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मंडी हॉट सीट: कांग्रेस में टिकट पर घमासान, भाजपा को इनसे है खतरा

Thu, 28 Mar 2019 10:12 AM IST
अरविन्द ठाकुर अखिलेश महाजन, अमर उजाला, मंडी
अखिलेश महाजन, अमर उजाला, मंडी Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 28 Mar 2019 10:12 AM IST
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Mandi MP seat race between candidates for congress ticket lok sabha election 2019

मंडी संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के लिए विकट स्थिति पैदा हो गई है। कांग्रेस में पंडित सुखराम और आश्रय की वापसी के बाद मंडी सीट को लेकर घमासान मचा हुआ है। पार्टी के भीतर टिकट तय होने से पहले ही विरोध की चिंगारियां सुलग रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, सुखराम और आश्रय दिल्ली में डटे हैं। उधर, भाजपा का उम्मीदवार तय है, लेकिन टिकट न मिलने से खफा चेहरों का निर्दलीय चुनावी ताल ठोकने या भितरघात का खतरा बना हुआ है। सीएम जयराम ठाकुर खुद इस स्थिति को भांपते हुए समन्वय स्थापित करने में लगे हैं। ऐसे में हॉट सीट मंडी के समीकरण समय के साथ-साथ तेजी से बदल रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा के समर्थकों में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है और लोकसभा चुनावों में मंडी सीट राजनीति के दिग्गजों की सक्रियता से आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

Mandi MP seat race between candidates for congress ticket lok sabha election 2019
वीरभद्र सिंह - फोटो : फाइल फोटो

पहले मंडी में कांग्रेस के दावेदारों में वीरभद्र सिंह, विक्रमादित्य और कौल सिंह के नाम थे। कौल पहले से किनारा कर चुके हैं। लेकिन अब आश्रय का नाम भी जुड़ चुका है। वीरभद्र दिल्ली का रुख कर चुके हैं। यहां चेहरों में बंटी कांग्रेस के समर्थक भी टिकट फाइनल होने के बाद आगामी रणनीति की ताक पर हैं। कांग्रेस की यह परंपरागत सीट रही है। मंडी सदर व आसपास के विस क्षेत्रों में पंडित सुखराम के परिवार का जबकि शिमला और चंबा से जुड़े रामपुर, किन्नौर और भरमौर में वीरभद्र सिंह के परिवार का वर्चस्व रहा है। दोनों ही दिग्गज नेता एक दूसरे के धुर विरोधी भी हैं।

Mandi MP seat race between candidates for congress ticket lok sabha election 2019
महेश्वर सिंह - फोटो : फाइल फोटो

मंडी संसदीय क्षेत्र का चेहरा सीएम जयराम ठाकुर हैं। यहां भाजपा की सबसे कड़ी अग्निपरीक्षा है। सीएम के करीबी मौजूदा सांसद रामस्वरूप का टिकट तय हो चुका है। लेकिन टिकट न मिलने से खफा नेताओं और उनके समर्थकों की बगावत भी सबसे बड़ा खतरा बनकर भाजपा के लिए खड़ा है। ब्रिगेडियर का नाम बतौर निर्दलीय खड़े होने की संभावना पर खूब उछल रहा है। सैनिकों व पूर्व सैनिकों के परिवार, फोरलेन प्रभावित और उनका लोकल दायरा ब्रिगेडियर का वोट बैंक है। महेश्वर भी कुछ नाखुश चल रहे हैं उनकी कुल्लू में खासी पैठ है। देव समाज का वह हिस्सा भी हैं।

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खुशाल ठाकुर - फोटो : फाइल फोटो

भाजपा में टिकट की दौड़ में शामिल रहे कारगिल हीरो ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर का कहना है कि उनके साथ सैनिक परिवार जुड़े हैं। वह पूर्व सैनिक लीग और फोरलेन संघर्ष समिति के अध्यक्ष भी हैं। करीब दो लाख सैनिक व उनके परिवार मंडी में उनसे जुड़े हैं। दस हजार फोरलेन प्रभावित परिवारों के अलावा अपने क्षेत्र में उनका अलग सामाजिक दायरा भी है। सभी का दबाव है कि आजाद उम्मीदवार मैदान में उतरूं। जल्दबाजी में निर्णय नहीं करूंगा। सभी से बातचीत और विचार के बाद फैसला करूंगा।

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Mandi MP seat race between candidates for congress ticket lok sabha election 2019
महेश्वर सिंह

महेश्वर सिंह ने कहा कि पार्टी से बंधा हूं और पार्टी के लिए ही कार्य करूंगा। पिछले विस चुनावों में अपने जिले में अपने भतीजे के खिलाफ प्रचार किया। बंजार से भाजपा के उम्मीदवार सुरेंद्र शौरी की जीत तभी संभव हुई है। हम उस युग के हैं जब कहते थे कि अटल आडवाणी कमल निशान, मांग रहा हिंदुस्तान। आज हम चुप बैठे हैं। महेश्वर ने कहा कि जिस के खिलाफ बैठे हुए हैं वही कैंडीडेट हमारे गले में बांध दिया तो हम कौन सा ढोल बजाएंगे। आज सुबह और शाम का पता नहीं। समर्थकों को कह रहा हूं कि फूल का मफलर गले में डाला है, इसका ध्यान रखना भाई। चाहे बंदा हेतराम होगा, राम सड़िंग होगा, रामस्वरूप होगा या शाम स्वरूप होगा, जो भी हो फूल ही खिलाना।

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