात्राओं ने ये प्रदर्शन किया था। छात्राओं और अभिभावकों ने स्कूल को दाऊदखेड़ी शिफ्ट किए जाने को लेकर कई सवाल उठाए हैं। छात्राओं का कहना है कि स्कूल को शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर और अपेक्षाकृत एकांत क्षेत्र में ले जाने से आने-जाने के दौरान सुरक्षा का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने हादसों और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई है।
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शिक्षा संघर्ष समिति से जुड़े अधिवक्ता जितेंद्र सेंगर के अनुसार नए प्रावधानों के तहत स्कूल निर्धारित दूरी के दायरे में होना चाहिए। ऐसे में छात्राओं और अभिभावकों ने सवाल उठाया है कि स्कूल को शहर से इतनी दूर ग्रामीण क्षेत्र में क्यों शिफ्ट किया जा रहा है। 
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प्रदर्शनकारियों के अनुसार इस फैसले का असर केवल सराफा स्कूल तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि सराफा, महाराजवाड़ा, नूतन, सीएम राइज और माधवेंद्र सहित करीब छह स्कूलों के 2,500 से 2,600 विद्यार्थियों के इससे प्रभावित होने की बात कही जा रही है। छात्राओं और अभिभावकों का कहना है कि दूर-दराज के इलाकों से आने वाले विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचने में काफी समय लगेगा। उनका दावा है कि कुछ बच्चे सुबह करीब 7 बजे घर से निकलते हैं और शाम 7 बजे तक वापस लौटते हैं। ऐसे में लंबी यात्रा के कारण पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय नहीं बचेगा।

अभिभावकों का कहना है कि ऑटो चालक, भट्ठों पर काम करने वाले और रोज कमाने-खाने वाले परिवारों के लिए बच्चों को रोजाना इतनी दूर स्कूल छोड़ना और वापस लाना मुश्किल होगा। इस फैसले सबसे ज्यादा आर्थिक रूप से कमजोर परिवार प्रभावित होंगे।


सूत्रों और अभिभावकों के अनुसार स्कूलों के कुछ प्रिंसिपल और शिक्षक भी स्कूलों को दूर शिफ्ट किए जाने के फैसले से सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि दूरी बढ़ने से कई छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और कुछ छात्राएं स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर हो सकती हैं। हालांकि प्रशासनिक कार्रवाई के डर से शिक्षक खुलकर अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्र खत्री ने इस मामले में कहा कि स्कूल शिफ्टिंग का फैसला शासन स्तर पर लिया गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल अंतिम निर्णय जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समिति को लेना है। छात्राओं और अभिभावकों के इस विरोध के बाद स्कूल शिफ्टिंग का मुद्दा गरमा गया है। अब निगाहें जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समिति के आगामी निर्णय पर टिकी हैं।

 

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