Lumpy Skin Disease: राजस्थान में कोरोना के बढ़ते मामले और मंकीपॉक्स के खतरे से जनता जूझ रही है। लंपी स्किन डिजीज प्रदेश के पशुधन पर जानलेवा साबित हो रही है। इसका सबसे ज्यादा असर गायों पर देखने को मिल रहा है। हालात यह हैं कि यह लंपी वायरस प्रदेश के 16 जिलों में फैल चुका है। इससे अब तक करीब आठ हजार गायों की मौत हो चुकी है। 1.58 गाय वायरस से संक्रमित हैं और 53 हजार से ज्यादा वायरस को हरा चुकी हैं। इन आंकड़ों से आप इस वायरस के खतरना रूप का अंदाजा लगा सकते हैं। राजस्थान और गुजरात की बात करें तो इस वायरस से दोनों राज्यों में दस हजार से ज्यादा गायों की मौत हो चुकी हैं, वहीं दो लाख से ज्यादा गाय इस वायरस से संक्रमित हैं।
Lumpy Skin Disease: पाकिस्तान से आया लंपी वायरस तीन राज्य में फैला, राजस्थान-गुजरात में 10 हजार गायों की मौत
पाकिस्तान से आए वायरस का तीन राज्यों में कहर, राजस्थान-गुजरात में 10 हजार गायों की मौत, दो लाख संक्रमित
गुजरात में 2000 पशुओं की मौत
बताया जा रहा है कि लंपी स्किन डिजीज नाम की यह बीमारी पड़ोसी देश पाकिस्तान के रास्ते अप्रैल महीने में देश में आई थी। हालांकि, यह बीमारी अफ्रीका मूल की बताई जा रही है। वहां इसका पहला केस 1929 में सामने आया था। पाकिस्तान से भारत आई यह बीमारी राजस्थान ही नहीं गुजरात में भी कहर बरपा रही है। गुजरात में अब तक इस बीमारी से 2000 से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है। 58,000 से ज्यादा पशु इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं। हालांकि, दावा किया जा रहा है कि सरकार ने करीब 13 लाख मवेशियों को टीका लगा दिया है।
राजस्थान के 16 जिलों में फैला वायरस
राजस्थान के 16 जिले लंपी वायरस फैल चुका है। जालौर, पाली, सिरोही, जोधपुर, बाडमेर, जैसलमेर, हनुमानगढ़, अजमेर, बीकानेर, चूरू, गंगानगर, नागौर, जयपुर, उजयपुर, सीकर, झूंझूंनु जिले में वायरस से संक्रमित गाय लगातार मिल रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राजस्थान में लंपी वायरस से 7964 गायों की मौत हो चुकी हैं। एक लाख 58 हजार से ज्यादा गाय वायरस से संक्रमित हो गईं हैं। 53 हजार से ज्यादा इस बीमारी से ठीक भी हुईं हैं। बता दें कि पशुपालन विभाग के अनुसार प्रदेश में 2727 रजिस्टर्ड गौशाला हैं। इसके अलावा कई अनरजिस्टर्ड डेयरियां भी प्रदेश में चल रही हैं। गांव और शहरों में रहने वाले लाखों लोग अपने घरों में गाय-भैंस भी पालते हैं।
वायरस की रोकथाम और संक्रमित पशुओं के इलाज के लिए सरकार ने 16 जिलों में अतिरिक्त पशु चिकित्सा अधिकारियों और पशुधन सहायकों को तैनात किया है। 30 पशु चिकित्सक और 103 पशुधन सहायक की अतिरिक्त फोर्स 10 अधिक सबसे प्रभावित जिलों में लगाई गई है। जिलों में लगातार दवाओं की सप्लाई की जा रही है। साथ ही पशुओं के इलाज के लिए एक करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी जारी किया गया है।
शुक्रवार को सीएम अशोक गहलोत ने वायरस प्रभावित जिलों के जनप्रतिनिधियों को निर्देश दिए कि वह लंपी वायरस को लेकर स्थानीय पशुपालकों, किसानों, दुग्ध विक्रेताओं, गौशाला संचालकों के साथ बैठकें कर उन्हें जागरूक करें। साथ ही जिला प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में जाकर स्थिति जानने और आमजन को जागरूक करने के निर्देश दिए। इस दौरान गहलोत ने कहा कि रोकथाम के लिए विधायक, महापौर, जिला प्रमुख, प्रधान, सरंपचों सहित सभी जनप्रतिनिधिगणों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वे अपने क्षेत्रों में दौरा करके पशुपालकों को जागरूक करें।
मध्यप्रदेश में लंपी वायरस की एंट्री
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में भी लंपी वायरस के लक्षण पशुओं में देखने को मिले हैं। इसके बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। जिले के ग्राम सेमलिया और बरबोदना में पशुओं में बीमारी के लक्षण मिलने के बाद पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने गांवों में जाकर जांच शुरू कर दी है। अब तक 38 पशुओं में वायरस के लक्षण पाए गए हैं। उनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। बीमारी की रोकथाम के लिए टीका द्रव्य शीघ्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था गुजरात की कंपनी से चर्चा करके की जा रही है। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने पशु चिकित्सा सेवा विभाग के डॉक्टर्स के दल बनाकर उन्हें जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर निरीक्षण के निर्देश दिए हैं।
यह होते हैं बीमारी के लक्षण
पशु चिकित्सक के अनुसार लंपी स्किन डिजीज का सबसे ज्यादा असर दुधारू पशुओं पर दिख रहा है। यह डिजीज होने पर पशुओं के शरीर पर गांठें बनने लगती हैं। उन्हें तेज बुखार आता है, साथ ही सिर और गर्दन में तेज दर्द होता है। डिजीज के चपेट में आने से पशुओं के दूध देने की क्षमता भी घट जाती है।