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इंदौर ऐसे ही नहीं बन गया देश में अव्वलः सफाई से सुरक्षा तक... इन वजहों से इंदौर ने मारा स्वच्छता का पंच
Sat, 20 Nov 2021 03:38 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Sat, 20 Nov 2021 03:38 PM IST
सार
इंदौर ने स्वच्छता के मामले में लगातार पांचवीं बार अव्वल स्थान हासिल किया है। इसके लिए कई स्तरों पर प्रयास किए गए।
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इंदौर ने सफाई के मामले में फिर बाजी मारी है। लगातार पांचवें साल इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर बना है।
- फोटो : अमर उजाला
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ये इंदौर है। देश का सबसे स्वच्छ शहर। एक या दो नहीं बल्कि लगातार पांचवीं बार। हर क्षेत्र में अव्वल। लेकिन क्या यूं ही ये तमगा हासिल हो जाता है। क्या यूं ही इंदौर उपलब्धियों का शहर बन जाता है। जी नहीं, इसके लिए करनी पड़ती है जी-तोड़ मेहनत। सूरज उगने से ढलने तक। इसके लिए चाहिए सही मार्गदर्शन और जीवटता। नवाचार और दूरदर्शिता। आह्वान और क्रियान्वयन। जीवटता और सहभागिता। इन सभी मापदंडों पर खरा उतरता है इंदौर। कैसे स्वच्छता का पंच मारकर इंदौर देश में सिरमौर बना। क्या है वे वजहें जो इंदौर को देश के बाकी शहरों से अलग बनाती है। आइये, जानते हैं...
2016 से ही इंदौर में स्वच्छता के प्रति जागरुकता के लिए अभियान शुरू हो गए थे। इसका ही नतीजा है कि आज इंदौर पाचंवें साल लगातार सबसे स्वच्छ शहर बना है।
- फोटो : अमर उजाला
तीन साल चलाया स्वच्छता अभियान
वर्ष 2016, 2017 और 2018 में जागरूकता अभियान चलाया गया था। इन वर्षों में ही घर-घर से कचरा कलेक्शन एवं परिवहन को लेकर विभिन्न अधोसंरचनाएं एवं प्रक्रियाएं स्थापित की गई ताकि शहर में स्वच्छता की स्थायी आदत बन सके। वर्ष 2018 एवं 2019 में इंदौर नगर निगम ने देवगुराड़िया स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड के पुराने लेगेसी वेस्ट के बायो रेमेडाइजेशन पर कार्य किया जिससे देवगुराड़िया ट्रेंचिंग वर्तमान में पूर्ण रूप से स्वच्छ क्षेत्र के रूप में जाना जाने लगा है।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित हो रहा पानी
वर्ष 2020-21 में केन्द्र सरकार के स्वच्छता मापदण्डों के तहत इंदौर नगर निगम द्वारा शहर को वाटर प्लस के रूप में प्रथम शहर का खिताब प्राप्त करने के क्षेत्र में वृहद कार्य किया गया। इंदौर शहर वाटर प्लस के रूप में घोषित हो जाने से इसका सीधा लाभ शहरवासियों के स्वास्थ्य पर हुआ है, क्योंकि सीवरेज का गंदा पानी का भूजल में मिलना रूका है तो घरों का एवं संस्थानों का प्रदूषित गंदा पानी भी भू-तल पर स्थित नदी-नालों एवं तालाबों में मिलना बंद हुआ है। नगर निगम द्वारा विकसित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के माध्यम से अब नदी में केवल इन प्लांट्स में उपचारित जल ही जा रहा है।
