हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में नेशनल हाईवे-5 पर निगुलसरी के पास पहाड़ टूटने से हुए भयावह भूस्खलन के दूसरे दिन गुरुवार को बचाव टीमों ने मलबे से चार और लोगों के शवों को निकाला है। मरने वालों की संख्या 14 पहुंच गई है। हादसे के करीब 20 घंटों बाद हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) बस के कुछ टुकड़े और टायरों को भी खोज निकाला गया है। हालांकि, बस में सवार यात्रियों में से 16 अब भी लापता हैं।
हादसे के दिन 40 से ज्यादा लोगों के लापता होने की आशंका थी। बताया जा रहा है कि भूस्खलन की चपेट में आए टिपर, कारों, सूमो और अन्य वाहनों में सवार घायलों और मृतकों को निकाल लिया गया है। अब बस यात्री ही लापता हैं। वहीं, समय बीतने के साथ-साथ लापता लोगों के परिजनों की उम्मीदें कम होती जा रही हैं। घटनास्थल पर परिजनों की चीख-पुकार है। शवों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि पहचान कर पाना मुश्किल साबित हो रहा है।
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किन्नौर में बचाव अभियान।
- फोटो : अमर उजाला
बुधवार रात 9:00 बजे बंद किए गए बचाव अभियान को गुरुवार तड़के 3:30 बजे युद्धस्तर पर शुरू किया गया। एनडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस, होमगार्ड, एसजेवीएन की सीआईएसएफ की टीमों के 200 से ज्यादा जवानों और स्थानीय लोगों ने सुबह करीब 7:00 बजे तक चार शवों को निकाला।
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बचाव अभियान।
- फोटो : अमर उजाला
ड्रोन की मदद से लापता लोगों को खोजने की कोशिश जारी रही। टीम के सदस्यों ने एनएच से करीब 500 मीटर नीचे बह रही सतलुज नदी के पास पहुंचकर बस के टुकड़े खोजे। इस दौरान पहाड़ी से पत्थर गिरने का सिलसिला जारी रहा, जिससे बचाव अभियान बार-बार बाधित होता रहा।
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घटनास्थल पर बचाव अभियान।
- फोटो : अमर उजाला
बचाव अभियान में जुटीं टीमों के लिए सतलुज जल विद्युत निगम ने खाने-पीने की व्यवस्था की। अब शुक्रवार को सुबह फिर बचाव अभियान शुरू किया जाएगा। वहीं, सीएम जयराम ठाकुर गुरुवार को राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लेने के लिए घटनास्थल पर पहुंचे।
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बचाव व सर्च अभियान।
- फोटो : अमर उजाला
11:30 बजे उन्होंने हेलीकॉप्टर से जायजा लिया और फिर सड़क मार्ग से 12:30 बजे घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने मृतकों और लापता लोगों के परिजनों से मिलकर गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। आश्वासन दिया कि संकट की इस घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भावानगर पहुंचकर घायलों का कुशलक्षेम भी जाना।