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सुन लीजिए टॉपर की सफलता की कहानी, उन्हीं की जुबानी

Tue, 19 May 2015 08:56 AM IST
Updated Tue, 19 May 2015 08:56 AM IST
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सुन लीजिए टॉपर की सफलता की कहानी, उन्हीं की जुबानी

 hpseb 10th class result toper interview.

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवीं परीक्षा में अव्वल रहे छात्रों की जुबानी जानिए कैसे और किस तरह उन्होंने सफलता हासिल की। पढ़िए पूरी खबर..




सुन लीजिए टॉपर की सफलता की कहानी, उन्हीं की जुबानी

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हर रोज की 10 से 12 घंटे पढ़ाई
दसवीं में टॉप करने वाली एसवीएम घुमारवीं की छात्रा उर्वशी का सपना डॉक्टर बनकर कैंसर रोगियों का इलाज करना है। प्रतिदिन 10 से 12 घंटे पढ़ाई करने वाली उर्वशी ने 694 अंक प्राप्त कर राज्य भर में पहला स्थान हासिल किया। उर्वशी ने कहा कि वह चिकित्सक बनकर देश और गरीब वर्ग के लोगों की सेवा करेंगी। इसके लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को दिया है। उर्वशी के पिता किशोरी लाल की घुमारवीं बस अड्डे के पास पीसीओ की दुकान है। माता सुषमा गृहिणी हैं। उर्वशी इसी स्कूल में जमा एक में साइंस की छात्रा हैं। 

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कड़ी मेहनत हमेशा ‌दिलवाती है सफलता
दसवीं कक्षा में राज्य भर में दूसरा स्थान हासिल करने वाली एसवीएम घुमारवीं की छात्रा पलक शर्मा का सपना चिकित्सक बनना है। पलक शर्मा ने 690 अंक लेकर प्रदेश भर में दूसरा स्थान हासिल किया है। पलक बड़ी होकर गरीब वर्ग के लोगों की नब्ज टटोलकर उनका इलाज करेंगी। पलक शर्मा ने सफलता का श्रेय गुरुजनों और अभिभावकों को दिया है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के आर्शीवाद से ही उन्हें यह सफलता मिली है। हालांकि बेहतर परिणाम के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत भी की। जमा एक में इसी स्कूल में साइंस विषय में पढ़ाई कर रही हैं। पिता कुलदीप शर्मा और माता रक्षा देवी शिक्षक हैं।

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माता पिता को दिया सफलता श्रेय
प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवीं की मेरिट लिस्ट में तीसरा स्थान हासिल कर नागचला के अमोल शर्मा ने
स्कूल और माता-पिता का नाम रोशन किया। अमोल शर्मा डॉक्टर बनना चाहते हैं। किंग जार्ज रॉयल पब्लिक स्कूल नेरचौक के छात्र अमोल शर्मा ने दसवीं में 688 अंक लिए हैं। पिता दिनेश चंद शर्मा एचआरटीसी में असिस्टेंट मैनेजर हैं, जबकि माता तुलसी देवी सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। अमोल ने अपनी उपलब्धि का श्रेय माता-पिता और बहन को दिया है। किंग जार्ज स्कूल के प्रधानाचार्य केपी शर्मा ने अमोल को बधाई दी है।

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पढ़ाई के जनून ने दिलवाई सफलता
दसवीं के परीक्षा परिणाम में चौथे स्थान पर रही स्वाति राणा भारतीय सेना में अधिकारी बनना चाहती हैं। स्वाति राणा ने बताया कि उसकी छोटे भाई के साथ हमेशा पढ़ने की प्रतिस्पर्धा होती है। दोनों भाई बहन एक दूसरे के साथ शर्त लगाकर पढ़ने बैठते हैं कि सबसे अधिक देर तक कौन पढ़ाई करता है। राणा ने बताया कि सफलता का श्रेय प्रधानाचार्य राकेश कुमार, पिता कुशल कुमार, माता सरोज वाला और छोटे भाई साहिल को जाता है। स्वाति के पिता कुशल कुमार आईपीएच विभाग में बतौर फिट्टर हारचक्कियां में कार्यरत हैं और माता सरोज कुमारी गृहिणी हैं।

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