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Rajasthan: जेन अल्फा के सामने दो दिन बाद प्रशासन झुका, छह मांगों पर बनी सहमति
Fri, 14 Aug 2026 07:42 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Fri, 14 Aug 2026 07:42 PM IST
सार
Gen Alfa Protest: अलवर के जोधावास सरकारी स्कूल में जर्जर छत की पट्टी गिरने के बाद छात्रों ने दो दिन तक धरना दिया। जर्जर भवन, शिक्षकों की कमी और खराब रास्ते समेत कई मांगों को लेकर हुए आंदोलन के बाद प्रशासन ने छात्रों की प्रमुख मांगों पर सहमति जताई।
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राजस्थान में स्कूली छात्रों ने किया प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
स्कूल की जर्जर छत की पट्टी टूटकर नीचे गिरी तो छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। गनीमत रही कि हादसे के वक्त कोई छात्र उसकी चपेट में नहीं आया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। इसी घटना के बाद जोधावास के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के छात्र अपनी सुरक्षा और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए। गुरुवार से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को भी जारी रहा। आखिरकार दो दिन के आंदोलन के बाद प्रशासन को छात्रों की मांगों पर सहमति जतानी पड़ी और धरना समाप्त हुआ।
जर्जर भवन में तीन कमरों में पढ़ने को मजबूर छात्र
जोधावास गांव का सरकारी स्कूल लंबे समय से जर्जर भवन की समस्या से जूझ रहा है। विद्यालय भवन को पिछले वर्ष ही जर्जर घोषित किया जा चुका था। इसके बावजूद नए भवन का निर्माण नहीं होने से विद्यार्थियों को महज तीन कमरों में पढ़ाई करनी पड़ रही है। इनमें से कुछ कमरे स्टाफ रूम और प्रधानाचार्य कक्ष के रूप में इस्तेमाल हो रहे हैं। बारिश के दौरान इन कमरों से भी पानी टपकने की शिकायत है।
छत की पट्टी गिरी तो छात्रों ने संभाला मोर्चा
बुधवार को स्कूल की जर्जर इमारत की छत की एक पट्टी अचानक टूटकर गिर गई। घटना के बाद छात्रों में दहशत फैल गई। विद्यार्थियों ने जर्जर भवन हटाने और नए भवन का निर्माण कराने की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया। छात्रों का सवाल था कि जब भवन पहले ही जर्जर घोषित हो चुका है तो उसे हटाने में देरी क्यों की जा रही है।
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दूसरे दिन भी धरने पर डटे रहे छात्र
शुक्रवार को भी छात्र और ग्रामीण धरने पर डटे रहे। स्थिति को देखते हुए एसडीएम मालाखेड़ा पिंकी गुर्जर, विकास अधिकारी विजय कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी अलवर मनोज शर्मा समेत शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर मांगें सुनीं, लेकिन छात्र केवल आश्वासन के बजाय समयबद्ध कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
सीजेपी की एंट्री से तेज हुई मांगों पर चर्चा
शुक्रवार को आंदोलन में सीजेपी की टीम भी पहुंची। सीजेपी के को-कन्वीनर आशुतोष रांका के नेतृत्व में टीम ने छात्रों और ग्रामीणों से उनकी समस्याएं सुनीं। इसके बाद अधिकारियों के साथ मांगों को लेकर चर्चा हुई। लंबी बातचीत के बाद प्रशासन ने प्रमुख मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
छह मांगों पर प्रशासन ने दी सहमति
थानागाजी विकास अधिकारी विजय कुमार के अनुसार, छात्रों की छह प्रमुख मांगों पर सहमति बनी है। इनमें जर्जर स्कूल भवन को ध्वस्त करना, शिक्षकों की नियुक्ति, नए विद्यालय भवन का तीन महीने में निर्माण शुरू करना, स्कूल के रास्ते की जर्जर पुलिया का निर्माण, छह कमरों की एक सप्ताह में मरम्मत और खेल मैदान का आवंटन शामिल है।
अस्थायी शिक्षक नहीं, स्थायी नियुक्ति की मांग
विद्यालय में शिक्षकों की कमी भी छात्रों के आक्रोश की बड़ी वजह रही। अधिकारियों ने तृतीय श्रेणी के अस्थायी शिक्षकों की व्यवस्था का विकल्प रखा, लेकिन छात्रों और ग्रामीणों ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनकी मांग है कि लेक्चरर के पद स्वीकृत किए जाएं और रिक्त वरिष्ठ अध्यापक पदों पर स्थायी नियुक्तियां की जाएं।
सीबीईओ और भाजपा नेता पर बदतमीजी के आरोप
आंदोलन के दौरान कुछ छात्र-छात्राओं ने सीबीईओ और स्थानीय भाजपा नेता पर कथित बदतमीजी के आरोप लगाए। छात्रों ने संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अधिकारियों ने शिकायत सुनी और उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
रात तक धरने पर बैठे रहे छात्र
गुरुवार देर शाम तक छात्र धरना स्थल पर बैठे रहे। अभिभावकों के समझाने के बाद वे रात में घर लौटे, लेकिन शुक्रवार सुबह दोबारा धरने पर बैठ गए। छात्रों ने स्पष्ट किया था कि ठोस और समयबद्ध आश्वासन मिलने तक आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा।
यह भी पढ़ें: आरक्षण लॉटरी से निकला नया सियासी मुद्दा, ‘आबादी बनाम भागीदारी’ पर BJP-कांग्रेस आमने-सामने
‘84 हजार जर्जर कक्षाओं में पढ़ रहे बच्चे’
सीजेपी के को-कन्वीनर आशुतोष रांका ने कहा कि जोधावास की समस्या केवल एक स्कूल की नहीं है। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में करीब 84 हजार कक्षाएं जर्जर हालत में हैं और 15 लाख से अधिक बच्चों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकार से जर्जर स्कूल भवनों के निर्माण के लिए केंद्र से बजट लेने या ऋण लेने की मांग की।
