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'एक गे की फीलिंग कोई तीन अक्षरों में कैसे समझ सकता है'

Fri, 29 Jan 2016 04:20 PM IST
Updated Fri, 29 Jan 2016 04:20 PM IST
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Manoj bajpayee's movie aligarh trailer out

कोई मेरी फीलिंग को तीन अक्षरों में कैसे समझ सकती है, ये तो एक कविता की तरह हैं भावानात्मक और बेकाबू। यही कहना है एक समलैंगिक का जिसे कोई समझ नहीं रहा।

'एक गे की फीलिंग कोई तीन अक्षरों में कैसे समझ सकता है'

Manoj bajpayee's movie aligarh trailer out

हमारे देश और समाज में किसी का समलैंगिक होना किसी गुनाह से कम नहीं है। इस मुद्दे पर बात करना भी हमेशा मुश्किलों से भरा रहा है। लेकिन अब इस पर बात कर रहे हैं मनोज वाजपेयी खुद एक समलैंगिक की जिंदगी जीकर।

'एक गे की फीलिंग कोई तीन अक्षरों में कैसे समझ सकता है'

Manoj bajpayee's movie aligarh trailer out

मनोज वाजपेयी 'अलीगढ़' में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के एक गे प्रोफेसर का रोल निभाया है। फिल्म में उनके अभिनय की तारीफें हो रही हैं। वहीं दूसरी ओर सेंसर बोर्ड फिल्म की कहानी को लेकर आंखे तरेर रहा है।

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'एक गे की फीलिंग कोई तीन अक्षरों में कैसे समझ सकता है'

Manoj bajpayee's movie aligarh trailer out

हिन्दुस्तान टाइम्स ने का कहना है कि मनोज वाजपेयी आपका दिल जीत लेंगे। अखबार ने फिल्म को हिन्दी सिनेमा की शानदार फिल्मों मे शामिल किया है। एचटी ने फिल्म को पांच मं से साढ़े चार स्टार दिए हैं। समीक्षा पढ़ने को क्लिक करें।

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'एक गे की फीलिंग कोई तीन अक्षरों में कैसे समझ सकता है'

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प्रोफेसर सिराज को यूनिवर्सिटी से निलंबित कर दिया जाता है। इसके बाद हर तरफ उनका विरोध शुरू हो जाता है। हर तरफ उनके पुतले जलाए जाते हैं। यहां तक कि उनको रहने के लिए एक कमरा तक नहीं दिया जाता।

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