वर्ष 2016, 2017 और 2018 में जागरूकता अभियान चलाया गया था। इन वर्षों में ही घर-घर से कचरा कलेक्शन एवं परिवहन को लेकर विभिन्न अधोसंरचनाएं एवं प्रक्रियाएं स्थापित की गई ताकि शहर में स्वच्छता की स्थायी आदत बन सके। वर्ष 2018 एवं 2019 में इंदौर नगर निगम ने देवगुराड़िया स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड के पुराने लेगेसी वेस्ट के बायो रेमेडाइजेशन पर कार्य किया जिससे देवगुराड़िया ट्रेंचिंग वर्तमान में पूर्ण रूप से स्वच्छ क्षेत्र के रूप में जाना जाने लगा है।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित हो रहा पानी
वर्ष 2020-21 में केन्द्र सरकार के स्वच्छता मापदण्डों के तहत इंदौर नगर निगम द्वारा शहर को वाटर प्लस के रूप में प्रथम शहर का खिताब प्राप्त करने के क्षेत्र में वृहद कार्य किया गया। इंदौर शहर वाटर प्लस के रूप में घोषित हो जाने से इसका सीधा लाभ शहरवासियों के स्वास्थ्य पर हुआ है, क्योंकि सीवरेज का गंदा पानी का भूजल में मिलना रूका है तो घरों का एवं संस्थानों का प्रदूषित गंदा पानी भी भू-तल पर स्थित नदी-नालों एवं तालाबों में मिलना बंद हुआ है। नगर निगम द्वारा विकसित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के माध्यम से अब नदी में केवल इन प्लांट्स में उपचारित जल ही जा रहा है।
इंदौर में घर-घर से कलेक्शन करता कचरा वाहन। अब इंदौर में कचरे को सिर्फ गीले-सूखे में नहीं बल्कि छह अलग-अलग भागों में बांटा जाता है।
- फोटो : अमर उजाला
छह जीरो वेस्ट वार्ड घोषित
वर्ष 2020-21 तक में इंदौर नगर निगम एक और उपलब्धि के तहत 6 जीरो वेस्ट वार्ड भी घोषित हुए हैं तथा यह कार्य निरंतर जारी है। इंदौर नगर निगम द्वारा शहर की गंदी पड़ी बैकलेन्स को भी नागरिकों के सहयोग से उसे साफ-सुथरा एवं सुंदर बनाया गया है। शहर में विभिन्न बस्तियों, चौराहों, फुटपाथों आदि पर भी वृहद सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्य स्वच्छता के तहत किए गए।
मेनहोल से मशीन होल का शत-प्रतिशत पालन
सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज के अंतर्गत इंदौर नगर निगम द्वारा स्वच्छ सर्वेक्षण एवं सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज के समस्त मापदंडों के अनुरूप मेनहोल से मशीन होल का शत-प्रतिशत पालन किया गया एवं सफाई मित्रों को 'स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY)' अंतर्गत लोन उपलब्ध करवाने, वर्दी, सुरक्षा गियर, किट ड्रेस, मास्क, ग्लब्स इत्यादि उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, साथ ही असंगठित सफाई मित्रों को चिन्हित कर रोजगार उपलब्ध करवाया जा रहा है।
वर्ष 2020-21 तक में इंदौर नगर निगम एक और उपलब्धि के तहत 6 जीरो वेस्ट वार्ड भी घोषित हुए हैं तथा यह कार्य निरंतर जारी है। इंदौर नगर निगम द्वारा शहर की गंदी पड़ी बैकलेन्स को भी नागरिकों के सहयोग से उसे साफ-सुथरा एवं सुंदर बनाया गया है। शहर में विभिन्न बस्तियों, चौराहों, फुटपाथों आदि पर भी वृहद सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्य स्वच्छता के तहत किए गए।
मेनहोल से मशीन होल का शत-प्रतिशत पालन
सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज के अंतर्गत इंदौर नगर निगम द्वारा स्वच्छ सर्वेक्षण एवं सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज के समस्त मापदंडों के अनुरूप मेनहोल से मशीन होल का शत-प्रतिशत पालन किया गया एवं सफाई मित्रों को 'स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY)' अंतर्गत लोन उपलब्ध करवाने, वर्दी, सुरक्षा गियर, किट ड्रेस, मास्क, ग्लब्स इत्यादि उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, साथ ही असंगठित सफाई मित्रों को चिन्हित कर रोजगार उपलब्ध करवाया जा रहा है।