अब आश्वासन से आगे कार्रवाई का इंतजार
जिला शिक्षा अधिकारी अलवर मनोज शर्मा ने बताया कि अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर छात्रों को समझाया। मांगों पर चर्चा के बाद धरना समाप्त कर दिया गया। आंदोलन फिलहाल खत्म हो गया है, लेकिन अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन के आश्वासन जमीन पर कितनी जल्दी उतरते हैं। छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि कार्रवाई चाहते हैं।
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जर्जर भवन में तीन कमरों में पढ़ने को मजबूर छात्र
जोधावास गांव का सरकारी स्कूल लंबे समय से जर्जर भवन की समस्या से जूझ रहा है। विद्यालय भवन को पिछले वर्ष ही जर्जर घोषित किया जा चुका था। इसके बावजूद नए भवन का निर्माण नहीं होने से विद्यार्थियों को महज तीन कमरों में पढ़ाई करनी पड़ रही है। इनमें से कुछ कमरे स्टाफ रूम और प्रधानाचार्य कक्ष के रूप में इस्तेमाल हो रहे हैं। बारिश के दौरान इन कमरों से भी पानी टपकने की शिकायत है।
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छत की पट्टी गिरी तो छात्रों ने संभाला मोर्चा
बुधवार को स्कूल की जर्जर इमारत की छत की एक पट्टी अचानक टूटकर गिर गई। घटना के बाद छात्रों में दहशत फैल गई। विद्यार्थियों ने जर्जर भवन हटाने और नए भवन का निर्माण कराने की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया। छात्रों का सवाल था कि जब भवन पहले ही जर्जर घोषित हो चुका है तो उसे हटाने में देरी क्यों की जा रही है।
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दूसरे दिन भी धरने पर डटे रहे छात्र
शुक्रवार को भी छात्र और ग्रामीण धरने पर डटे रहे। स्थिति को देखते हुए एसडीएम मालाखेड़ा पिंकी गुर्जर, विकास अधिकारी विजय कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी अलवर मनोज शर्मा समेत शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर मांगें सुनीं, लेकिन छात्र केवल आश्वासन के बजाय समयबद्ध कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
सीजेपी की एंट्री से तेज हुई मांगों पर चर्चा
शुक्रवार को आंदोलन में सीजेपी की टीम भी पहुंची। सीजेपी के को-कन्वीनर आशुतोष रांका के नेतृत्व में टीम ने छात्रों और ग्रामीणों से उनकी समस्याएं सुनीं। इसके बाद अधिकारियों के साथ मांगों को लेकर चर्चा हुई। लंबी बातचीत के बाद प्रशासन ने प्रमुख मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
छह मांगों पर प्रशासन ने दी सहमति
थानागाजी विकास अधिकारी विजय कुमार के अनुसार, छात्रों की छह प्रमुख मांगों पर सहमति बनी है। इनमें जर्जर स्कूल भवन को ध्वस्त करना, शिक्षकों की नियुक्ति, नए विद्यालय भवन का तीन महीने में निर्माण शुरू करना, स्कूल के रास्ते की जर्जर पुलिया का निर्माण, छह कमरों की एक सप्ताह में मरम्मत और खेल मैदान का आवंटन शामिल है।
अस्थायी शिक्षक नहीं, स्थायी नियुक्ति की मांग
विद्यालय में शिक्षकों की कमी भी छात्रों के आक्रोश की बड़ी वजह रही। अधिकारियों ने तृतीय श्रेणी के अस्थायी शिक्षकों की व्यवस्था का विकल्प रखा, लेकिन छात्रों और ग्रामीणों ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनकी मांग है कि लेक्चरर के पद स्वीकृत किए जाएं और रिक्त वरिष्ठ अध्यापक पदों पर स्थायी नियुक्तियां की जाएं।
सीबीईओ और भाजपा नेता पर बदतमीजी के आरोप
आंदोलन के दौरान कुछ छात्र-छात्राओं ने सीबीईओ और स्थानीय भाजपा नेता पर कथित बदतमीजी के आरोप लगाए। छात्रों ने संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अधिकारियों ने शिकायत सुनी और उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
रात तक धरने पर बैठे रहे छात्र
गुरुवार देर शाम तक छात्र धरना स्थल पर बैठे रहे। अभिभावकों के समझाने के बाद वे रात में घर लौटे, लेकिन शुक्रवार सुबह दोबारा धरने पर बैठ गए। छात्रों ने स्पष्ट किया था कि ठोस और समयबद्ध आश्वासन मिलने तक आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा।
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‘84 हजार जर्जर कक्षाओं में पढ़ रहे बच्चे’
सीजेपी के को-कन्वीनर आशुतोष रांका ने कहा कि जोधावास की समस्या केवल एक स्कूल की नहीं है। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में करीब 84 हजार कक्षाएं जर्जर हालत में हैं और 15 लाख से अधिक बच्चों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकार से जर्जर स्कूल भवनों के निर्माण के लिए केंद्र से बजट लेने या ऋण लेने की मांग की।
अब आश्वासन से आगे कार्रवाई का इंतजार
जिला शिक्षा अधिकारी अलवर मनोज शर्मा ने बताया कि अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर छात्रों को समझाया। मांगों पर चर्चा के बाद धरना समाप्त कर दिया गया। आंदोलन फिलहाल खत्म हो गया है, लेकिन अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन के आश्वासन जमीन पर कितनी जल्दी उतरते हैं। छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि कार्रवाई चाहते हैं।