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चावल का विकल्प बनेगा ये प्राचीन अनाज, कैंसर-दिल के रोगों से बचाएगा

मनोज शर्मा, अमर उजाला, नगवाईं (मंडी) Published by: Krishan Singh Updated Thu, 26 Sep 2019 02:52 PM IST
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shimla: Foxtail Millet (Kauni) of the grass species will be a substitute for rice
फॉक्सटेल मिल्लेट (काउणी) - फोटो : अमर उजाला

औषधीय गुणों से भरपूर हिमाचल में घास प्रजाति का फॉक्सटेल मिल्लेट (काउणी) अब चावल का विकल्प बन सकेगा। यह बासमती चावल से भी महंगा होगा। चावल के रूप में इसके इस्तेमाल से किसी तरह की बीमारी का भय नहीं होगा।

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फॉक्सटेल मिल्लेट (काउणी) - फोटो : अमर उजाला

किसी भी उम्र में इसके सेवन से न केवल आप तंदुरुस्त रहेंगे, बल्कि इसमें पाए जाने वाले माइक्रो न्यूट्रेंट कैंसर, अस्थमा और दिल के रोगों से लड़ने में कारगर होंगे। कृषि विभाग ने परंपरागत कृषि योजना के तहत प्राचीन काउणी की व्यावसायिक खेती के लिए सफल ट्रायल कृषि विज्ञान केंद्र बजौरा में किया है।

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फॉक्सटेल मिल्लेट (काउणी) - फोटो : अमर उजाला

केंद्र ने तीन माह में व्यावसायिक दृष्टि से इसकी पैदावार तैयार कर दी है। विभाग प्रदेश सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा। उसके बाद ही इसकी व्यावसायिक खेती के लिए नीति निर्धारित होगी। पहले चंबा, कुल्लू्, किन्नौर की पर्वतीय शृंखलाओं में इसकी बहुत खेती होती थी।

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फॉक्सटेल मिल्लेट (काउणी) - फोटो : अमर उजाला

डॉ. चंद्रकांता वत्स (पोषण विज्ञान विशेषज्ञ) ने बताया कि फॉक्सटेल मिल्लेट को स्थानीय भाषा में काउणी कहा जाता है। शोध में पाया कि इसमें कई पोषक तत्व हैं, जो माइक्रो न्यूट्रीएंटस में आते हैं। इनमें मैग्नीशियम, कैल्शियम, मैग्नीज, फास्फोरस, फाइबर (रेशा), विटामिन बी और एंटी ऑक्सीडेंट जैसे तत्व पाए जाते हैं। यह मैग्नीशियम और पोटाशियम का एक अच्छा स्रोत है जो कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल कर दिल की बीमारियों से बचाता है।

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- फोटो : अमर उजाला

इसमें फाइबर अधिक होता है जो पाचन क्रिया को ठीक रखकर हाजमा दुरुस्त रखता है। साथ ही गैस, कब्ज और एसीडिटी से बचाता है। एंटी ऑक्सीडेंट शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति देता है। यह जानलेवा कैंसर की रोकथाम भी करता है। केवीके बजौरा के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. केसी शर्मा ने बताया कि परंपरागत कृषि योजना के तहत कृषि विज्ञान केंद्र में ट्रायल पर आधारित फसल लहलहा रही है। 

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