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इंदौर में मशीनों से कचरे का पृथककरण किया जाता है। कचरे से इंदौर नगर निगम को हर साल 20 करोड़ रुपये की आय होती है।
- फोटो : अमर उजाला
सफाई के साथ आय भी
इंदौर की जनता कचरा प्रबंधन के लिए 45 करोड़ रुपये दे रही है जिससे बेहतर कचरा प्रबंधन हो रहा है। नगर निगम ने 137 किमी नदी-नालों की सफाई पर करीब 343 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। प्रतिदिन 1200 टन कचरे का निपटान हो रहा है। शहर की सफाई व्यवस्था 12 हजार 364 सफाई मित्रों के हवाले हैं, जो बिना थके, बिना रूके दिन-रात काम करते हैं। इंदौर में कचरे से सालाना करीब 20 करोड़ रुपये की आय हो रही है। कार्बन क्रेडिट, सीएनजी, कंपोस्ट खाद, सीएनजी वेस्ट व सूखे कचरे से आय शामिल है। इंदौर में प्रतिदिन करीब 700 टन गीला कचरा निकलता है वहीं लगभग 450 टन सूखा कचरा निकलता है।
सौ किमी लंबी सीवरेज लाइन डाली
नदी-नालों की सफाई के लिए इंदौर नगर निगम ने नवाचार किया और नदी-नालो में मिलने वाले गंदे पानी के 7 हजार से ज्यादा आउट फॉल्स तलाशे। सौ किमी लंबी सीवरेज लाइन डाली। नदी-नालों में मिलने वाली लाइन को सीवरेज लाइन से जोड़कर उसमें मिलाया। गंदे पानी को साफ करने के लिए 75 एमएलडी क्षमता के सात नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए।
इंदौर की जनता कचरा प्रबंधन के लिए 45 करोड़ रुपये दे रही है जिससे बेहतर कचरा प्रबंधन हो रहा है। नगर निगम ने 137 किमी नदी-नालों की सफाई पर करीब 343 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। प्रतिदिन 1200 टन कचरे का निपटान हो रहा है। शहर की सफाई व्यवस्था 12 हजार 364 सफाई मित्रों के हवाले हैं, जो बिना थके, बिना रूके दिन-रात काम करते हैं। इंदौर में कचरे से सालाना करीब 20 करोड़ रुपये की आय हो रही है। कार्बन क्रेडिट, सीएनजी, कंपोस्ट खाद, सीएनजी वेस्ट व सूखे कचरे से आय शामिल है। इंदौर में प्रतिदिन करीब 700 टन गीला कचरा निकलता है वहीं लगभग 450 टन सूखा कचरा निकलता है।
सौ किमी लंबी सीवरेज लाइन डाली
नदी-नालों की सफाई के लिए इंदौर नगर निगम ने नवाचार किया और नदी-नालो में मिलने वाले गंदे पानी के 7 हजार से ज्यादा आउट फॉल्स तलाशे। सौ किमी लंबी सीवरेज लाइन डाली। नदी-नालों में मिलने वाली लाइन को सीवरेज लाइन से जोड़कर उसमें मिलाया। गंदे पानी को साफ करने के लिए 75 एमएलडी क्षमता के सात नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए।
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इंदौर में पानी को ट्रीटमेंट के बाद ही नालों में छोड़ा जाता है। इससे नालों में बहने वाला गंदा पानी भी अब बीते दिनों की बात हो गई है।
- फोटो : अमर उजाला
हर तरह के कचरे के लिए अलग डस्टबिन
कचरे के पृथकीकरण के लिए इंदौर नगर निगम ने नवाचार किया। यह देश का पहला ऐसा शहर है जहां घरों से कचरे को अलग करके लिया जाता है। बाकी शहरों में गीले व सूखे कचरे को ही अलग किया जाता है। इंदौर में छह तरह से कचरे को अलग किया जाता है। छह अलग-अलग डस्टिबन की मदद से कचरे को अलग-अलग किया जाता है। गीले-सूखे कचरे के अलावा प्लास्टिक, घरेलू खतरनाक वेस्ट, इलेक्ट्रिक ओर सेनेटरी कचरे को अलग रखा जाता है। करीब 600 कचरा संग्रह वाहनों में ये डस्टबिन लगवाए गए हैं। कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर भी ये कचरा अलग-अलग प्रोसेस होता है।
कॉलोनियों के पिछले हिस्सों को किया साफ
शहर की कॉलोनियों के पिछले हिस्सों को साफ करने के लिए भी निगम ने पहल की। आमतौर पर कॉलोनियों के आगे का हिस्सा तो साफ रहता है मगर पीछे के हिस्से में गंदगी रहती है। निगम ने इसकी वजहें तलाशी और फिर कॉलोनियों के लोगों को अपने साथ जोड़ा। उन्हें प्रोत्साहित किया कि कैसे वे कॉलोनी के पिछले हिस्से को आकर्षक रूप से सजा सकते हैं ताकि वहां कोई कचरा न फेंके। नतीजा यह हुआ कि लोगों ने ये कोशिश की और पहले जहां कचरा होता था वह स्थान साफ नजर आता है। इसका उपयोग अलग-अलग गतिविधयों के लिए किया जाता है।
घरों में ही कचरे का निपटान
नगर निगम ने जीरो वेस्ट वार्ड की दिशा में भी काम किया। पहले इंदौर के वार्ड 73 को जीरो वेस्ट वार्ड बनाया, जहां के चार हजार से ज्यादा घरों में गीले कचरे का निपटान घरों में ही करने के लिए जनता को जोड़ा गया। कंपोस्ट प्लांट लगाए। सूखे कचरे को रीसाइकिल करने का काम किया। बगीचों में कंपोस्ट पिट के माध्यम से पेड़ों के कचरे को खाद में तब्दील किया। इसके बाद कुछ अन्य वार्डों को जीरो वेस्ट वार्ड बनाया।
कचरे के पृथकीकरण के लिए इंदौर नगर निगम ने नवाचार किया। यह देश का पहला ऐसा शहर है जहां घरों से कचरे को अलग करके लिया जाता है। बाकी शहरों में गीले व सूखे कचरे को ही अलग किया जाता है। इंदौर में छह तरह से कचरे को अलग किया जाता है। छह अलग-अलग डस्टिबन की मदद से कचरे को अलग-अलग किया जाता है। गीले-सूखे कचरे के अलावा प्लास्टिक, घरेलू खतरनाक वेस्ट, इलेक्ट्रिक ओर सेनेटरी कचरे को अलग रखा जाता है। करीब 600 कचरा संग्रह वाहनों में ये डस्टबिन लगवाए गए हैं। कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर भी ये कचरा अलग-अलग प्रोसेस होता है।
कॉलोनियों के पिछले हिस्सों को किया साफ
शहर की कॉलोनियों के पिछले हिस्सों को साफ करने के लिए भी निगम ने पहल की। आमतौर पर कॉलोनियों के आगे का हिस्सा तो साफ रहता है मगर पीछे के हिस्से में गंदगी रहती है। निगम ने इसकी वजहें तलाशी और फिर कॉलोनियों के लोगों को अपने साथ जोड़ा। उन्हें प्रोत्साहित किया कि कैसे वे कॉलोनी के पिछले हिस्से को आकर्षक रूप से सजा सकते हैं ताकि वहां कोई कचरा न फेंके। नतीजा यह हुआ कि लोगों ने ये कोशिश की और पहले जहां कचरा होता था वह स्थान साफ नजर आता है। इसका उपयोग अलग-अलग गतिविधयों के लिए किया जाता है।
घरों में ही कचरे का निपटान
नगर निगम ने जीरो वेस्ट वार्ड की दिशा में भी काम किया। पहले इंदौर के वार्ड 73 को जीरो वेस्ट वार्ड बनाया, जहां के चार हजार से ज्यादा घरों में गीले कचरे का निपटान घरों में ही करने के लिए जनता को जोड़ा गया। कंपोस्ट प्लांट लगाए। सूखे कचरे को रीसाइकिल करने का काम किया। बगीचों में कंपोस्ट पिट के माध्यम से पेड़ों के कचरे को खाद में तब्दील किया। इसके बाद कुछ अन्य वार्डों को जीरो वेस्ट वार्ड बनाया।
